1 सीट पर दर्जनों दावेदार, इन पच्चीस सीटों पर माथापच्ची बरकरार, चुनाव लड़ने को अभी हरदा नहीं तैयार…!

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देहरादून: उत्तराखंड कांग्रेस में अधिकतर टिकटों को लेकर सह​मति बन गई है। ​कांग्रेस का दावा है कि 45 सीटों पर पार्टी ने दावेदारों के नाम फाइनल कर लिए हैं, जिनके नाम अगले हफ्ते तक जारी होने की संभावना लगाई जा रही है। हालांकि 25 टिकटों पर कांग्रेस को आने वाले दिनों में जमकर माथापच्ची करनी होगी, जो कि उत्तराखंड में सत्ता में वापसी का रास्ता तय करने में कांग्रेस के लिए सबसे बड़ा हथियार साबित हो सकता है। लेकिन पार्टी इन सीटों पर कैसे सह​मति बना पाती है। ये देखना दिलचस्प होगा।

1 अनार सौ बीमार, 1 सीट पर दर्जनों दावेदार

उत्तराखंड में​ विधानसभा की 70​ सीटें हैं। इन सीटों पर समीकरणों और अपनों को साधने की कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी ​मुश्किल नजर आती है। पार्टी भले ही 45 सीटों पर प्रत्याशियों के चयन का दावा कर रही है, लेकिन लिस्ट जारी होने के बाद इनमें भी अधिकतर दावेदारों की बगावत करनी भी तय मानी जा रही है। कांग्रेस में 70 सीटों पर 500 दावेदार हैं। जिसमें पार्टी ने एक परिवार एक टिकट के फॉर्मूले को भी मानने से इनकार कर दिया है। इसको लेकर पार्टी के अंदर पहले से ही नाराजगी जताई जा रही है। हालांकि जब तक किसी परिवार से एक से ज्यादा टिकट नहीं दिए जाते, तब तक किसी दूसरे दावेदार की बगावत सामने आना भी आसान नहीं होगा। लेकिन किसी सीट पर परिवारवाद के चलते विवाद की स्थिति बननी तय है। उदाहरण के लिए नैनीताल सीट पर कांग्रेस के टिकट से पिछली बार चुनाव लड़ चुकी, महिला कांग्रेस की अध्यक्ष सरिता आर्य और यशपाल आर्य के बेटे संजीव आर्य में से किसी को भी टिकट मिलना ​पार्टी के लिए विवाद होना तय ​है। ऐसे में इस तरह की सीटों पर पार्टी बाद में निर्णय ले सकती है। इस तरह की 25 सीटें ही कांग्रेस के लिए अहम मानी जा रही है। जो कि पार्टी सत्ता तक पहुंचाने में अहम रोल निभा सकती है।

चुनाव लड़ने को अभी हरदा नहीं तैयार !

इन सब में सबसे खास बात ये है कि चुनाव अभियान समिति की कमान संभाल रहे पूर्व सीएम हरीश रावत खुद अपने लिए सीट का चयन नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने खुद स्वीकारा है कि 45 सीटों में उनका नाम नहीं है। वहीं कांग्रेस के अंदर इस बात के भी चर्चे हैं कि वे अपनी बेटी अनुपमा को टिकट दिला सकते हैं और खुद चुनाव न लड़ने की संभावना ज्यादा नजर आ रही है। हरीश रावत को 2017 में दो सीटों से हार का सामना करना पड़ा था। इसमें किच्छा और हरिद्वार ग्रामीण की सीट थी, ये दोनों सीटें तराई और मैदान में आती है।

इन पच्चीस सीटों पर माथापच्ची बरकरार

इस बार हरीश रावत किसी तरह के विवाद में नहीं पड़ना चाहते हैं। पिछले चुनाव में उन पर पहाड़ छोड़ने का आरोप लगा था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अपने हल्द्वानी में दिए भाषण में इस बात का जिक्र किया था कि जो कुमाऊं से प्यार करता हो, वो कुमाऊं छोड़कर नहीं जाता। पीएम मोदी के इस बयान का सीधे सीधे हरीश रावत से जोड़कर देखा जा रहा है। ऐसे में पार्टी के लिए 25 सीटों पर प्रत्याशी चयन करना टेढ़ी खीर साबित हो सकती है। इन सीटों में सामने भाजपा के मजबूत प्रत्याशी होने के अलावा कांग्रेस के दिग्गजों के टकराव की भी स्थिति बनती हुई नजर आ रही है।