July 3, 2022 2:56 pm

पूर्व नौकरशाहों ने CJI को लिखा खुला खत, यूपी में की ‘बुलडोजर’ एक्शन पर रोक लगाने की मांग

नई दिल्ली: पूर्व नौकरशाहों के एक समूह ने मंगलवार भारत के मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमना को एक खुला खत लिखा है। इसमें सेवानिवृत्त सिविल सेवकों ने भाजपा के दो निलंबित नेताओं की आपत्तिजनक टिप्पणियों के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे लोगों की कथित अवैध हिरासत, घरों पर बुलडोजर चलाने और पुलिस हिंसा में सुप्रीम कोर्ट के हस्तक्षेप की मांग की है।  पत्र में आगे कहा गया, इससे भी अधिक चिंताजनक बात यह है कि विरोध करने या सरकार की आलोचना करने या प्रत्यक्ष रूप से अंसतोष व्यक्त करने की हिम्मत करने वाले नागरिकों को कानूनी साधनों का उपयोग करके क्रूर दंड देने का ‘बुलडोजर न्याय’ का विचार अब कई राज्यों में अपवाद के बजाय आदर्श बन गया है।


इसमें कहा गया है कि दण्ड की भावना और बहुसंख्यक सत्ता का अहंकार संवैधानिक मूल्यों और सिद्धांतों की अवहेलना कर रहा है। इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में पूर्व केंद्रीय गृह सचिव जी.के. पिल्लई, पूर्व विदेश सचिव सुजाता सिंह, भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के पूर्व अधिकारी जूलियो रिबेरो, अविनाश मोहनाने, मैक्सवेल परेरा, एके सामंत और पूर्व सामाजिक न्याय सचिव अनीता अग्निहोती शामिल हैं।  पूर्व नौकरशाहों ने कहा कि वे शीर्ष अदालत और उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीशों, प्रमुख अधिवक्ताओं के एक चुनिंदा समूह द्वारा भेजी गई उस मांग (14 जून 2022) का समर्थन करते हैं जिसमें उनसे उत्तर प्रदेश में हाल के कृत्यों कथित रूप से अवैध हिरासत, आवासों पर बुलडोजर चलाने और पुलिस की हिंसा का स्वत: संज्ञान लेने का अनुरोध किया गया था। उन्होंने मामले में सीजेआई से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

पत्र में कहा गया है कि जमीयत उलमा-ए-हिंद द्वारा जस्टिस बोपन्ना और विक्रम नाथ की पीठ के समक्ष कथित रूप से अनधिकृत निर्माणों के विध्वंस के खिलाफ एक रिट याचिका दायर की गई है और प्रारंभिक सुनवाई के बाद राज्य सरकार से जवाब मांगा गया है और अगले सप्ताह सुनवाई होगी। शीर्ष अदालत ने पिछले हफ्ते याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा था कि ‘सबकुछ निष्पक्ष होना चाहिए’ और अधिकारियों को कानून के तहत उचित प्रक्रिया का सख्ती से पालन करना चाहिए।

पैगंबर मोहम्मद पर टिप्पणी के मामले को लेकर भाजपा ने 5 जून को पार्टी की राष्ट्रीय प्रवक्ता नुपुर शर्मा को निलंबित कर दिया था जबकि पार्टी के दिल्ली मीडिया प्रमुख नवीन कुमार जिंदल को निष्कासित कर दिया था। 90 पूर्व सिविल सेवकों द्वारा हस्ताक्षरित पत्र में कहा गया, हमारा मानना है कि अगर न्यायपालिका हाई लेवल पर तेजी से, दृढ़ता से और निर्णायक रूप से हस्तक्षेप करने के लिए कदम नहीं उठाती है, पिछले बहत्तर वर्षों में निर्मित संवैधानिक शासन की पूरी इमारत के ढहने की संभावना है।