August 16, 2022 6:08 am

तबादलों पर तकरार: नियमों का हवाला देकर सचिव झुकने को नहीं तैयार ! पढ़िये मंत्री V/S अधिकारी, कौन पड़ रहा किस पर भारी ?

देहरादून: उत्तराखंड सरकार में एकमात्र महिला मंत्री रेखा आर्य और अधिकारियों की अनबन का सिलसिला लगातार जारी है. पिछली धामी सरकार से लेकर अबतक, बीते 3 सालों में कई बार उनके विभागों में तैनात सचिवों के साथ उनकी तनातनी की खबरें बाहर आती रही हैं. खबरें ही नहीं बल्कि खुद रेखा आर्य भी अधिकारियों के खिलाफ लगातार बयानबाजी करती दिखी हैं. ऐसा ही एक मामला फिर से सामने आया है, जिसमें वो फिर से अपने ही विभाग में हुए ट्रांसफर को लेकर चर्चाओं में हैं. हालांकि, मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि इस मामले में सचिव ने उनके निर्देश की अनदेखी की है, जिससे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अवगत करा दिया गया है. उनके सामने पूरी स्थिति रखी गई है.

दरअसल, खाद्यान्न विभाग के सचिव सचिन कुर्वे ने मंत्री रेखा आर्य के उन पत्रों को सिरे से नकार दिया है जिसमें उन्होंने उनसे पूछे बिना जिला पूर्ति अधिकारी (DSO) के ट्रांसफर की बात कही थी. विभागीय सचिव सचिन कुर्वे के पत्र जारी कर बताया है कि खाद्य विभाग में हुए ये सभी ट्रांसफर पूरी तरह से नियमानुसार हैं. सचिव सचिन कुर्वे ने साफ कर दिया है कि वभाग में ट्रांसफर न्यायसंगत हैं जो होकर ही रहेंगे, ये किसी भी कीमत पर निरस्त नहीं होंगे. यही नहीं, उन्होंने अपने पत्र में जिक्र किया है कि विभाग में जो ट्रांसफर हुए हैं उनके लिए ना तो विभागीय मंत्री से अनुमति लेने की जरूरत है और ना ही विभागीय सचिव से.

 सचिन कुर्वे का जवाब

खाद्य सचिव कुर्वे ने पत्र में कहा कि स्थानांतरण एक्ट में जब तबादले होते हैं तो किसी मंत्री की इजाजत नहीं ली जाती. एक निर्धारित समय तक ही किसी अधिकारी को एक जगह पर तैनात किया जाता है. लिहाजा उन्होंने ट्रांसफर एक्ट का पालन करते हुए ही सभी अधिकारियों के तबादले किए हैं. ऐसे में उनके द्वारा एक बार तबादले की लिस्ट जारी होने पर किसी कीमत पर भी उस लिस्ट को निरस्त नहीं किया जाएगा. सचिन कुर्वे ने अपने पत्र में कहा है कि अगर ऐसा होता है तो विभाग में विवाद और आज अराजकता का माहौल फैल जाएगा.

कुर्वे ने कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य को लिखे पत्र में अधिनियम 2017 का हवाला देते हुए कहा है कि, विभाग में समूह ख वर्ग के अधिकारी, जो कि जिला पूर्ति अधिकारी और क्षेत्रीय खाद्य अधिकारी होते हैं, उनके स्थानांतरण से पहले विभागीय सचिव और विभागीय मंत्री से अनुमोदन लेने की आवश्यकता नहीं है. उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि इन ट्रांसफर के लिए स्थायी स्थानांतरण समिति का अनुमोदन जरूरी है, जो कि विभाग में पहले से ही गठित है और इसी समिति के अनुमोदन पर यह ट्रांसफर किए गये हैं. सचिव सचिन कुर्वे ने कहा साल 2018 और 19 में भी यही प्रक्रिया अपनाई गई थी. उस वक्त भी मंत्री के अनुमोदन के बिना ही ट्रांसफर लिस्ट जारी की गई थी.

रेखा आर्य बोली एक्ट के तहत नहीं हुआ तबादला

उधर, सचिव के पत्र की मंत्री रेखा आर्य को जानकारी हुई तुरंत उनका बयान भी आ गया. मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि, सचिव का यह सब कहना बिल्कुल सही नहीं है. शायद सचिव को एक्ट की जानकारी नहीं है. मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि, हो सकता है कि निजी स्वार्थों की वजह से ऐसा कुछ किया गया हो, लिहाजा उन्होंने सचिव कार्मिक को पत्र लिखकर सचिन कुर्वे की गोपनीय प्रविष्टि से संबंधित मूल पत्रावली मांगी है. मंत्री ने कहा 6 जिला पूर्ति अधिकारियों के तबादला आदेश करना किसी भी तरह से न्यायसंगत नहीं है, जबकि इस मामले में मंत्री से पूछा ही नहीं गया है. उन्होंने कहा जिस तरह से विभाग में ट्रांसफर किये गये वो पूरी तरह से एक्ट का उल्लंघन है.

मंत्री ने कहा कि 20 जून को खाद्य आयुक्त ने उनकी इजाजत के बिना नैनीताल के जिला पूर्ति अधिकारी को अनिवार्य छुट्टी पर भेजा. इस पर उन्होंने इस आदेश को रद्द करने और इस पर उनका अनुमोदन कराने के लिए उनसे जवाब-तलब किया था. खाद्य आयुक्त व विभागीय सचिव ने उनके निर्देश को मानने के बजाए उसी दिन छह जिला पूर्ति अधिकारियों के तबादले कर दिए, वो भी उनके अनुमोदन के बिना किए गये. तबादले इतनी जल्दबाजी में किए गए हैं कि इससे संबंधित बैठक के मिनिट्स में 22 जून 2022 की तारीख के बजाय 22 जून 2019 डेट लिखी गई है. संबंधित अधिकारियों ने भी बिना देखे इस पर साइन कर दिए.

