May 16, 2022 4:28 pm

‘पंज प्यारे’ से सिद्धू की तुलना करने के बाद हरदा ने माफी मांगी,  उत्तराखंड बीजेपी नेताओं ने कहा ऐसे कर लें प्रायश्चित…

देहरादून: पंजाब  में विवादित टिप्पणी के बाद उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस के प्रदेश चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष हरीश रावत संकट में घिर गए हैं। हालांकि, उन्होंने माफी मांग कर विवाद खत्म करने की कोशिश की, मगर अब उत्तराखंड भाजपा ने उन पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए हैं। आपको  बता दें कि सिद्धू और उनके अधीन चार कार्यकारी अध्यक्षों की तुलना ‘पंज प्यारे’ से करने के बाद रावत मुश्किलों में घिर गए हैं। दरअसल, ‘पंज प्यारे’ भारतीय समुदाय के सिख समाज के लिए सम्मान का शब्द है। जो हरीश रावत ने सिद्धू और उनके अधीन चार कार्यकारी अध्यक्षों के लिए इस्तेमाल किया ।

पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, जो कांग्रेस के पंजाब प्रभारी भी हैं, के पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष व चार कार्यकारी अध्यक्षों को लेकर दिए बयान ने नया विवाद पैदा कर दिया। हरीश रावत ने इस पर माफी मांगते हुए प्रायश्चित करने की बात कही, लेकिन रावत के प्रायश्चित करने के एलान के भी सियासी निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। उत्तराखंड के मैदानी जिलों, खासकर ऊधमसिंह नगर व देहरादून में सिख समुदाय बड़ा वोट बैंक है। रावत का बयान चुनाव के वक्त कांग्रेस के लिए मुसीबत खड़ी कर सकता है। रावत भी इस बात को समझते हैं, लिहाजा उन्होंने कहा कि वह अपने बयान को लेकर प्रायश्चित करेंगे और उत्तराखंड के किसी गुरुद्वारे में झाडू लगाएंगे।

इसके बावजूद अब भाजपा इस मुददे पर उन पर हमलावर है। प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री डा हरक सिंह रावत ने पलटवार करते हुए कहा कि हरीश रावत को अगर प्रायश्चित करना ही है तो उन्हें पंजाब में ही करना चाहिए, क्योंकि विवादित बयान उन्होंने पंजाब में ही दिया।

भाजपा के प्रदेश मीडिया प्रभारी मनवीर सिंह चौहान ने कहा कि हरीश रावत हमेशा से ही धार्मिक भावनाओं को आहत करते रहे हैं। भाजपा नेता एवं उत्तराखंड सिख विकास परिषद के अध्यक्ष बलजीत सोनी ने भी कांग्रेस नेता हरीश रावत के बयान पर कड़ा एतराज जताया। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय 1984 की घटना को पूरी तरह भुला भी नहीं पाया है और अब रावत ने सिख समाज के जख्मों पर नमक छिड़कने का काम किया है।

साफ है कि आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर उत्तराखंड में भाजपा हरीश रावत के बयान को लेकर उन्हें ही नहीं, बल्कि पूरी कांग्रेस को कठघरे में खड़ा करना चाहती है। अब सबकी नजर रावत पर टिकी हैं कि इसका तोड़ वह किस तरह निकालते हैं।