August 18, 2022 9:42 pm

युवक ने अपने खून से राजनाथ को लिखी चिट्ठी, अग्निपथ के समर्थन में कही ये बात

भावनगर : केंद्र सरकार द्वारा भारतीय सेना में भर्ती के लिए घोषित अग्निपथ (Agnipath) योजना का देश के विभिन्न राज्यों में बड़ी संख्या में युवा विरोध कर रहे हैं। कई जगहों पर तो हालात इतने भयावह हो गए हैं कि ट्रेनों की आवाजाही तक रोक दी गई है। उपद्रवियों ने बिहार में जमकर बवाल काटा है और कई ट्रेनों, बसों एवं अन्य गाड़ियों को आग लगा दी है। इन सबके बीच गुजरात के भावनगर जिले के तिमाना गांव के मूल निवासी और वर्तमान में कच्छ के दयापार में रहने वाले 23 वर्षीय दीपक डांगर अहिर ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) को ‘अग्निपथ’ के समर्थन में अपने खून से चिट्ठी लिखी है।

मेरा रक्त पत्र प्रार्थनास्वरूप है

दीपक डांगर अहिर ने अग्निपथ स्कीम के समर्थन में लिखा है कि वह ‘जीरो पे’ यानी कि बिना किसी वेतन के सेना में शामिल होने को तैयार हैं। रक्षा मंत्री को लिखी चिट्ठी में उन्होंने जीरो पे के साथ सेना में शामिल होकर देश की सेवा करने की इच्छा व्यक्त की है। साथ ही अपने खून से लिखी इस चिट्ठी में उन्होंने सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचा रहे युवाओं से अपील की है कि वे हिंसक विरोध प्रदर्शन बंद करें। अपनी चिट्ठी में दीपक ने लिखा है कि उनका ‘रक्त पत्र’ प्रार्थना स्वरूप है।

बिहार में विरोध प्रदर्शन जारी
बता दें कि केंद्र सरकार ने ‘अग्निपथ’ योजना को लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच शनिवार को अग्निवीरों के लिये अर्धसैनिक बलों और रक्षा मंत्रालयों की नियुक्तियों में 10 प्रतिशत आरक्षण की घोषणा की है। बिहार में योजना के विरोध में बंद का आह्वान किया गया था और योजना के विरोध के चौथे दिन राज्य में एक रेलवे स्टेशन और एक पुलिस वाहन में आगजनी की गई। इसके अलावा एक एंबुलेंस को भी उपद्रवियों ने निशाना बनाया जबकि पथराव में कई जगहों पर पुलिसकर्मियों के भी घायल होने की खबर है।

कई ट्रेनें हुईं रद्द, यात्री परेशान
अग्निपथ का विरोध पंजाब भी पहुंचा जहां लुधियाना रेलवे स्टेशन पर तोड़फोड़ की गई तो वहीं पश्चिम बंगाल, हरियाणा, राजस्थान, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तर प्रदेश में भी सड़क और रेल यातायात ‘अग्निपथ’ योजना के खिलाफ विरोध प्रदर्शनों के चलते बाधित हुआ। रेलवे ने शनिवार को 369 ट्रेनों को रद्द कर दिया जिससे यात्रियों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा। एक दिन पहले भी रेलवे को विरोध प्रदर्शनों के चलते 200 से अधिक ट्रेनों को रद्द करना पड़ा था।