मंत्री ने बताया कि, खाद्य आयुक्त ने उनके कार्यालय में अटैच श्याम आर्य का पिथौरागढ़, मुकेश कुमार का हरिद्वार, देहरादून के जिला पूर्ति अधिकारी जसवंत सिंह कंडारी का चमोली, हरिद्वार के जिला पूर्ति अधिकारी केके अग्रवाल का रुद्रप्रयाग, नैनीताल के जिला पूर्ति अधिकारी मनोज वर्मन को बागेश्वर और रुद्रप्रयाग के जिला पूर्ति अधिकारी मनोज डोभाल का नैनीताल तबादला किया है. ये तबादले प्रक्रिया को अपनाए बिना आनन-फानन में किए गये हैं. तबादलों के लिए पात्र अधिकारियों की विभाग की वेबसाइट पर न सूची जारी हुई न ही संबंधित अधिकारियों से तबादलों के लिए दस विकल्प लिए गए.

मंत्री ने दिया तबादला एक्ट का हवाला

मंत्री रेखा आर्य ने कहा कि तबादलों में पारदर्शिता के लिए सरकार की ओर से तबादला एक्ट बनाया गया है. एक्ट के मुताबिक 30 अप्रैल तक विभागाध्यक्ष को मानक के अनुसार कार्यस्थल चिन्हित करने थे, एक मई तक शासन, विभागाध्यक्ष, मंडल और जिला स्तर पर तबादला समितियों का गठन होना था, 15 मई तक हर संवर्ग के लिए सुगम और दुर्गम स्थल तय होने थे. 20 मई तक अनिवार्य तबादलों के लिए पात्र कार्मिकों से 10 इच्छित स्थानों के लिए विकल्प मांगे जाने थे. 31 मई तक अनुरोध के आधार पर आवेदन मांगे जाने थे. 25 से पांच जुलाई तक तबादला समिति की बैठक होनी थी। इसके बाद 10 जुलाई तक तबादला आदेश जानी होना था, लेकिन विभागीय सचिव ने तबादला एक्ट के मुताबिक प्रक्रिया को अपनाए बिना सारी कार्रवाई मात्र डेढ़ घंटे में पूरी कर दी.

जानें पूरा केस

गौर हो कि कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य और उनके विभागीय सचिव के बीच का ये मामला बीते 3 दिनों से लगातार चर्चाओं में है. गौर हो कि, मंत्री रेखा आर्य नैनीताल के जिला पूर्ति अधिकारी मनोज वर्मन को 10 दिन की अनिवार्य छुट्टी पर भेजने से पहले से नाराज थीं और इसके बाद अधिकारियों के तबादलों से पूरे प्रकरण ने तूल पकड़ा हुआ है. विभागीय सूत्रों के मुताबिक नैनीताल जिले में कई दुकानों में बिना बायोमीट्रिक के लोगों को राशन दिया जा रहा था. हाल ही में हुई बैठक में इस प्रकरण का खुलासा हुआ था. बताया गया कि 26 राशन की दुकानों में बायोमेट्रिक प्रतिशत शून्य था, जबकि 163 दुकानों में बायोमीट्रिक प्रतिशत मात्र 15 से 17 फीसदी था. इस पर विभागीय सचिव ने संबंधित जिला पूर्ति अधिकारी को दस दिन की अनिवार्य छुट्टी पर भेजा था.

इसके बाद खाद्य सचिव व आयुक्त सचिन कुर्वे ने दो दिन पहले (22 जून को) देहरादून, हरिद्वार सहित तमाम जिलों में जिला पूर्ति अधिकारियों के तबादले कर दिए थे. ट्रांसफर लिस्ट बाहर आने के बाद मंत्री रेखा आर्य ने तत्काल प्रभाव से सचिन कुर्वे को पत्र लिखकर तुरंत स्थानांतरण रोकने की बात कही. उनका कहना था कि इन तबादलों की जानकारी उनको नहीं दी गई. हालांकि, सचिन कुर्वे ने मंत्री के पत्र का संज्ञान ही नहीं लिया और उसी दिन देर शाम देहरादून जिले के डीएसओ के ट्रांसफर आर्डर जारी कर दिए. इसके बाद रेखा आर्य बेहद नाराज हुईं और सचिव पर कई गंभीर आरोप लगाए. अब सचिन कुर्वे की तरफ से एक और पत्र जारी हुआ है, जिसमें मंत्री की नाराजगी के बावजूद सचिन कुर्वे ने साफ कर दिया है कि ट्रांसफर कानूनी रूप से होकर ही रहेंगे.

पहले भी रेखा आर्य का रहा है अधिकारियों से 36 का आंकड़ा

रेखा आर्य और ब्यूरोक्रेट्स के बीच घमासान का यह कोई पहला मामला नहीं है. इससे पहले भी वी षणमुगम से लेकर सौजन्य तक मंत्री रेखा आर्य के निशाने पर आ चुके हैं. अब देखना होगा कि इस पूरे मामले पर विभाग के अधिकारी अपने स्तर पर कायम रहते हैं या फिर एक बार फिर मामला मुख्यमंत्री के बीच बचाव करने के बाद ही सुलझेगा.