August 19, 2022 7:58 pm

61 राजपत्रित अधिकारी सहित, उत्तराखंड मे अब तक 247 भ्रष्ट अधिकारी व कर्मचारी सलाखों के पीछे पहुंचे…  

देहरादून: उत्तराखंड में अधिकारी किस कदर भ्रष्टाचार की दलदल में डूबे हैं, इसका अंदाजा विजिलेंस के आंकड़ों से लगाया जा सकता है। उत्तराखंड राज्य बनने के बाद विजिलेंस की ओर से 2001 से अब तक 247 अधिकारियों व कर्मचारियों को सलाखों के पीछे पहुंचा चुकी है। इनमें 61 राजपत्रित अधिकारी शामिल हैं। 2022 में यह पहला मामला है, जब विजिलेंस ने किसी आइएएस को गिरफ्तार कर जेल भेजा है। अब तक जेल जाने वालों की सूची में राजस्व व वन विभाग के अधिकारी शामिल थे। विजिलेंस की ओर से 234 मामलों में कार्रवाई करते हुए 247 को गिरफ्तार किया है। राज्य में जिस तरह से भ्रष्टाचार बढ़ा है, उस हिसाब से कार्रवाई में तेजी नहीं आ पाई है। भ्रष्टाचारियों को सलाखों के पीछे पहुंचाने के लिए अप्रैल महीने में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की ओर से 1064 हेल्प लाइन जारी किया गया था। उसमें ताबड़तोड़ शिकायतें भी आईं, लेकिन अब तक केवल छह भ्रष्टाचारियों को ही विजिलेंस गिरफ्तार कर पाई है। इनमें 64 शिकायतों पर विजिलेंस जांच कर रही है, लेकिन मामला गिरफ्तारी तक नहीं पहुंचा पाया है।

एनके शर्मा व कांतिराम जोशी के खिलाफ जांच धीमी

आय से अधिक संपत्ति मामले में समाज कल्याण विभाग के तत्कालीन सहायक निदेशक एनके शर्मा और सहायक निदेशक कांति राम जोशी के खिलाफ काफी समय पहले विजिलेंस ने मुकदमा दर्ज किया था। एनके शर्मा सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि कांति राम जोशी अभी सेवा में हैं और इसी महीने वह सेवानिवृत्त हो रहे हैं। दोनों अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर कार्रवाई नहीं हो पाई है।

विजिलेंस के पास शिकायतों का भी टोटा

विजिलेंस अधिकारियों की मानें तो लोग आनलाइन शिकायतें तो कर देते हैं, लेकिन खुलकर कोई सामने नहीं आता। ऐसे में विजिलेंस को ट्रैव करने में सफलता नहीं मिल पाती है। इसके साथ ही पुलिस विभाग में भ्रष्टाचार की बातें होती हैं, लेकिन पुलिस के कर्मचारियों व अधिकारियों के खिलाफ एक भी शिकायत विजिलेंस के पास नहीं पहुंची है।