अधिकारियों और कंपनियों ने की सांठगांठ, दून नगर निगम मे हुआ खूब बंदरबांट, पढ़िये पूरी खबर…

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देहरादून:  नगर निगम के स्वास्थ्य अनुभाग के अधिकारियों और कूड़ा उठान कार्य में लगी कंपनियों की साठगांठ में निगम को लाखों रुपये का चूना लग गया। निगम अधिकारियों ने जनवरी में बिना वर्क आर्डर जारी किए शहर में मैसर्स सन लाइट व मैसर्स भार्गव को 29 वार्डों के कूड़ा उठान की जिम्मेदारी सौंपी थी। कंपनी तभी से वार्डों में कूड़ा उठान शुल्क भी लेती रहीं और कूड़ा भी निगम के ट्रांसफर स्टेशन पर डंप करती रहीं। यही नहीं, इसकी एवज में कंपनी कूड़ा उठान कार्य के खर्च के बिल भी निगम में जमा करती रही। हैरानी वाली बात है कि इन दोनों कंपनियों से निगम का अनुबंध दो माह पूर्व अक्टूबर में हुआ। इस स्थिति में यह कंपनियां वार्डों में घर-घर से वसूला जाने वाला कूड़ा उठान शुल्क निगम में अक्टूबर से जमा कराएंगी।

ऐसे में जनवरी से सितंबर तक वार्डों में वसूला लाखों रुपये का कूड़ा उठान शुल्क कहां गया, इसका जवाब किसी को मालूम नहीं। बता दें कि सालिड वेस्ट मैनेजमेंट के तहत नगर निगम वर्षों तक एक एजेंसी की मानव-शक्ति के जरिये घरों से कूड़ा उठान का कार्य खुद करता रहा। जनवरी-2019 में रैमकी कंपनी से जुड़ी एक कंपनी मैसर्स चेन्नई एमएसडब्लू को पुराने 69 वार्डों का कूड़ा उठान का जिम्मा दिया गया। शेष 31 वार्डों में दो वार्ड अलग-अलग संस्थाओं ने कूड़ा निस्तारण के लिए ले लिए जबकि शेष 29 वार्डों के लिए निगम ने जनवरी-2021 में मैसर्स सनलाइट व मैसर्स भार्गव कंपनी का चयन किया। निगम ने इन कंपनियों को अपनी गाडिय़ां तक कूड़ा उठान कार्य करने को उपलब्ध कराईं।

यह दोनों कंपनियां जनवरी से कूड़ा उठान का शुल्क घर-घर से वसूलती रहीं, लेकिन यह निगम के खजाने में जमा ही नहीं किया गया। जुलाई में निगम बोर्ड बैठक में पार्षदों ने इस मामले में सवाल उठाते हुए कार्रवाई व कंपनी को हटाने की मांग की। पार्षदों ने आरोप लगाए थे कि मैसर्स सनलाइट कंपनी को ‘साठगांठ’ के कारण काम दिया गया है जबकि कंपनी पर फर्जी अनुभव प्रमाण-पत्र प्रस्तुत करने का आरोप भी है। वर्क आर्डर के बिना दोनों कंपनियां अक्टूबर तक अपने 29 वार्डों से कूड़ा उठान करती रहीं, शुल्क भी वसूला लेकिन निगम अधिकारी तमाशा देखते रहे। कंपनी पर वार्डों में मनमानी और मनमाना शुल्क भी लेने का आरोप भी लगा लेकिन लाखों के गोलमाल में अधिकारियों ने अपनी आंखें बंद कर लीं।

मैसर्स सनलाइट के लिए ताक पर रखे गए कायदे

मैसर्स सनलाइट को फायदा पहुंचाने के लिए निगम अधिकारियों ने तमाम नियम व कायदे ताक पर रख दिए। हरिद्वार बाइपास पर कूड़ा ट्रांसफर स्टेशन के जो प्लाट अभी तक चेन्नई कंपनी के पास थे, उनमें से एक बिना टेंडर प्रक्रिया के मैसर्स सनलाइट को सौंप दिया। निगम अधिकारियों का ‘खेल’ यहां भी नहीं रुका। जो प्लाट सनलाइट को दिया गया, उसमें करीब 80 लाख रुपये का कूड़ा डंप था। यह कूड़ा सनलाइट के ट्रकों के जरिये शीशमबाड़ा प्लांट ले जाया गया। इसका भुगतान भी सनलाइट को ही किया जाना है। यही नहीं, नगर निगम ने ट्रांसफर स्टेशन पर ही कूड़ा पृथक करने व निस्तारण की परियोजना का जिम्मा भी सनलाइट को देकर प्लाट की जमीन 15 साल तक कंपनी को मुफ्त में उपलब्ध करा दी।

कंपनी के अफसरों में नोकझोंक

ट्रांसफर स्टेशन को लेकर बुधवार को चेन्नई कंपनी व सनलाइट के अफसरों में निगम में एक अधिकारी के कार्यालय में ही जमकर नोंकझोंक हुई। बताया गया है कि कूड़े से भरा प्लाट दूसरी कंपनी को देने व लाखों के नुकसान को लेकर रैमकी कंपनी व चेन्नई कंपनी के बड़े अधिकारी भी दून पहुंचे और नगर आयुक्त से शिकायत करते हुए न्यायालय जाने की बात कही है।

भाजपा पार्षद अमिता सिंह का कहना है कि नगर निगम में अंधेर नगरी वाली स्थिति हो चुकी है। टेंडर प्रक्रिया से लेकर तमाम कार्यों में घपलेबाजी चल रही है। सनलाइट कंपनी पहले से विवादों में रही है व उसका अनुभव प्रमाण पत्र भी कथित है। निगम के अधिकारी ही बताएं कि बिना वर्क आर्डर के सनलाइट ने जनवरी से कूड़ा उठान कार्य क्यों किया और घरों से शुल्क में वसूले गए लाखों रुपये कहां हैं। यह लाखों रुपये नहीं बल्कि करोड़ों का भ्रष्टाचार है, जिसमें नगर निगम के अधिकारी भी शामिल हैं। शासन में इसकी शिकायत की जाएगी।

चेयरमैन मैसर्स सनलाइट सूर्य प्रकाश फारसी का कहना है कि हमारी कंपनी ने कोई नियम नहीं तोड़े हैं। हमने जनवरी के अंत से कूड़ा उठान जरूर किया, लेकिन किसी भी घर से शुल्क नहीं लिया। जो प्लाट हरिद्वार बाइपास पर निगम ने हमें दिया, उसमें पड़ा हुआ कूड़ा निगम के कहने पर ही हमने शीशमबाड़ा प्लांट में पहुंचाया। अक्टूबर में निगम ने हमसे करार किया है। कूड़ा उठान का जो भी शुल्क हम लेंगे, उसका 20 प्रतिशत निगम में अक्टूबर से जमा कराएंगे।नगर आयुक्त अभिषेक रुहेला ने बताया कि चेन्नई एमएसडब्लू ट्रांसफर स्टेशन से कूड़ा उठाने में सफल नहीं हो रही थी, इस वजह से एक प्लाट सनलाइट को दिया गया है। मैसर्स सनलाइट व भार्गव कंपनी को जो जिम्मेदारी दी गई, वह नियमानुसार दी गई। जहां तक कूड़ा उठान के शुल्क वसूली की बात है तो इसकी जानकारी ली जाएगी।