उत्तराखंड कांग्रेस मे परिवारवाद हावी ! ये नेता लगाए हैं बच्चों के टिकट के लिये टकटकी…

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देहरादून: परिवारवाद का जनक माने जाने वाली कांग्रेस पार्टी मे हमेशा की कांग्रेस की बागडोर नेहरू और गांधी के परिवार मे रही है आज तक कांग्रेस मे कई वरिष्ठ आए और चले गए लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर अगर कांग्रेस की किसी पार्टी ने कमान संभाली तो वो नेहरू और गांधी परिवार से ही रहा है । यानि राष्ट्रीय स्तर पर तो कांग्रेस मे परिवारवाद हावी है ही कभी अध्यक्ष राहुल गांधी तो कभी सोनिया गांधी और पार्टी के शीर्ष नेता मुंह ताकते हैं । अब 5 राज्यों मे चुनाव होने जा रहे हैं और बात अगर उत्तराखंड की करें तो यहाँ भी परिवारवाद हवी होने की कोशिश मे है । आपको बता दें उत्तराखंड मे  विधानसभा चुनाव  को लेकर कांग्रेस का मंथन जारी है । दिल्ली मे स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक मे टिकट पर जोरदार मंथन हुआ प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि मैं एक परिवार एक टिकट के फॉमूले के पक्ष में नहीं हूं। इस मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए।  अब ये बात गोदियाल जी ने खुद काही या उत्तराखंड कांग्रेस के किसी महामहिम के कहने पर रखी इसका अंदाजा आप अपने परिवार के लिए टिकट मांग रहे नेताओं की फेहरिस्त से लगा सकते हैं। फिलहाल पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की तरफ से ये फैसला लिया गया था कि एक परिवार से एक ही व्यक्ति को टिकट मिलेगा। वहीं, उत्तराखंड के लिए पार्टी ने अभी तक इस तरह का कोई फैसला नहीं लिया है। लेकिन, उत्तराखंड के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मांग की है और ये माना जा रहा है की गोड़ियल ने ये मांग हरीश रावत के कहने पर की है ।  गोदियाल का कहना है कि परिवारवाद वाला ये नियम हमारे राज्य लागू ना किया जाए। गोदियाल ने इस संबंध में तर्क भी दिए। उन्होंने कहा कि कई शीर्ष नेता अपने बेटा-बेटियों के लिए टिकट मांग रहे हैं और कई जगह वे जिताऊ स्थिति में हैं।

 

गोदियाल का कहना था की अगर किसी नेता के परिवार में कोई सामाजिक-राजनैतिक तौर पर सक्रिय है, जनता में लोकप्रिय है और टिकट मिलने पर जीतने की संभावना है तो उसको टिकट दिया जाना चाहिए। अब सवाल ये उठता है की कांग्रेस मे अगर पृवारवाद के चलते नेताओं के बच्चों को टिकट दे दिया जाता है तो, कांग्रेस ने जो चीख चीख कर मीडिया के सामने और कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के सामने युवाओं और मातृ शक्ति को टिकट देने और आम कार्यकर्ताओं को टिकट देने की बात काही थी उसका क्या होगा क्या वो सिर्फ एक जुमलाभर था या कांग्रेस का दिखावा था ताकि लोग कांग्रेस की नीतियों से इंप्रेस होकर हाथ को मजबूत करें।

सवाल और भी उठते हैं की अगर 1 परिवार से कई टिकटों का फार्मूला कांग्रेस उत्तराखंड मे लागू कर देती है तो जो कार्यकर्ता या नेता पिछले 5 सालों तक अपनी क्षेत्र की जनता की सेवा करता है और ये उम्मीद लगाता है की उसे पार्टी टिकट देगी तो उसकी उम्मीदों पर पानी फिर जाएगा। कहीं न कहीं आम कार्यकर्ता का पार्टी से मोह भंग हो सकता है। और फिर दलबदल वाली स्थिति पैदा हो जाएगी। अक्सर देखने मे आता है की पार्टी के कार्यकर्ता या नेता अपनी पार्टी को अलविदा कह दूसरी पार्टी का दमन थाम लेते हैं और उनके ऊपर दलबदलु का ठप्पा लग जाता है। लेकिन ऐसी स्थिति मे कोई कार्यकर्ता करे तो क्या करे किसी भी पार्टी के बड़े नेता चोर दरवाजे से टिकट लेकर बाहर आ जाते हैं और सामान्य कार्यकर्ता मुंह ताकता रह जाता।

कांग्रेस के ये नेता लगाए हैं बच्चों के टिकट के लिए टिकटिकी

  1. हरीश रावत अपने बेटे या बेटी के लिए टिकट की छह रखते हैं  
  2. विधायक दल नेता प्रीतम सिंह अपने बेटे के लिए टिकट की मांग कर रहे हैं
  3. कार्यकारी अध्यक्ष रंजीत रावत अपने बेटे के लिए टिकट मांग रहे हैं
  4. यशपाल आर्य अपने विधायक बेटे के लिए दावेदारी कर रहे हैं
  5. इंदिरा ह्रदयेश के बेटे मां के निधन के बाद टिकट मांग रहे हैं
  6. दीप वोहरा अपनी पत्नी के लिए टिकट की मांग कर रहे हैं

वहीं बीजेपी का कहना है की ये कांग्रेस की पुरानी नीति है की कांग्रेस कभी गांधी परिवार से बाहर नहीं निकली बीजेपी मे परिवारवाद की कोई जगह नहीं है यहाँ निष्ठा देखि जाती है लेकिन कांग्रेस का चाल चरित्र और चेहरा कांग्रेस के लिए घातक साबित होगा। कांग्रेस का कहना है की बीजेपी का कहना है की बीजेपी को अपने गिरेबान मे झांकना चाहिए कांग्रेस को क्या अपनी पार्टी मे परिवारवाद नहीं दिखता ? कांग्रेस का कहना है की अगर किसी नेता का कोई परिजन कांग्रेस के तियाक्त के लिए दावेदारी करता भी है तो आम कार्यकर्ताओं की सहमति से ही टिकट दिया जाता है। वहीं आम आदमी पार्टी का कहना है की बीजेपी कांग्रेस दोनों ही पार्टियां सत्ता का सुख भोगने के लिए परिवारवाद को शुरू से बढ़ावा देते हैं है जबकि आम आदमी पार्टी मे ऐसा कुछ नहीं है आम आदमी पार्टी मे आम कार्यकर्ता को उसकी मेहनत का फल मिलता है और आम आदमी पार्टी का कहना है की जो जनता का काम कर रहा है जिसे जनता चाहती है टिकट उसी को मिलेगा आम आदमी पार्टी मे परिवारवाद बिलकुल नहीं है।