August 18, 2022 10:18 pm

दर्दनाक: 7 साल बाद भरी थी गोद, बंदरों ने उजाड़ दी, बिलखती माँ बार- बार पूछ रही एक ही बात, मेरा बेटा कहां छोड़ आयें…

बरेली: सात वर्ष इंतजार के बाद दूसरी बार स्वाती की गोद भरी थी। चार माह के बेटे को गोद में समेटे नामकरण संस्कार की तैयारियों पर अक्सर बात करती थीं। शुक्रवार रात को एक घटनाक्रम ने उनका बेटा और सभी सपने छिन लिए। बंदरों ने नवजात को छत से फेंककर मार डाला। शनिवार को उस दुधमुंह का आखिरी बार चेहरा देखने की बारी आई तो बेसुध हो गईं। करुण-क्रंदन के बीच परिवार के अन्य लोग उसे गोद में उठाकर अंतिम यात्रा के लिए निकल पड़े। शव दफनाने के बाद लौटे पति निर्देश से बिलखती मां का सवाल हो रहा था कि मेरा बेटा कहां छोड़ आए…जवाब के नाम पर किसी के पास शब्द नहीं थे। आंखों से बहते आंसू ही उनकी पीड़ा बयां कर सके।

दुनका में रहने वाली स्वाती भी शुक्रवार रात को पति निर्देश के साथ छत पर गईं थीं। नवजात को शाम की उमस से राहत दिलाने के लिए प्रतिदिन की तरह निर्देश सीने से लगाए छत पर टहल रहे थे। अचानक बंदरों के झुंड ने हमला कर उनकी गोद से बच्चे को झपटा और हवा में उछाल दिया। तीन मंजिल नीचे गिरने से उसकी मौके पर मृत्यु हो गई थी। घटना के बाद से स्वाती सुध में नहीं हैं।

सूख चुके गले से बीच-बीच में शब्द निकलते… मेरा बेटा छिन गया, अब किसका नामकरण करुंगी। निर्देश बताते हैं कि सात वर्ष पहले तनिष्क का जन्म हुआ था। स्वाती को दूसरी बार मां बनने के लिए इतना करना पड़ा। चार महीने पहले छोटा बेटा हुआ तब सोचा कि नामकरण संस्कार में बड़ा आयोजन करेंगे, इसलिए कुछ समय लगेगा। तारीख तय नहीं की थी मगर, इंतजार था कि वह थोड़ा बड़ा जाए।