यूपी मे BSP की सुप्रीमो  मायावती को चुनौती देगी BJP की बेबी रानी मौर्य, जानिए कौन है बेबी रानी मौर्य ?

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लखनऊ: बसपा सुप्रीमो मायावती के मुकाबले के लिए भाजपा ने उत्तराखंड की पूर्व राज्यपाल व नवनियुक्त राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बेबीरानी मौर्य को पार्टी का दलित चेहरा बनाया है। भाजपा ने मायावती के जाटव वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए बेबीरानी को पूरी ताकत से चुनावी मैदान में उतारने की रणनीति बनाई है। ब्रज, पश्चिम, अवध, कानपुर-बुंदेलखंड, काशी और गोरखपुर क्षेत्र में बेबीरानी की एक-एक बड़ी सभा कराने के साथ सभी 75 जिलों में बेबीरानी की चुनावी सभाएं और सम्मेलन कराए जाएंगे। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने गत महीने हुए प्रवास में ही मायावती के जाटव वोट बैंक में सेंध लगाने  की नींव रख दी थी। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित ब्लॉक प्रमुख और जिला पंचायत अध्यक्षों के सम्मेलन में नड्डा का स्वागत चित्रकूट के जिला पंचायत अध्यक्ष अशोक जाटव से कराया गया था। वहीं नड्डा ने सहारनपुर की बलिया खेड़ा की ब्लॉक प्रमुख सोनिया जाटव का स्वागत किया था। उसी दिन शाम को प्रदेश मुख्यालय में आयोजित बैठक में प्रदेश में लगातार कमजोर हो रही बसपा सुप्रीमो मायावती के जाटव वोट बैंक में सेंध लगाने की योजना भी बनी थी।

भाजपा हाईकमान ने तय रणनीति के तहत बेबीरानी मौर्य से उत्तराखंड के राज्यपाल पद से इस्तीफा दिलाकर उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष नियुक्त किया। जानकारी के मुताबिक ब्रज और पश्चिम के जिलों में खासतौर पर जाटव वोट बैंक पर मायावती का कब्जा माना जाता है। आगरा की बेबीरानी भी जाटव समाज से है। पार्टी ने पश्चिम एवं ब्रज के साथ पूरे प्रदेश में जाटव वोट बैंक को साधने के लिए बेबीरानी पर दांव खेला है। बुधवार को प्रदेश मुख्यालय में चुनाव प्रभारी धर्मेन्द्र प्रधान की पहली चुनावी बैठक में बेबीरानी को लेकर योजना बनाई गई। अक्तूबर-नवंबर में बेबीरानी मौर्य की हर क्षेत्र में एक-एक बड़ी सभा कराई जाएगी, इसमें क्षेत्र के सभी जिलों की दलित एवं अति दलित जातियों के साथ खासतौर पर जाटव समाज के लोगों को जुटाने का प्रयास किया जाएगा। क्षेत्रों के बाद दिसंबर से लेकर चुनाव तक हर जिले में बेबीरानी मौर्य की एक-एक बड़ी सभा कराई जाएगी। उनकी सभाओं के लिए प्रदेश महामंत्री प्रियंका रावत को समन्वयक नियुक्त किया गया है।

हर क्षेत्र की बनेगी अलग रणनीति

भाजपा ब्रज, पश्चिम, काशी, गोरखपुर, अवध और कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के लिए अलग-अलग चुनावी रणनीति बनाएगी। सभी छह क्षेत्रों में मोदी-योगी सरकार के लाभार्थियों को साधने के साथ वहां हुए विकास, जातीय समीकरण, विपक्षी दलों की स्थिति और समसामायिक स्थिति के अनुसार हर क्षेत्र की अलग रणनीति तैयार की जाएगी।

कौन है बेबी रानी मौर्य

उत्तर प्रदेश के आगरा जिले में 15 अगस्त 1956 को बेबी रानी मौर्य का जन्म हुआ था। बेबी रानी मौर्य गैर राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखती हैं। उनके पति बैंक में कार्यरत थे और ससुर एक आईपीएस अधिकारी थे। मौर्य ने बीएड और कला में परास्नातक किया है। बाद में राजनीति में आई और आगरा की मेयर बनीं।

बेबी रानी मौर्य का पारिवारिक जीवन

मौर्य के पति का नाम प्रदीप कुमार है। वो पंजाब नेशनल बैंक में डायरेक्टर एवं सीनियर मैनेजर पद से सेवानिवृत्त हैं। बेबी रानी मौर्य के ससुर एक आईपीएस अफसर थे। उनका मायका बेलनगंज में है और ससुराल करिअप्पा रोड बालूगंज में है। मौर्य के बेटे अभिनव मौर्य इंजीनियर हैं और अमेरिका में रहते हैं। उनकी एक बेटी है, जिसका नाम अंजू मौर्य है और वो भी अमेरिका में ही रहती हैं। बेबी रानी मौर्य के दामाद अजय भी पेशे से इंजीनियर हैं।

बीबीरानी मौर्य का राजनीतिक करियर

बेबी रानी मौर्य की राजनीति में एंट्री उस दौर में हुई थी, जब भाजपा इतनी ताकतवर पार्टी नहीं थी। उस दौरान साल 1995 में भाजपा ज्वाइन करने के बाद बेबी रानी मौर्य पार्टी के टिकट पर आगरा की मेयर बनी थी। साल 1997 में मौर्य भाजपा के राष्ट्रीय अनुसूचित मोर्चा की कोषाध्यक्ष नियुक्त हुईं। बता दें कि  उस समय रामनाथ कोविंद राष्ट्रीय अनुसूचित मोर्चा के अध्यक्ष थे। बेबी रानी मौर्य ने एत्मादपुर से भाजपा के टिकट पर विधानसभा चुनाव भी लड़ा था, लेकिन वे हार गई थीं।

मौर्य के नाम और कई उपलब्धियां हैं। अटल बिहारी की सरकार में साल 2002 में बेबी रानी मौर्य राष्ट्रीय महिला आयोग की सदस्य बनीं। उन्हे कई पुरस्कार भी मिल चुके हैं, जिसमें 1996 में सामाजिक कार्यों के लिए समाज रत्न, 1997 में उत्तर प्रदेश रत्न और 1998 नारी रत्न सम्मान शामिल है। 26 अगस्त साल 2018 में बेबी रानी मौर्य ने उत्तराखंड की राज्यपाल पद की शपथ ली थी।