August 12, 2022 2:33 am

कैनाल रोड अवैध प्लॉटिंग प्रकरण : क्या सिर्फ 4 हैं बिल्डरों के मददगार , क्या वसूला गया 68 लाख का जुर्माना या भूल गए जिम्मेदार, चालान बाद भी कार्रवाई में ढिलाई, आखिर कौन है कसूरवार…

देहरादून: कैनाल रोड में भू-माफिया गैंग का पहाड़ी काट प्लॉटिंग का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। शनिवार सुबह इस गैंग के खिलाफ कड़ा एक्शन लेते हुए जिला प्रशासन और एमडीडीए की टीम ने मौके पर जाकर न केवल गैर कानूनी प्लॉटिंग को ध्वस्त किया बल्कि चल रहे निर्माण कार्य को भी रुकवाने का काम किया। वैसे तो कई होंगे जिनकी सांठगांठ बिल्डर्स-लैंड माफिया सिंडिकेट होगी लेकिन फिलहाल मामले में जिला खान अधिकारी, भू वैज्ञानिक और MDDA के 2 सुपरवाइजर समेत कुल 4 लोगों को सस्पेंड कर दिया गया है। वैसे तो यह भी बड़ा और कड़क कदम है लेकिन पूरे प्रकरण एक अहम सवाल का जवाब तलाशा जाना अभी बाकि है और वो है जुर्माने की रकम वसूली का।

तत्कालीन डीएम ने ठोका था जुर्माना
तत्कालीन जिलाधिकारी आर राजेश कुमार ने पहाड़ी काटने के खेल में जो चालान इसके डेवलपर्स पर किए थे उसका क्या हुआ? क्या उस चालान की रकम को इस प्रॉपर्टी डीलर/बिल्डर गैंग द्वारा जमा करा दिया गया है? या किसी रसूखदार के ज़रिए चालान माफी का जुगाड़ चल रहा है ।

क्या है चालान का मामला

इसी प्रॉपर्टी पर बिल्डरों ने भूमि समतलीकरण व बेसमेंट की खुदाई के नाम पर पहाड़ी ( रिज) से चार गुना अधिक मिट्टी व उपखनिज खोद डाला था, जिसके लिए बिल्डर/डेवलपर अनिल गुप्ता व मनजीत जौहर पर लाखों का जुर्माना किया था । तत्कालीन डीएम डॉ राजेश कुमार ने 28 व 30 मई 2022 को यह जुर्माना नोटिस जारी किया था। जुर्माने की रकम तकरीबन 68 लाख रुपए थी।

किसपर कितना लगा था जुर्माना

उस वक्त के डीएम डॉ राजेश कुमार के मई में दिए आदेश के मुताबिक महालक्ष्मी बिल्डवैल के मनजीत जौहर, निवासी 86/1 राजपुर रोड, पर 63,10,524,00/-(रू० तिरसठ लाख दस हजार पाँच सौ चौबीस मात्र) का जुर्माना लगाया गया था।
वहीं अनिल कुमार गुप्ता पुत्र श्री श्याम लाल निवासी 69 मिशन कम्पाउण्ड सहारनपुर पर तत्कालीन डीएम डॉ राजेश कुमार ने 28 मई 2022 को 4,76,960/- (रू० चार लाख छिहत्तर हजार नौ सौ साठ मात्र) का जुर्माना ठोका था।

2 महीने की थी परमिशन

इस भूमि के समतलीकरण और बेसमेंट की खुदाई के लिए जिला प्रशासन ने सिर्फ दो महीने (11 अक्टूबर 2021 से 10 दिसम्बर 2021 ) तक अनुमति दी थी। लेकिन इसके बाद भी पहाड़ी की खुदाई – अवैध खनन का खुलेआम खेल चलता रहा। हैरानी की बात तो यह रही कि MDDA से बगैर नक्शा पास कराए इन लोगों ने नियम, कायदे, क़ानून सबको ताक पर रखकर धड़ल्ले से प्लाटिंग कर मुंहमांगी कीमत भी वसूल ली।

आम आदमी का आशियाना नक्शे के हिसाब से है या इसमे कोई ऊंच-नीच है इसपर तो MDDA की पूरी निगाह-निगरानी होती है लेकिन वीवीआईपी लोकेशन पर इतने बड़े कांड को खुल्लमखुल्ला अंजाम दिया जा था तो सवाल उठाना लाजिमी है कि आखिर यह कारनामा कैसे MDDA की पैनी नज़र से बच रहा। महकमे के फील्ड के जिम्मेदार अफसरों से लेकर दफ्तर के बड़े ओहदेदारों को इसकी भनक तक नहीं लगी या कोई और वजह थी जिसकी वजह से उनकी जुबान पर ताला और आंख पर पट्टी बंधी रही। क्या पूरे मामले में सिर्फ उन्ही 4 का दामन दागदार है जिन्हें सस्पेंड किया गया है या बाकि भी हैं जो बच निकलने की फिराक में हैं।

