May 21, 2022 11:31 pm

देवभूमि का दंगल 2022 : हिन्दुतत्व कार्ड खुलकर खेलने को “आप” के बढ़े कदम – कहा जीते तो देवस्थानम बोर्ड के वजूद पर चलेगी कलम, सुनिये क्या बोले “आप” के प्रवक्ता …

देहरादून: देवभूमि के सत्ता संग्राम 2022 में आम आदमी पार्टी अब हिंदुत्व के मुद्दे पर खुलकर बैटिंग करने को बेताब नज़र आ रही है। हिंदुत्व की सीढ़ी से सरकार का सपना देख रही आम आदमी पार्टी ने  पहले देवभूमि को आध्यात्मिक राजधानी बनाने का  एलान किया और अब  देवस्थानम बोर्ड भंग करने की मांग की  पुरज़ोर पैरवी कर इस मुद्दे पर बीजेपी से बढ़त लेने की कोशिश शुरू कर दी है।

रविवार को प्रेस कांफ्रेंस के ज़रिए “आप” नेताओं  नवीन पीरशाली और सुमंत तिवारी  ने सरकार पर  देवस्थानम बोर्ड को लेकर तीर्थ पुरोहितों के साथ खिलवाड़ करने का आरोप लगाया। आम आदमी पार्टी के मुताबिक लंबे समय से तीर्थ पुरोहित बोर्ड भंग की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे हैं लेकिन सरकार  उनकी मांगों पर कान देने को तैयार नहीं है, मामले का निपटारा करने के बजाए सरकार अभी तक  सिर्फ कमेटी बनाने की बात कर मुद्दे को भटकाने की कोशिश कर रही है। आप ने बीजेपी पर  देवस्थानम बोर्ड बनाकर हजारों साल की परंपरा पर प्रहार करने और बोर्ड के जरिए मंदिरों पर सरकारी शिकंजा कसने का भी आरोप लगाया।

हिंदुत्व को भुनाने की होड़ में पार्टी नम्बर वन बनने की जुगत में लगी आम आदमी पार्टी  बीजेपी पर सिर्फ फायदे के हिंदुत्व का नारा बुलंद करने का आरोप लगा रही है , आप के मुताबिक हिन्दुत्व का दम भरने  वाली बीजेपी अब खुद हिंदुत्व के नाम पर तीर्थ पुरोहितों के शोषण पर उतर आई है।   आम आदमी पार्टी के अनुसार 2017 से पहले बीजेपी ने वादा किया था कि चारोंधामों में वह हर तरह की सुविधाएं देगी ,लेकिन सरकार बनने के बाद बीजेपी ने बोर्ड का गठन कर न सिर्फ तीर्थपुरोहितों का उत्पीड़न  किया है बल्कि  जनता से भी वादाखिलाफी की है।

सुनिये क्या बोले “आप” के प्रवक्ता …

” आप” का आरोप है कि देवस्थानम बोर्ड पर बीजेपी दोहरी  नीति अपना रही है , बाकी  राज्यों में जहां बीजेपी सरकारें देवस्थानम बोर्ड के खिलाफ हैं वहीं इसके उलट उत्तराखंड में बीजेपी की सरकार बोर्ड के पक्ष में हैं ,ऐसे में ये सवाल उठना लाज़िमी है कि आखिर ये दोहरा चरित्र क्यों? सरकार की आखिर ऐसी क्या मजबूरी है जो उसे बोर्ड भंग करने से रोक रही है। इनके एक पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र रावत बोर्ड की वकालत करते हैं तो दूसरे पूर्व सीएम तीरथ सिंह रावत बोर्ड गठन पर पुनर्विचार के पक्षधर है। आप का सवाल है कि जब तीरथ सिंह मुख्यमंत्री थे तब क्यों उन्होंने बोर्ड भंग नहीं किया अब वो पुनर्विचार की पैरवी क्यों कर रहे हैं,  मतलब साफ है कि बीजेपी  देवस्थानम बोर्ड पर सिर्फ तीर्थपुरोहितों की भावनाओं के साथ खिलवाड कर रही है और उन्हें  गुमराह करने के लिए कमेटी की कसरत कर  रही है जिसे आम आदमी पार्टी  बर्दाश्त नहीं करेगी। “आप” ने  देवस्थानम बोर्ड भंग के फैसले की मांग को लेकर पूरे राज्य में आंदोलन छेड़ने का भी ऐलान किया। आम आदमी पार्टी ने ये भी दावा किया कि देवभूमि में “आप” की सत्ता आते ही  सरकार की कलम से पहला दस्तख़त देवस्थानम बोर्ड भंग करने के फैसले पर होगा।

कुलमिलाकर “आप” को बिजली, पानी, सड़क, स्कूल, अस्पताल के सहारे सत्ता का सपना साकार होना  मुश्किल लग रहा है लिहाज़ा रणनीतिक बदलाव के तहत  “आप “ने  विकास के साथ हिंदुत्व राग भी छेड़ दिया है ,अब विकास और हिंदुत्व का ये कॉम्बो पैक “आप” को  फायदा पहुंचाएगा या नुकसान, इसके जवाब के लिए कुछ महीनों का इंतज़ार करना ही बेहतर है।