May 21, 2022 1:39 am

हरिदास शर्मा और चंदना दत्त को राष्ट्रपति करेंगे सम्मानित, बिहार के दो शिक्षकों को मिलेगा राष्ट्रीय पुरस्कार

कैमूर/मधुबनी: भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय ने उन 44 लोगों की सूची की घोषणा की, जिन्हें हजारों छात्रों के जीवन को समृद्ध बनाने के लिए 5 सितंबर को शिक्षकों को राष्ट्रीय पुरस्कार मिलेगा. इनमें बिहार के दो शिक्षकों हरिदास शर्मा और चंदना दत्त का इस बार राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयन हुआ है.

हरिदास शर्मा राजकीयकृत मध्य विद्यालय डरहक रामगढ़ कैमूर के प्रभारी प्रधान शिक्षक हैं. वहीं, चंदना दत्त राजकीयकृत मध्य विद्यालय रांटी मधुबनी में शिक्षिका हैं. बता दें कि शिक्षा के क्षेत्र में अहम् और उत्कृष्ट योगदान देने वाले शिक्षकों को हर साल राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजा जाता है. राष्ट्रपति के हाथों पांच सितंबर यानी शिक्षक दिवस के दिन चयनित शिक्षकों को पुरस्कार प्रदान किया जाता है. प्रत्येक को नई दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद से एक पदक, एक प्रमाण पत्र और 50,000 रुपये का नकद पुरस्कार मिलेगा.

74 में से 6 शिक्षकों के नाम केन्द्रीय मंत्रालय को भेजे गए थे

बताया जा रहा है कि राज्य स्तरीय कमेटी के पास जिलों से कुल 74 शिक्षकों के नाम इस पुरस्कार के लिए आए था. गहन समीक्षा और उपलब्धियों की विवेचना के बाद राज्यस्तरीय कमेटी ने 74 में से छह शिक्षकों के नाम केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय को भेजा था. नामित छह शिक्षकों में चार पुरुष और दो महिला शिक्षक थे. छह में दो का चयन भारत सरकार द्वारा गठित ज्यूरी ने किया है. छह में जिन चार शिक्षकों का चयन राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए नहीं हुआ है, उन्हें बिहार सरकार राज्य पुरस्कार दे सकती है.

बेटियों के लिए प्रेरणा बनीं चंदना

अंग्रेजी और मैथिली की शिक्षिका चंदना ने बताया कि जब मैं 2005 में एक शिक्षक के रूप में स्कूल में शामिल हुई थी, तब वहां लड़कियां नहीं थीं. लड़कों के साथ बातचीत करते हुए, मैंने उनसे पूछा कि उनकी बहनें स्कूल क्यों नहीं आतीं, लेकिन उनमें से किसी के पास कोई जवाब नहीं था. चंदना दत्त की कोशिशों का ही परिणाम निकला कि गुरबत के कारण बेटियों को स्कूल नहीं भेजने वाले ग्रामीण अपनी बेटियों को सरकारी माध्यमिक विद्यालय में भेजने लगे.

चंदना ने बदल दी ग्रामीणों की सोच

बकौल चंदना 2006 में ग्रामीणों को प्रोत्साहित करना शुरू किया और अंत में मेरी मेहनत रंग लाई. वर्तमान में हमारे स्कूल में नामांकित 900 छात्रों में से 60% लड़कियां और 40% लड़के हैं. चंदना ने बताया कि स्कूल को भी 2020 में मिडिल से हाई स्कूल में अपग्रेड कर दिया गया. चंदना दत्त की लिखी पुस्तक ‘गंगा स्नान’ काफी चर्चित रही है. उन्होंने अन्य पुस्तकों में कहानियां और कविताएं भी लिखी हैं. वह मिथिला चित्रकार बिमला दत्त की बहू हैं, और उन्होंने कई छात्रों को कला सिखाई है.

दीवारों पर चित्रकारी से छात्रों को किया प्रेरित

वहीं, हरिदास शर्मा ने आरके मिडिल स्कूल की इमारत को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए लॉकडाउन के दौरान स्कूल की सभी दीवारों को रंगीन आरेखों, चंद्र और सूर्य ग्रहणों, संख्याओं और अक्षरों से रंग दिया. हरिदास शर्मा ने बताया कि चूंकि चित्रों का बच्चों के दिमाग पर शब्दों की तुलना में अधिक प्रभाव पड़ता है, इसलिए मैंने दीवारों को रंगने का फैसला किया. मैंने स्कूल परिसर के एक छोटे से बगीचे में क्यूआर कोड के साथ पौधे और जड़ी-बूटियां भी लगाईं, ताकि बच्चे अपने सेलफोन पर पौधों के उपयोग और वैज्ञानिक नामों सहित सभी जानकारी प्राप्त कर सकें.

 

क्यूआर कोड से पढ़ाई हुई आसान

हरिदास शर्मा ने सभी कक्षाओं में क्यूआर कोड लगाए गए हैं, जिनका नाम बी आर अंबेडकर, सर्वपल्ली राधाकृष्णन, स्वामी विवेकानंद और आरुणी के नाम पर रखा गया है. जैसे ही छात्र इन कोड को अपने मोबाइल फोन से स्कैन करते हैं, उन्हें इन व्यक्तित्वों के बारे में सब कुछ पता चल जाता है. हरिदास शर्मा के अनुसार उनके पास दो समुदाय-आधारित स्मार्ट कक्षाएं भी हैं, जो बच्चों को बेहतर शिक्षण अनुभव प्रदान करती हैं.