May 21, 2022 2:47 am

नये मुख्यमंत्री के सामने नये नेता प्रतिपक्ष, सत्र में सत्ता पक्ष को घेरने की कांग्रेस ने बनाई मजबूत रणनीति, पढ़िये पूरी खबर

देहरादून: सोमवार यानि आज से शुरू हो रहे विधानसभा के मानसून सत्र में नए नेता सदन के साथ नए नेता प्रतिपक्ष आमने सामने होंगे। चुनावी साल में सत्ताधारी दल भाजपा और प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस, दोनों को ही बड़े बदलाव से गुजरना पड़ा है। इस बदलाव का असर विधानसभा के मानसून सत्र में भी देखने को मिलेगा। नए नेता सदन और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में भाजपा का नया आत्मविश्वास दिखाई देगा तो विपक्ष की ओर से नेता प्रतिपक्ष अपनी छोटी लेकिन मजबूत टीम के साथ मैदान में उतरेंगे। नए नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस व विपक्षी विधायक सरकार व सत्तारूढ़ दल के खिलाफ ताल ठोकने को तैयार हैं।

उत्तराखंड विधानसभा के मानसून सत्र शुरू होने से पहले विपक्ष ने विभिन्न मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति तैयार कर ली है। इसके तहत सदन में बेरोजगारी, महंगाई, कोरोना काल में स्वास्थ्य सेवाओं में खामियां, देवस्थानम बोर्ड, किसान, भू-कानून जैसे मुद्दों को उठाकर कांग्रेस सरकार को घेरने की कोशिश करेगी। इसके साथ कांग्रेस कोरोना सहित तमाम मुद्दों को लेकर नियम-58 के तहत काम रोको प्रस्ताव लाकर चर्चा की मांग करेगी।  नेता प्रतिपक्ष प्रीतम सिंह ने विधायकों को तीखे तेवरों के साथ आम जन से मुद्दों को सदन में उठाने पर जोर देते हुए बताया कि राज्य बढ़ती बेरोजगारी, महंगाई और कोरोना काल में स्वास्थ्य सेवाओं की लचर स्थिति, कर्मचारी, किसान और महिला तमाम ऐसे मुद्दे हैं, जिनको लेकर प्रदेश का प्रत्येक व्यक्ति त्रस्त है। भाजपा सरकार हर क्षेत्र में नाकाम साबित हुई है। उसे तमाम खामियों पर जवाब देना होगा। इसके अलावा रोजगार, स्वरोजगार और स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए उठाए जा रहे कदमों के साथ ही धीमे पड़े विकास कार्यों को रफ्तार के मुद्दे को भी सदन में उठाया जाएगा।

बैठक में हरिद्वार महाकुंभ के दौरान कोरोना जांच में हुए फर्जीवाड़े के मुद्दे को लेेकर विशेष तौर पर चर्चा की गई। तय है कि विपक्ष सदन में इस मुद्दे को जोरजोश से उठाएगा। दरअसल हरिद्वार महाकुंभ के दौरान संक्रमण रोकने के लिए कराई गई कोरोना जांच में बड़े स्तर पर फर्जीवाड़ा पाया गया है। जिसकी अभी जांच चल रही है। कांग्रेस शुरू से इस मामले को लेकर सरकार को कठघरे में खड़ा करती रही है। अब उसे मुद्दा सदन में उठाने का मौका मिला है।