May 22, 2022 12:45 am

रोज़गार – राजधानी पर रार : कर्नल की ललकार, कांग्रेस – बीजेपी से खुली बहस को “आप” तैयार

देहरादून: आर्मी भर्ती ट्रेनिंग,रोज़गार और आध्यात्मिक राजधानी के मुद्दे पर “आप” की कांग्रेस, बीजेपी से ठन गई है। दून आकर केजरीवाल ने कर्नल कोठियाल की  तारीफों के पुल क्या बांधे  एक दिन बाद ही उत्तराखण्ड कांग्रेस के सबसे धाकड़ नेता हरीश रावत ने  केजरी के दावों पर सोशल मीडिया पर अपने पत्र से प्रहार कर दिया। हरदा के हमले के ठीक एक दिन बाद मोर्चा संभालने खुद कर्नल कोठियाल मैदान में उतर आए।

फ्री बिजली पर कांग्रेस-बीजेपी को सार्वजनिक बहस का  चैलेंज देने वाले आम आदमी पार्टी के सीएम चेहरे कर्नल अजय कोठियाल ने दोनों दलों के सामने नई चुनौती का चक्रव्यूह रच दिया हैं। रोज़गार और आध्यात्मिक राजधानी के मुद्दे पर कांग्रेस-बीजेपी पर जमकर कर्नल अजय ने आक्रमण किए। कर्नल कोठियाल ने रोज़गार की रार पर दोनों दलों को ललकारते हुए खुली बहस में “आप” के  रोजगार प्लान से अपने  रोज़गार प्लान का मुकाबला कराने की चुनौती दी। कर्नल अजय कोठियाल के मुताबिक बीजेपी-कांग्रेस सार्वजिनक संवाद के लिए राज़ी हों तो उसी मंच से वो  भी बताने को तैयार हैं कि उत्तराखंड जैसे हिमालयी राज्य में रोज़गार कैसे पैदा होगा।

यूथ फाउंडेशन का राजनीति नहीं रोज़गार से सरोकार

कर्नल कोठियाल के मुताबिक वो कभी सत्ता में नहीं रहे, हुकूमत तो कांग्रेस और बीजेपी ने की है तो उन्हें सवाल उठाने के बजाए ये जवाब देना चाहिए कि युवाओं को रोज़गार देने के नाम पर जबानी जमा- खर्च के अलावा उन्होंने किया क्या है।

कर्नल कोठियाल के मुताबिक यूथ फाउंडेशन राजनीति से नहीं रोजगार से वास्ता है, महज 4 लोगों से शुरु हुआ यूथ फांउडेशन का सफर अब हजारों की संख्या पार कर चुका है कई नौजवान इससे जुडकर रोजगार भी पा चुके हैं फिर भी चंद लोगों को इसमें बुराई ही नजर आती है। कर्नल कोठियाल ने हरदा को भी मशवरा दिया कि उन्हें सिर्फ आलोचना नहीं, अच्छे काम की तारीफ भी करनी चाहिए।

 आध्यात्मिक राजधानी की “आप” की घोषणा से खौफ में बीजेपी-कांग्रेस

कर्नल कोठियाल का दावा है कि देवभूमि को आध्यात्मिक राजधानी बनाने की “आप” की  घोषणा से दोनों दल डरे हुए हैं,  ये हार का ही डर है जो उन्हें बेमतलब के सवाल खड़े करने पर मजबूर कर रहा है। कर्नल अजय कोठियाल के मुताबिक दोनों दलों को बे-सिर- पैर के सवाल करने के बजाए यह साफ करना चाहिए कि उन्हें  हिन्दुओं से तकलीफ है या आध्यात्मिक राजधानी से ।

खैर अभी देवभूमि के दंगल में करीब आधे साल का वक़्त बाकि है लेकिन आरोप-प्रत्यारोप के ज़रिए सभी दलों ने युद्धाभ्यास की शुरुआत कर दी है। कर्नल के हमले के बाद अब इंतज़ार कांग्रेस-बीजेपी की तोहमतों  की तोप से निकलने वाले गोले का है।