बिहार ने कर दिया देश के टॉप फाइव पढ़ाकू जिलों में नाम, बिहार के 4 जिले टॉप 5 मे…

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बिहार: नीति आयोग की नई रिपोर्ट ने सबको चौंका दिया है। बिहार के चार जिले शिक्षा क्षेत्र में अक्टूबर 2021 में बेहतर प्रदर्शन के लिए देश के टॉप 5 जिलों में शामिल हुए हैं। वहीं झारखंड का एक जिला इस लिस्ट में टॉप पर है। शुक्रवार को ‘डेल्टा रैंकिंग’ जारी करते हुए नीति आयोग ने मुजफ्फरपुर को दूसरे स्थान पर रखा है। इसके बाद औरंगाबाद, बांका और शेखपुरा तीसरे, चौथे और पांचवें स्थान पर हैं। झारखंड में दुमका ने शिक्षा के क्षेत्र में सूची में शीर्ष स्थान हासिल किया है।

यहां जानिए डेल्टा रैंकिंग के बारे में
डेल्टा रैंकिंग को देश के छह विकासात्मक क्षेत्रों में 112 से अधिक महत्वाकांक्षी जिलों की ओर से की गई प्रगति के माप के रूप में मापा गया है। रैंकिंग के लिए स्वास्थ्य और पोषण, शिक्षा, कृषि और जल संसाधन, वित्तीय समावेशन, कौशल विकास और बुनियादी ढांचा विकास क्षेत्रों को ध्यान में रखा गया था। इस रैंकिंग के साथ नीति आयोग ने ट्वीट किया कि ‘शिक्षा एक आत्मानिर्भर भारत के कारण को चैंपियन बनाने की कुंजी है। अक्टूबर 2021 के महीने के लिए शिक्षा के क्षेत्र में शीर्ष पांच सबसे बेहतर आकांक्षात्मक जिलों को प्रस्तुत करते हुए बदलाव के चैंपियन को बधाई।’

नई रिपोर्ट से बिहार बमबम

राज्य के शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव संजय कुमार ने शनिवार को इस अखबार को बताया कि विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि हर हाई स्कूल का अपना भवन और बुनियादी ढांचा हो। इनके मुताबिक ‘हम शिक्षकों की उपलब्धता के रूप में एचआर मुद्दों का आकलन कर रहे हैं, खासकर माध्यमिक विद्यालयों में। स्कूलों में प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए पुस्तकालय की किताबें, स्मार्ट क्लास और आईसीटी केंद्र स्थापित किए गए हैं।’

संजय कुमार ने आगे कहा कि ‘कुछ समय पहले, हमने सभी प्राथमिक और उच्च विद्यालयों में सीधे शिक्षकों, प्रधानाध्यापकों और प्रधान शिक्षकों की भर्ती करने का निर्णय लिया था। आगामी सप्ताह में हम बिहार लोक सेवा आयोग को भर्ती के लिए मांग पत्र भेजेंगे। सीधे भर्ती किए गए प्रधानाध्यापक सरकार का हिस्सा होंगे और पंचायतों को रिपोर्ट नहीं करेंगे। वह अधिक जवाबदेह होगा और बेहतर नेतृत्व गुणवत्ता प्रदर्शित करेगा। इसलिए, बिहार में शिक्षा प्रणाली में सुधार के लिए विभाग विभिन्न क्षेत्रों में काम कर रहा है।’ जनवरी 2018 में शुरू किए गए आकांक्षी जिलों के कार्यक्रम का उद्देश्य उन जिलों को बदलना है, जिन्होंने प्रमुख सामाजिक क्षेत्रों में अपेक्षाकृत कम प्रगति दिखाई है। आकांक्षी जिलों की रैंकिंग हर महीने की जाती है।