हॉट केक बनी कैनाल रोड

राजपुर रोड पर स्थित ग्रेट वैल्यू होटल चौराहे से दायीं तरफ निकल रही कैनाल रोड भी बीते कुछ साल से जमीनों के सौदागरों की पसंदीदा जगह बन गयी है। मसूरी दिशा में जा रही राजपुर रोड व कैनाल रोड लगभग 8- 10 किमी पैरलल चलती है। इन दोनों सड़क को लगभग 10 किमी लम्बाई की पहाड़ी अलग करती है। यह पहाड़ी ही है जिसके चलते कैनाल रोड राजपुर रोड से करीब 35 से 45 फ़ीट नीचे है। प्रॉपर्टी के बड़े खिलाड़ियों ने इसी 40 फीट ऊंची पहाड़ी को समतल कर कैनाल रोड और राजपुर रोड की ऊंचाई को बराबरी पर ला खड़ा किया।
करीब 10 किमी लंबाई की इसी रिज/ पहाड़ी पर NIVH संस्थान, स्कूल, सैन्य आवास, कई होटल व निजी मकान बने हुए हैं। जिस भूमि पर अवैध खनन,प्लाटिंग के मामले में प्रशासन ने एक्शन लिया वो इसी भूमि से लगी पहाड़ी का मामला है। हैरान और परेशान करने वाली बात तो यह है कि इतने लंबे समय से इस कांड को अंजाम दिया जा रहा था फिर भी किसी का ध्यान इस ओर क्यों नहीं गया था

ये है अवैध प्लॉटिंग का पूरा प्रकरण
सहारनपुर के 69 मिशन कंपाउंड निवासी अनिल कुमार गुप्ता की ओर से कैनाल रोड पर पहाड़ काटकर 14,175 वर्ग मीटर भूमि पर समतलीकरण और पुश्ता निर्माण कराया जा रहा था। स्थलीय निरीक्षण और दस्तावेज देखने पर पता लगा कि पूर्व में ली गई समतलीकरण की अवधि समाप्त हो चुकी थी बावजूद इसके वहां भूमाफिया काम/कांड को अंजाम दे रहे थे। लिहाजा एमडीडीए की ओर से अवैध भूमि विकास एवं प्लाटिंग का कार्य करने के मद्देनजर जिम्मेदार बिल्डर्स के खिलाफ 19 जुलाई को कारण बताओ और कार्य रोकने के नोटिस भेेजे गए थे। ये नोटिस उत्तराखंड नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम 1973 की सुसंगत धाराओं के तहत जारी हुए थे।

ध्वस्तीकरण,निलंबन का फैसला

एमडीडीए उपाध्यक्ष बृजेश कुमार संत ने डीएम सोनिका, सचिव प्राधिकरण एमएस बर्निया, निदेशक खनन पैट्रिक, अधीक्षण अभियंता एचसीएस राणा और संबंधित अधिकारियों के साथ बैठक कर निर्णय लिया कि अवैध कार्य को तुरंत प्रभाव से ध्वस्त कर दिया जाए। इसी बैठक में जिला खान अधिकारी को निलंबित करने के साथ भूगर्भ वैज्ञानिक को भी गलत तथ्य पेश कर पहाड़ कटान की स्वीकृति देने के लिए सस्पेंड करने का फ़ैसला लिया गया। वहीं प्राधिकरण के दो सुपरवाइजरों को भी जानकारी न देने के चलते निलंबित करने का निर्णय हुआ। बिल्डरों के इस कांड से सबक लेते हुए इसी बैठक में भविष्य में इस तरह की जगहों  पर जहां पर्वतों का कटान किया जाना हो, किसी भी प्रकार के विकास कार्य की अनुमति न देने का भी निर्णय लिया गया।

पूरे प्रकरण में सवाल उठना लाजिमी है कि अवैध प्लॉटिंग व खुदाई के मामले जिला प्रशासन ने चार दागदार को तो निलंबित कर दिया लेकिन क्या बड़े जिम्मेदारों पर भी इस कांड में कार्रवाई होगी ? और अगर तत्कालीन डीएम का इन माफियाओं पर लगाए दंड की वसूली नहीं हो पाई है तो क्या उसे वसूला जाएगा या जुर्माने की रकम को रफा-दफा कर दिया जाएगा। बहुत मुमकिन है कि इललीगल प्लॉटिंग गेम के प्लेयर्स औऱ उनके सहयोगी अपने सम्पर्कों के सहारे साफ बच निकलने का जुगाड़ लगा रहे हों लेकिन उन्हें अपनी गलतफहमी जल्द से जल्द दूर कर लेनी चाहिए क्योंकि भ्रष्टाचार पर सख्त और ज़ीरो टॉलरेंस पॉलिसी वाली सरकार में उनकी कोई भी तरकीब या तिकड़म कामयाब होने वाली नहीं है।