May 22, 2022 12:35 am

नैनीताल हाई कोर्ट ने पूछा: राज्य सरकार ने पीसीएस अधिकारी की नियुक्ति गृह जनपद में कैसे की ?

नैनीताल: उच्च न्यायालय ने रुड़की में नगर निगम की भूमि पर निॢमत दुकानों को अपने ही लोगों को आवंटित करने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई की। मामले में राज्य सरकार को फटकारते हुए पूछा कि कैसे एक पीसीएस अधिकारी की नियुक्ति गृह जनपद में कर दी गई। कोर्ट ने सरकार के इस निर्णय को मौखिक तौर पर गलत करार दिया। साथ ही कहा कि सरकार इस अधिकारी (मुख्य नगर आयुक्त नुपुर वर्मा) का ट्रांसफर सोमवार तक करे, अन्यथा कोर्ट ट्रांसफर नीति ही रद कर सकती है। मामले में अगली सुनवाई सोमवार को होगी।

शुक्रवार को वरिष्ठ न्यायमूॢत मनोज कुमार तिवारी व न्यायमूॢत आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ में रुड़की निवासी आशीष सैनी की जनहित याचिका दायर पर सुनवाई हुई। जिसमें कहा गया है कि नगर निगम रुड़की ने नगर निगम की भूमि पर 2011 से 2013 के बीच करीब 24 दुकानें बनाई थी। जिन्हेंं तत्कालीन मेयर ने बिना किसी विज्ञप्ति के अपने ही लोगों को आवंटित कर दिया। बाद में दुकानों की छत का अधिकार भी उन्हीं लोगों को दे दिया गया। जिसे 2015 में तत्कालीन मेयर ने उच्च न्यायालय में चुनौती दी। कोर्ट ने जिलाधिकारी को निर्देश दिए थे कि मामले की जांच कर रिपोर्ट पेश की जाए।

इधर, इस आदेश को दुकानदारों ने भी चुनौती दी थी जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था। साथ ही शहरी विकास सचिव को निर्देश दिए थे कि दुकानों को खाली कराने के लिए अंतिम निर्णय लें और दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करें। कोर्ट के आदेश पर आवंटन निरस्त कर दिया गया। तब खंडपीठ के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई। सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के आदेश को सही मानते हुए 2020 तक दुकानें खाली करने का समय दिया लेकिन अभी तक दुकानें खाली नहीं कराई गई। याचिकाकर्ता का भी कहना है कि मुख्य नगर आयुक्त नुपुर वर्मा रुड़की की स्थायी निवासी हैं। उनकी यहां नियुक्ति गलत तरीके से की गई है। अधिकारियों की नियुक्ति अपने ही होम टाउन में नही हो सकती।

सरकार ने बताई ट्रांसफर नीति  

सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि 1946 की तबादला नियमावली के अनुसार यदि किसी स्थायी महिला अधिकारी की शादी उसके गृह जिले से बाहर हो जाती है और उसका पता बदल जाता है। तब उसी जिले में उसकी नियुक्ति हो सकती है। वहीं याचिकाकर्ता का कहना है कि मुख्य नगर आयुक्त नुपुर वर्मा ने उत्तराखंड महिला आरक्षण का लाभ भी लिया है। साथ ही उत्तराखंड ट्रांसफर नीति 2017 यह कहती है कि किसी भी अधिकारी की नियुक्ति अपने होम टाउन में नहीं हो सकती।


हाईकोर्ट की टिप्पणी

यदि स्वास्थ्य कारणों से अनफिट कर्मचारी या अधिकारी अपना ट्रांसफर अपने गृह जनपद में कराना चाहता है तो तब सरकार यह तथ्य सामने लेकर आती है कि उसका गृह जनपद है। इस मामले में सरकार खुद 2017 की ट्रांसफर नियमावली का उल्लंघन कर रही है।