थाने से मिलेगा इंसाफ ? कांग्रेस भवन मे पूर्व राज्य मंत्री राजेन्द्र शाह से मारपीट मामले मे कांग्रेस की अनुशासन समिति पर सवाल !

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देहरादून : पूर्व राज्यमंत्री राजेन्द्र शाह के साथ मारपीट का मामला कोतवाली पहुंच गया है। बता दें कि राजेंद्र शाह ने शहर कोतवाली में उनके साथ हुई मारपीट मामले में मुकदमा दर्ज कराया है। कोतवाली पुलिस ने रितेश क्षेत्री, सूरज क्षेत्री, मोहित मेहता,अजय रावत, मोहन काला, अमन एवं अन्य के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। आपको बता दें कि बीते दिनों कांग्रेस भवन के कांग्रेसियों ने ही कांग्रेस के प्रदेश महामंत्री  राजेन्द्र शाह के साथ मारपीट की थी जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था।

कांग्रेस भवन में कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने प्रदेश महामंत्री  राजेन्द्र शाह की पिटाई की थी। राजेंद्र शाह पर हाथ उठाने वाले कांग्रेस कार्यकर्ताओं का आरोप था कि वो हरीश रावत को गाली दे रहे थे और अभद्र भाषा का प्रयोग किया था जबकि राजेंद्र शाह का कहना था कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया। राजेंद्र शाह का आरोप है कि हरीश रावत के लिए अपशब्द का प्रयोग करने का आरोप लगाते हुए मारपीट शुरू कर दी।

कांग्रेस के नेता इसे दुर्भाग्यपूर्ण और आपसी मामला बता तो रहे हैं लेकिन सवाल ये है की चुनाव प्रचार मे लगी कांग्रेस ने पहले घर का झगड़ा घर मे ही क्यों नहीं सुलझाया ? क्या गुटों मे बंटी कांग्रेस के ही किसी गुट ने इस कारनामे को अंजाम दिलवाया ? अगर ऐसा नहीं है तो फिर कांग्रेस की अनुशासन समिति अब तक खामोश क्यों है ? ये मामला कांग्रेस के प्रदेश मुख्यालय से निकालकर थाने तक कैसे पहुंचा काया कांग्रेस के किसी बड़े नेता की जिम्मेदारी नहीं थी की इस मामले का निस्तारण करा दिया जाए?

FIR रिपोर्ट पढ़ने के लिए नीचे क्लिक करें 

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पिछले कुछ समय से हरीश और प्रीतम गुटों के बीच गुटबाजी तेज हो चली है। इस घटना के बाद दोनों गुटों के बीच रार बढ़ गई है। महामंत्री राजेंद्र शाह फिलहाल प्रीतम कैंप के करीबी माने जाते हैं। ऐसे में हरीश समर्थकों के हाथों उनकी पिटाई को इसी खींचतान से जोड़ कर देखी जा रही है। जिसका नुकसान आने वाले चुनावों मे देखने को मिल सकता है। ऐसा नहीं की ये पहली बार कांग्रेस भवन मे हुआ है कांग्रेस भवन मे कई बार मारपीट की और तू –तू, मैं – मैं की खबरें निकलकर सामने आती रहीं हैं कांग्रेस भवन मे नेता दीप बोहरा के साथ पहले भी ये घटना घाट चुकी है। इसके अलावा कांग्रेस की दो महिला प्रदेश प्रवक्ताओं के बीच आपसी विवाद और गुटबाजी और बयान बाजी जगजाहिर है।