खनन व्यवसायियों ने की अनिश्चित कालीन हड़ताल, सरकार पर लगाया रॉयल्टी के नियमों पर दोहरा मापदंड अपनाने का आरोप…

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लालकुआं: गौलानदी के खनन व्यवसायियों ने स्टोन क्रेशर संचालकों पर अपने उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए कहा कि क्रेशर संचालक खनन व्यवसायियों को कम रेट दे रहे हैं जिसमें वाहन चलाना मुश्किल हो गया है। उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार रॉयल्टी के नियमों पर दोहरा मापदंड अपनाए हुए हैं जो गौलानदी से जुड़े खनन व्यवसायियों के साथ सीधे-सीधे सौतेला व्यवहार है। गौलानदी खनन व्यवसायियों ने खनन समिति के अध्यक्ष/ जिलाधिकारी नैनीताल के लिये ज्ञापन तैयार किया, जिसमें चेतावनी दी गई है कि यदि अभिलंब क्रेशर स्वामियों ने खनन व्यवसायियों से वार्ता कर रेट उचित नहीं किए तो खनन व्यवसायी सभी स्टोन क्रेशरों के मुख्य द्वार पर धरना प्रदर्शन कर स्टोन क्रेशरों की बिक्री पूरी तरह ठप कर देंगे। जिसकी जिम्मेदारी शासन प्रशासन की होगी। साथ ही ज्ञापन में कहा गया है कि क्रेशर संचालकों के उक्त कार्यों से करोड़ों रुपये राजस्व का नुकसान हो रहा है। जिसकी ओर सरकार  पूरी तरह से उदासीन बनी हुई है।

ज्ञापन में हस्ताक्षर करने वालों में इंदर सिंह बिष्ट, जीवन कबडवाल, देवेंद्र सिंह बिष्ट, दीपक जोशी, वीरेंद्र दानू, लवली गिल, भीम सिंह रावत, रमेश जोशी, हरीश विरखानी, महेश गोस्वामी, हेम चंद्र दुर्गापाल, बलवंत सिंह, बीडी खोलिया, भैरव दत्त जोशी, शंकर जोशी, कमल मिश्रा, विनोद बोरा आदि खनन व्यवसायी शामिल थे।

इसके बाद गौलानदी खनन व्यवसायियों द्वारा हल्दूचौड़ के पंचायत घर में की जा रही बैठक के दौरान पहुंचे उपजिलाधिकारी मनीष कुमार से लंबी वार्ता हुई। उपजिलाधिकारी का कहना था कि खनन व्यवसाई हड़ताल न कर अपना कारोबार करें, प्रशासन क्रेशर संचालकों से वार्ता कराने एवं रॉयल्टी कम कराने में उनकी मदद करेगा। परंतु खनन व्यवसायियों का स्पष्ट रूप से कहना है कि क्रेशर संचालक लंबे समय से खनन व्यवसायियों का उत्पीड़न कर रहे हैं, पिछले वर्ष भी क्रेशर संचालकों की मनमानी के चलते खनन व्यवसायियों को कोई लाभ नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि जब तक स्टोन क्रेशर खनन व्यवसायियों को उचित रेट नहीं देते हैं तब तक वह अपना आंदोलन खत्म नहीं करेंगे। यदि क्रेशर संचालकों ने उनकी अनदेखी की तो क्रेशरों की बिक्री भी रोक दी जाएगी।

खनन व्यवसायियों ने  शिकायत की कि उधमसिंह नगर के पट्टे वाले बहुत ही कम रेट में क्रेशरों को माल दे रहे हैं  और जमकर वाहनों में ओवरलोड ढो रहे हैं। उन्होंने कहा कि पट्टों में अत्यंत न्यूनतम रॉयल्टी का प्रावधान है। जबकि गौला खनन में रायल्टी बहुत अधिक है। खनन व्यवसायियों ने कहा कि पट्टों और गौलानदी की रॉयल्टी एक समान होनी चाहिए। खनन व्यवसाईयों ने चेताया कि यदि रॉयल्टी के नियमों को एक जैसा नहीं किया गया तो खनन व्यवसाई सरकार की दोहरी नीति के खिलाफ भी उग्र आंदोलन शुरू करेंगे। तथा ओवरलोड को लेकर भी जबरदस्त आंदोलन किया जायेगा। काफी लंबे समय तक उपजिलाधिकारी मनीष कुमार सिंह की खनन व्यवसायियों से हुई वार्ता के बाद जब कोई निर्णय नहीं निकल सका तो खनन व्यवसायियों ने जिलाधिकारी और  मुख्यमंत्री को सम्बोधित दो अलग-अलग ज्ञापन  उप जिलाधिकारी को सौंपे।

इधर स्टोन क्रेशर एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश अग्रवाल का कहना है कि खनन व्यवसायी क्रेशरों के खिलाफ आंदोलन करने के बजाए रॉयल्टी कम कराने को लेकर आंदोलन करें, क्योंकि सरकार द्वारा गौलानदी में खनन की रॉयल्टी काफी बढ़ा दी गई है जिसके चलते ही यह स्थिति पैदा हो रही है। उन्होंने कहा कि खनन व्यवसायियों को चाहिए कि वह स्टोन क्रेशर एसोसिएशन के साथ मिलकर बढ़ी हुई रॉयल्टी के खिलाफ क्रेशर संचालकों द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन में  भागीदारी करें, ताकि स्टोन क्रेशर खनन व्यवसायियों को अधिक रेट दे सकें। उन्होंने कहा कि यदि यही हाल रहा तो स्टोन क्रेशर संचालक भी अपने क्रेशर बंद कर देंगे।

बताते चलें कि नैनीताल जिले के लालकुआं और हल्द्वानी डिवीजन के सभी खनन व्यवसायियों ने क्रेशर संचालकों पर बहुत ही कम भाड़ा देने का आरोप लगाते हुए अनिश्चित काल के लिए खनन कार्य बंद कर दिया है। गौलानदी में साढे़ सात हजार से अधिक वाहन स्वामी खनन व्यवसाय करते हैं।

ऐजाज हुसैन की रिपोर्ट

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