May 18, 2022 12:55 pm

अफगानिस्तान से लौटे लोग बोले, ऐसा लग रहा था जैसे कल की सुबह नहीं देख पाएंगे, 60 हजार डॉलर देने पर बची जान 

देहरादून. अफगानिस्तान में फंसे दून के 60 लोग रविवार देर रात सशकुशल भारत लौट आए। श्यामपुर स्थित वैडिंग प्वाइंट में इनमें से 16 का स्वागत हुआ। अपनों से मिलने का बेसब्री से इंतजार करने रहे परिजनों ने फूलों की बरसात की। इस दौरान परिजन भावुक हो गए। पूर्व सीएम हरीश रावत, गोदावरी थापली और संग्राम सिंह पुंडीर ने सभी का स्वागत किया। लक्ष्मीपुर निवासी नितेश क्षेत्री ने बताया कि अफगानिस्तान में फंसे लोगों में दहशत का महौल है। उनको भी अपने साथियों के साछथ अफगानिस्तान में घास और पत्तल के ऊपर सोकर तीन रातें गुजारनी पड़ीं। अफगानिस्तान में तालिबान के कब्जे के बाद दून के कई लोग अफगानिस्तान में फंसे हैं, जिनके घर लौटने का सिलसिला जारी है। रविवार को दून के अलग-अलग क्षेत्रों के 60 लोग दिल्ली तक फ्लाइट पर आए। यहां से बस से सीधे श्यामपुर स्थित एक वैडिंग प्वाइंट में पहुंचे। यहां स्वागत के लिए परिजन पहले से ही जमे हुए थे। जैसे ही अफगानिस्तान से लौटे लोग बस से उतरे, परिजनों ने उन पर फूलों की बारिश की।

अपनों के मिलते ही उनकी आंखें नम हो गईं। अफगानिस्तान से लौटने वालों में प्रवीन जुयाल, किशोर सिंह, नरेश सिंह, मोहन बहादुर, अविनाश क्षेत्री, रण बहादुर पुन, राम बहादुर थापा, सतीश कुमार, अरविंद पुंडीर, सुधीर कुमार, राकेश राणा, नितेश कुमार, यशपाल सिंह, रोहित थापा, संदीप जुयाल भी शामिल रहे। अरिवंद खड़का और शैलेंद्र थापा के सहयोग से सभी सकुशल वतन वापसी हुई है। 

ऐसा लग रहा था जैसे कल की सुबह नहीं देख पाएंगे

हम खुशकिस्मत हैं कि भारत की धरती पर पैदा हुए हैं। अफगानिस्तान में तो बुरे हाल हैं, वहां के लोगों का जीवन सुरक्षित नहीं है। फौजी आदमी हूं, सेना में रहकर कई लड़ाई लड़ी, इसलिए तालिबानी कब्जे के बाद मुझे ज्यादा घबराहट नहीं हुई, लेकिन वहां के हालत देखकर ऐसा लगता था कि अब कल की सुबह नहीं देख पाएंगे। हम होटल के अंदर बंद थे और बाहर तालिबानी घूम रहे थे।  अफगानिस्तान से लौटे चंद्रबनी निवासी पूर्व सैनिक मोहित कुमार क्षेत्री ने अपनी आपबीती बयां की। बताया कि वह दिसंबर 2020 से काबुल स्थित ब्रिटिश दूतावास में सिक्योरिटी गार्ड का काम कर रहे थे।

जब तालिबान का कब्जा हुआ तो हमें एक होटल में रखा गया। हम होटल के अंदर बंद थे और बाहर तालिबानी घूम रहे थे। एक रात होटल में रहे। अगले दिन हमें सीधे फ्लाइट से इंडिया भेजने की तैयारी थी, लेकिन बाद में यूके की फ्लाइट से हमें पहले दुबई ले गए, यहां से इंग्लैंड गए, फिर इंडिया आए। इस दौरान खाने-पीने की दिक्कत हुई। मेरे पास जो सामान था वह काबुल में ही छूट गया था। एक टी शर्ट और नेकर में 19 अगस्त को अपने घर पहुंचा। चंद्रबनी के सामाजिक कार्यकर्ता राजेश मल्ल ने सरकार से अफगान में फंसे सभी भारतीयों की सुरक्षित वतन वापसी करवाने की मांग की है। कहा कि सरकार को इसके लिए सख्त कदम उठाने चाहिए। जो लोग वहां फंसे हैं, उनके परिजन परेशान हैं।

तालिबानियों ने 60 हजार डॉलर देने पर बख्शी जान 

अफगानिस्तान से देहरादून लौटे अजय छेत्री ने कहा कि हमने तालिबानियों को 60 हजार डॉलर नहीं दिए होते तो शायद आज जिंदा नहीं होते। अफगानिस्तान के नाटो और अमेरिकी सेना के साथ पिछले 12 वर्षों से काम कर रहे प्रेमनगर निवासी अजय छेत्री ने अपनी जिंदगी के सबसे बुरे अनुभव को साझा करते हुए बताया कि वह उन खुशकिस्मत लोगों में से एक हैं, जो ऐसे हालातों में भी वापस देश लौट सके हैं। अजय के मुताबिक, उनके दोस्त विकास थापा और उनकी कंपनी के कई लोगों को तालिबानियों ने रिहा करने की एवज में 60 हजार अमेरिकन डॉलर की मांग की थी। ऐसे में विकास थापा सहित कई लोगों की जिंदगी बचाने के लिए उनकी कंपनी के लोगों ने पैसा इकट्ठा कर तालिबानी लोगों को 60 हजार अमेरिकन डॉलर दिए। इसके बाद तालिबानियों ने कुछ भारतीयों को एयरपोर्ट तक लाकर छोड़ा। उन्होंने बताया कि एयरपोर्ट पर भगदड़ के दौरान सैकड़ों लोगों के जूते-चप्पल पड़े थे।