लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजना की कुल लागत का 90 प्रतिशत वहन करेगी केंद्र सरकार, आचार संहिता से पहले होगा शिलान्यास

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देहरादून: तीन सौ मेगावाट की लखवाड़ बहुउद्देशीय परियोजना की कुल लागत का 90 प्रतिशत खुद वहन करने के केंद्र सरकार के फैसले से राज्य को बड़ी सौगात मिली है। अब विधानसभा चुनाव की आचार संहिता से पहले इसका शिलान्यास होगा। इस योजना से उत्तराखंड को बिजली और देश के अन्य राज्यों को पानी मिलेगा। लखवाड़ जल विद्युत परियोजना का ख्वाब 44 साल बाद जाकर पूरा होगा। वर्ष 1976 में पहली बार योजना आयोग ने प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। वर्ष 1987 में प्रोजेक्ट पर काम शुरू हुआ, लेकिन चार साल बाद ही 1992 में ही काम रोक दिया गया था। वर्ष 2017 में दोबारा काम शुरू करने की तैयारी हुई, तो एनजीटी ने रोक लगा दी।

नए सिरे से पर्यावरणीय आंकलन के बाद अब जाकर प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल पाई है। परियोजना के एक अधिकारी के मुताबिक लगभग प्रोजेक्ट का 30 प्रतिशत काम पूरा हो गया है। डैम की स्टेपिंग के साथ ही अंदरूनी सड़कें बनी हुई हैं। इस प्रोजेक्ट में 780 हेक्टेयर वन भूमि पहले ही हस्तांतरित हो चुकी है।

105 हेक्टेयर नापभूमि का अधिग्रहण होने करने के साथ मुआवजा दे दिया गया है। अब सिर्फ इस भूमि पर बसे 850 परिवारों को अनुग्रह राशि बांटी जानी है। जो राज्य सरकार 75 लाख प्रति हेक्टेयर तय कर चुकी है। अब सिर्फ 50 हेक्टेयर भूमि का और अधिग्रहण किया जाना है।

छह राज्यों को होना है लाभ

इस प्रोजेक्ट से उत्तराखंड के साथ ही हिमाचल, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा को पानी मिलेगा। इन सभी राज्यों के मुख्यमंत्री परियोजना को लेकर समझौते को अंतिम मंजूरी दे चुके हैं। केंद्र की ओर से वित्तीय मंजूरी मिल जाने के बाद अब काम जल्द शुरू हो जाएगा।

लखवाड़ प्रोजेक्ट पर नजर

लखवाड़ परियोजना के तहत उत्तराखंड देहरादून जिले के लोहारी गांव के पास यमुना नदी पर 204 मीटर ऊंचा कंक्रीट का बांध बनेगा। बांध की जल संग्रहण क्षमता 330.66 एमसीएम होगी। इससे 33,780 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी। इसके साथ ही इससे यमुना बेसिन क्षेत्र वाले छह राज्यों में घरेलू तथा औद्योगिक इस्तेमाल और पीने के लिए 78.83 एमसीएम पानी उपलब्ध होगा। प्रोजेक्ट के तहत संग्रहित जल का बंटवारा यमुना के बेसिन क्षेत्र वाले छह राज्यों के बीच 12 मई 1994 को किये गये समझौते के अनुरूप होगा।