August 12, 2022 1:36 am

कांग्रेस मे फिर “हार पर रार” और “दिगज्जों” मे वार – पलटवार…

देहरादून; उत्तराखंड मे विधानसभा चुनाव हुए कई महीने बीत गए, आपको बता दें की बीते विधानसभा चुनाव मे भाजपा ने 47 सीटें पाने बाद अपना परचम लहराया था और जोश के साथ जीत का दावा करने वाली कांग्रेस 70 मे से सिर्फ 19 सीटों पर सिमट कर रह गई थी लेकिन कांग्रेस को हारे पुरानी बात हो चुकी लेकिन हार के जख्म लगातार कुरेदे जा रहे हैं हार के बाद से ही कांग्रेसी नेताओं ने अपने दिग्गज नेताओं पर कई आरोप लगाए जो अब तक थमने का नाम नहीं ले रहे हैं । पांचवीं विधानसभा के चुनाव में हार के लिए बार-बार ठीकरा फोड़े जाने से नाराज हरीश रावत ने प्रीतम सिंह को निशाने पर लेते हुए सोशल मीडिया पर  कहा कि चुनाव में सामूहिक नेतृत्व पर जोर देने वाले चुनाव परिणाम के बाद सामूहिक जिम्मेदारी पर मौन हैं। वह जिन संसदीय क्षेत्रों से चुनाव लड़े, वहां पार्टी का प्रदर्शन सुधरा है। अन्य लोग भी बताएं कि उन्होंने कितने उम्मीदवारों को जिताया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जब शादी-विवाह में भी जा रहे हैं तो हरीश रावत पर पार्टी को हराने का ठीकरा फोड़ते हैं। वे सोचते हैं कि हरीश रावत के बगैर उन्हें दुनिया की दौलत और पद मिल जाते। ऐसे व्यक्तियों को बताना चाहिए कि उन्होंने किस कांग्रेस उम्मीदवार को जिताया। जवाबी प्रहार में पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व पूर्व नेता प्रतिपक्ष बोले 19 विधायक किसी नेता नहीं, बल्कि कांग्रेस की वजह से चुनकर आए। वर्ष 2017 में विधायक संख्या 11 पर अटक गई थी।  प्रीतम सिंह ने कहा कि उम्मीदवारों के भाग्य का निर्णय नेता नहीं, जनता करती है। चुनकर आने वाले 19 विधायकों ने पूरी ताकत से चुनाव लड़ा। वह सौभाग्यशाली हैं कि चकराता की जनता ने उन पर बार-बार विश्वास जताया।

जानकारों का मानना है की बीजेपी न हरीश रावत की वजह से हारी और न प्रीतम की बल्कि पार्टी की हार की वजह अंतर्कलह और गुटबाजी है जो अब ठीक हो जानी चाहिए वरना सूबे मे कांग्रेस को और ज़्यादा नुकसान उठाना पड़ेगा। वहीं बीजेपी का कहना है की कांग्रेस का चिराग अब बुझने वाला है कांग्रेस के डिगज नेता एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप अपने राजनीतिक फायदे के लिए लगा रहे हैं लेकिन कांग्रेस जल्द ही खत्म होने वाली है