May 16, 2022 11:43 am

माता का चमत्कार ! बिना घी–तेल के 21 साल से जल रहा है मंदिर मे ये दीया, वैज्ञानिक भी हैरान…

न्यूज़ डेस्क: भारत में ऐसे कई मंदिर हैं जो रहस्यों से भरे हुए हैं। इन रहस्यों और चमत्कारों ने वैज्ञानिकों को भी हैरान कर दिया। वैज्ञानिक भी इन रहस्यों को आजतक नहीं सुलझा पाए। फिलहाल चैत्र नवरात्रा चल रहे हैं और देश भर के माता के मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ लगी हुई है। 2 साल बाद कोरोना पाबंदियों के हटने सये फिर से माता के मंदिरों में भक्त दर्शन करने के लिए उमड़ रहे हैं। आज हम आपको माता के एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसका रहस्य वैज्ञानिक भी नहीं सुलझा पाए। वहीं स्थानीय लोग इसे माता का चमत्कार मानते हैं।

21 साल से जल रही अखंड ज्योत

गुना जिले में माता का एक ऐसा मंइिर है, जहां पिछले 21 साल से अखंड ज्योत जल रही है। माता का यह अनोखा मंदिर जिले के झंझोन गांव में स्थित है। दूर—दूर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दर्शन करने पहुंचते हैं। गांव के लोगों का कहना है कि, भगवान शिव और मां शक्ति की कृपा से ऐसा हो रहा है। नवरात्रों में यहां भक्तों की भारी भीड़ जमा होती है। इस अखंड ज्योत को देखने के लिए दूर—दूर से श्रद्धालु यहां आते हैं।

माता का चमत्कार!

रिपोर्ट के अनुसार, 21 सालों से यहां जल रही अखंड ज्योत को लोग माता का चमत्कार मानते हैं। यहां कटोरे में जल रही अखंड ज्योत में कोई भी घी नहीं डालता फिर भी सालों से यह ज्योत ऐसे ही जल रही है। ग्रामीण भी अचरज में पड़ गए कि यह ज्योति अपने आप कैसे जल रही है। इसमें घी कहां से आता है। रिपोर्ट के अनुसार, इस मंदिर में 21 वर्ष पहले नवरात्रि के समय गांव के बच्चों ने पैसे जुटाकर मां दुर्गा की झांकी सजाई और 9 दिन तक ज्योति जलाई। इसके बाद से ही यह ज्योत लगातार जल रही है।

वैज्ञानिक भी हैरान

यह मामला इतना चर्चित हुआ कि प्रशासन की टीम वैज्ञानिकों का एक दल लेकर गांव पहुंची। तमाम जांचें करने के बाद कई दिन तक पहरा भी बैठाया गया, ताकि समझा जा सके कि, इसका रहस्य क्या है। हैरानी की बात ये है कि, जांच टीम भी इसे माता का चमत्कार मानते हुए वहां से लौट गई। वहीं मंदिर के पुजारी का कहना है कि कटोरे में अपने आप घी आ जाता है। सिर्फ दीये की बाती रोज बदल जाती है। गांव के लोगों ने भी इसके बारे में जानने की कोशिश की, लेकिन सफलता प्राप्त नहीं हो सकी। पहले इस मंदिर के स्थान पर एक चबूतरा हुआ करता था, जिस पर भगवान शिव का शिवलिंग विराजमान थे। ग्रामीणों ने पैसे एकत्रित कर इस मंदिर को चारदीवार में तब्दील कर दिया।