May 21, 2022 2:54 am

बाढ़ ने मानी संध्या की हिम्मत के आगे हार- स्कूल जाने को अकेले नाव चलाकर करती दरिया पार

गोरखपुर: “खुदी को कर बुलंद इतना कि हर तकदीर से पहले ख़ुदा बंदे ख़ुद पूछे बता तेरी रज़ा क्या है” जी हाँ संध्या की दास्तां पर अल्लामा इकबाल का ये शेर बिल्कुल सटीक बैठता है। हम बताते हैं कैसे …

बाढ़ अच्छे अच्छों के हौसले पस्त कर देती हैं लेकिन मिलिए  हिमालयी  हौसलों की इस मल्लिका से जिसके जुनून के आगे बाढ़ ने भी घुटने टेक दिए है । गोरखपुर की गौरव ……इस बिटिया का नाम है संध्या और उम्र है महज 15 साल है आपको बता दें संध्या 11 क्लास में साइंस  की स्टूडेंट है। अब क्या है संध्या की कहानी और क्यों उसे हम हिमालयी हौसले की मल्लिका बता रहे हैं आइये आपको बताते हैं। लेकिन हमारा दावा है की आप भी संध्या की कहानी सुनने के बाद यही कहेंगे की वाकई संघया का कोई सानी नहीं है ॥

 दरअसल गोरखपुर इनदिनों बाढ़ की चपेट में है, कई ग्रामीण इलाकों में लोगों का  घर-बार, खेत-खलिहान सब बाढ़ के पानी में डूब चुके हैं। इन्ही में से एक है गोरखपुर का  बहरामपुर गाँव ,जहां की संध्या रहने वाली है।  पिता दिलीप सहानी पेशे से कारपेंटर हैं, घर में गरीबी है लेकिन संध्या के अंदर पढ़ाई का गजब का जज्बा और बेमिसाल जुनून है।

संध्या का स्कूल पिछले 1 साल से कोरोना की वजह से बंद था , पिता के पास इतने पैसे नहीं थे कि घर में एक अदद स्मार्टफोन होता जिसपर संध्या ऑनलाइन पढ़ाई कर सकती थी, उसे तो सिर्फ इंतज़ार था अपने स्कूल के खुलने का , पिछले महीने  स्कूल कॉलेज तो खुल गए लेकिन तबतक बाढ़ भी उसकी हिम्मत और हौसले को आजमाने के लिए साथ आ चुकी थी, बाढ़ ने संध्या के गांव को हर तरफ से घेर लिया , संध्या का घर भी डूब गया, पूरा परिवार छत पर शरण लेने को मजबूर हो गया। हालात इतने खराब हुए कि गांव के दूसरे बच्चों ने स्कूल जाना बंद कर दिया लेकिन संध्या ने अपने सपनों से समझौता नहीं किया, संध्या ने बाढ़ की चुनौती से हारकर घर बैठने के बजाए अपने साहस की नाव से समस्या को पार करने का फैसला किया, उसने ठान लिया कि उसे स्कूल जाना है , फिर क्या था संध्या ने अकेले नाव चलाकर  स्कूल आना जाना शुरू कर  दिया। इस बिटिया के हिम्मत और हौसले को अब सैलाब भी सलाम कर रहा है।

संध्या तालीम  के ज़रिए अपनी तकदीर खुद  लिखना चाहती है ,उसका सपना पढ़ लिखकर रेलवे में नौकरी करना है ताकि वो अपने परिवार को बेहतर ज़िन्दगी दे सके। उसका एक छोटा और प्यारा सपना ये भी है कि जिस हवाई जहाज को अबतक आसमान में उड़ते देखा है उसमें बैठकर बादलों को करीब से देख सके।  संध्या इस बात से भी बेहद खुश है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी और सुपरस्टार सोनू सूद ने उसके पिता से बातकर उसकी  न सिर्फ तारीफ की बल्कि मदद का भरोसा भी दिया।

अपनी हिम्मत और हौसले के बलबूते संध्या आज लड़कियों के लिए  रोल मॉडल बन चुकी है,खासकर समाज के उस तबके की लड़कियों और उनके माता-पिता के लिए , जिस तबके से वो खुद आती है और जहां लड़कियों को बोझ और उनकी पढ़ाई बेकार माना जाता है। उज्ज्वल भविष्य के लिए संध्या को अनेक शुभकामनाएं।