August 19, 2022 6:59 pm

उत्तराखंड: हरिद्वार से लोकसभा चुनाव लड़ने की हरक की हसरत, कहा- हरदा न करें टिकट के लिए कसरत, क्या प्रीतम के साथ मिलकर कुछ गुल खिलाने वाले हैं हज़रत ?

देहरादून: उत्तराखंड की राजनीति में इन दिनों कांग्रेस के भीतर चल रही रस्साकशी सुर्खियों में है और अब बड़ा सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या पार्टी में टूट-फूट हो सकती है! इस सवाल का बड़ा कारण पूर्व मंत्री हरक सिंह रावत और पूर्व नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह के बीच बढ़ रही जुगलबंदी को माना जा रहा है. दोनों नेता लगातार दूसरे दिन बैठक के नाम पर साथ दिखाई दिए और इस दौरान अपने पहले के बयानों से अलग हरक सिंह ने तो खुलकर ऐलान भी कर दिया कि वह 2024 का लोकसभा चुनाव लड़ने के मूड में हैं. हरक सिंह रावत ने पहले कहा था कि वह चुनाव नहीं लड़ेंगे लेकिन मंगलवार 12 जुलाई को हरिद्वार स्थित जयराम आश्रम पहुंचे हरक ने कहा कि वह ​हरिद्वार या पौड़ी से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे. पार्टी पर निर्णय छोड़ने की बात करते हुए उन्होंने सफाई दी कि पहले उन्होंने विधानसभा चुनाव न लड़ने की बात कही थी. आश्रम में हरक के साथ प्रीतम सिंह, उप नेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी समेत अन्य कांग्रेसी नेता भी दिखाई दिए, जो एक दिन पहले देहरादून में हरक के घर मीटिंग करने पहुंचे थे.

क्या है गुटबाज़ी और हरक-प्रीतम को लेकर अटकलें?

असल में, उत्तराखंड कांग्रेस के भीतर दो गुट माने जाते हैं. एक पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत का गुट है तो दूसरा प्रीतम सिंह का. हालिया विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद प्रीतम गुट को विधानसभा से लेकर संगठन तक दरकिनार कर दिया गया. पिछले दिनों कांग्रेस के कार्यक्रमों व प्रेस कॉन्फ्रेंसों से भी प्रीतम अलग थलग ही दिखे. अब प्रीतम सिंह कांग्रेस संगठन पर कमज़ोर होने का आरोप लगाकर पार्टी को मज़बूत करने के दावे कर रहे हैं.

इधर, हरक सिंह पिछली भाजपा सरकार में मंत्री रहे लेकिन चुनाव से ऐन पहले भाजपा से निकाले गए, तो कांग्रेस में शामिल हो गए. खुद चुनाव नहीं लड़ा लेकिन बहू अनुकृति गुसाईं को टिकट दिलवाया, हालांकि वह जीत नहीं सकीं. चुनाव में कांग्रेस की हार के बाद से उनकी कोई भूमिका पार्टी में तय नहीं दिख रही. ऐसे में अलग थलग पड़े हरक और प्रीतम की जुगलबंदी इन अटकलों को हवा दे रही है कि दोनों मिलकर क्या कोई नयी पार्टी बना सकते हैं? या कांग्रेस को दोफाड़ करने की कोई रणनीति?