May 27, 2022 9:03 am

देवस्थानम बोर्ड भंग करने के लिए तीर्थपुरोहितों ने प्रधानमंत्री को लिखा खून से खत…

देहरादून: देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की मांग को लेकर केदारनाथ में तीर्थपुरोहितों का आंदोलन अब तेज हो गया है। देवस्थानम बोर्ड भंग करने के लिए केदारनाथ के तीर्थपुरोहित संतोष त्रिवेदी ने खून से लिखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र भेजा है। उन्होंने पत्र में तीर्थपुरोहितों की रक्षा के लिए यथाशीघ्र देवस्थानम बोर्ड को भंग करने की मांग की है। उन्होंने लिखा है कि सनातन धर्म की पौराणिक परंपराओं के साथ छेड़छाड़ किसी भी दशा में बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

केदारनाथ में बुधवार को आंदोलनकारियों ने नारेबाजी कर जुलूस निकाला। केदार सभा के अध्यक्ष विनोद शुक्ला के नेतृत्व में तीर्थपुरोहितों ने 58वें दिन भी क्रमिक धरना दिया। उन्होंने कहा कि जब तक प्रदेश सरकार देवस्थानम बोर्ड भंग नहीं करती, वे आंदोलनरत रहेंगे। एक सितंबर को जिला मुख्यालय रुद्रप्रयाग में होने वाले प्रदर्शन में केदारघाटी के प्रत्येक गांव के ग्रामीण शामिल होंगे। दूसरी तरफ देवस्थानम बोर्ड के विरोध में भाजपा से जुड़े तीर्थपुरोहितों का प्राथमिक सदस्यता से त्यागपत्र देने का सिलसिला भी बना हुआ है। अब तक 26 तीर्थपुरोहित पार्टी छोड़ चुके हैं। उन्होंने प्रदेश सरकार पर झूठे आश्वासन देने, तीर्थपुरोहितों को बांटने और हितों की अनदेखी का आरोप लगाया है। इस मौके पर संतोष त्रिवेदी, शुभांशु शुक्ला, अंकुर शुक्ला, मुकेश बहुगुणा, राजकुमार तिवारी, चमन लाल आदि मौजूद थे।

 

उधर, जीएमवीएन में आयोजित पत्रकार वार्ता में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने सरकार के भू-कानून और देवस्थानम बोर्ड जैसे निर्णय को जनहित के खिलाफ बताया है। कहा कि देवस्थानम बोर्ड गठित करने से पहले तीर्थ पुरोहितों से चर्चा की जानी चाहिए थी। कहा कि कांग्रेस की सरकार बनने पर जनविरोधी फैसलों को पलटा जाएगा।

वहीं, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि सारे विवाद का हल होने तक देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड का काम रोका गया है। विवादों के हल के लिए हाईपावर कमेटी बना दी गई है। चारधाम देवस्थानम प्रबंधन कानून से नाराज तीर्थ पुरोहितों के आंदोलन और भाजपा की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा देने के प्रश्न पर मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का स्टैंड एकदम साफ है। बनाई गई कमेटी चारधाम से जुड़े सभी लोगों की बात सुनेगी। उनकी बातें सुनने के बाद वह हल निकालेगी। तब तक देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड की यथास्थिति रहेगी। उस पर रोक लगाई जा रही है।