May 16, 2022 11:09 am

देवस्थानम बोर्ड को लेकर तीर्थपुरोहितों को खुश करने के लिये सरकार ने निकाल लिया ये रास्ता…

देहरादून: चारधाम के तीर्थ पुरोहितों और हक-हकूकधारियों में उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड को लेकर उपजे असंतोष को थामने के मद्देनजर सरकार अब तेजी से इसका रास्ता तलाशने में जुट गई है। राज्यसभा के पूर्व सदस्य और बदरी-केदार मंदिर समिति (बीकेटीसी) के पूर्व अध्यक्ष रहे भाजपा के वरिष्ठ नेता मनोहरकांत ध्यानी को सरकार की ओर से सौंपी गई जिम्मेदारी को इसी से जोड़कर देखा जा रहा है।

चारधाम की व्यवस्था सुदृढ़ करने के मद्देनजर त्रिवेंद्र सरकार के कार्यकाल में चारधाम देवस्थानम प्रबंधन अधिनियम अस्तित्व में आया। इसके दायरे में बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री धाम के साथ ही इनसे जुड़े मंदिरों के अलावा चार अन्य मंदिर भी लाए गए। फिर अधिनियम के तहत चारधाम देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड का गठन किया गया। हालांकि, चारों धामों के तीर्थ पुरोहित और हक-हकूकधारी लगातार देवस्थानम बोर्ड का विरोध करते आ रहे हैं। उनका कहना है कि बोर्ड उनके हितों पर कुठाराघात है। उनकी मांग है कि बोर्ड को तत्काल भंग करने के साथ ही चारधाम की पूर्व व्यवस्था को बहाल किया जाए।

प्रदेश सरकार में इसी साल मार्च में नेतृत्व परिवर्तन होने के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने तीर्थ पुरोहितों से वार्ता के बाद बोर्ड के संबंध में निर्णय लेने का भरोसा दिलाया, लेकिन बात आगे नहीं बढ़ पाई। जुलाई में सरकार में फिर नेतृत्व परिवर्तन हुआ और पुष्कर सिंह धामी मुख्यमंत्री बने। उन्होंने भी इस मसले के समाधान करने का आश्वासन दिया, मगर तीर्थ पुरोहित और हक-हकूकधारी अभी भी आंदोलित हैं।अब जबकि यह चुनावी साल है तो बोर्ड को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन ने सरकार की मुश्किलों में भी इजाफा किया है।

इसे देखते हुए सरकार अब अधिक गंभीर हुई है। मुख्यमंत्री धामी ने इस असंतोष को थामने के मद्देनजर ही वरिष्ठ नेता मनोहरकांत ध्यानी सेवाएं लेने का निर्णय लिया है। ध्यानी स्वयं पंडा-पुरोहित समाज से आते हैं और वह वर्ष 1993 से 1995 तक बदरी-केदार मंदिर समिति के अध्यक्ष रहे हैं। राज्यसभा के सदस्य रह चुके ध्यानी की तीर्थ पुरोहितों और हक-हकूकधारियों के बीच अच्छी पकड़ भी मानी जाती है। मुख्यमंत्री ने ध्यानी से आग्रह किया है कि वह सभी वर्गों से राय लेकर रिपोर्ट तैयार करें, ताकि देवस्थानम बोर्ड के संबंध में जनभावनाओं के अनुरूप एक सुविचारित निर्णय लिया जा सके।


मुख्यंत्री पुष्कर सिंह धामी का कहना है कि सरकार तीर्थ पुरोहितों की भावनाओं का सम्मान करती है और उनके अधिकारों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। जल्द ही देवस्थानम बोर्ड के संबंध में उचित निर्णय लिया जाएगा।