May 16, 2022 5:56 pm

नहीं पड़ेगा आगामी चुनाव पर किसान आंदोलन का असर ! भाजपा नेतृत्व ने कस ली कमर, उत्तराखंड और पश्चिमी यूपी पर है पैनी नज़र, पढ़िये पूरी खबर  

नई दिल्ली: भाजपा नेतृत्व पांच राज्यों के विधासभा चुनावों से पहले सभी मोर्चों पर चाक चौबंद रणनीति बनाने में जुटा है। उसकी चिंता कोरोना काल के साथ किसान आंदोलन भी है, जो अभी भी जारी है। दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसान पंजाब, उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड से भी जुड़े हैं। ऐसे में इन राज्यों में पड़ने वाले संभावित असर पर भी नजर रखी जा रही है। पंजाब में तो भाजपा का दांव छोटा है, लेकिन यूपी-उत्तराखंड में उसे अपनी सरकारों को बरकरार रखने की चुनौती है।

इन राज्यों में भाजपा की चुनावी टीमें तैनात हो चुकी हैं। अब वह एक-एक मुद्दे की व्यापक समीक्षा कर रणनीति बनाने का काम कर रही हैं। इसमें एक मुद्दा किसान आंदोलन का भी है। चूंकि, किसान आंदोलन में शामिल अधिकांश लोग पंजाब, उत्तर प्रदेश व उत्तराखंड से जुड़े हैं। इसलिए इन राज्यों में इसका असर पड़ सकता है। पंजाब में सत्तारूढ़ कांग्रेस ने हाल में नेतृत्व परिवर्तन भी किया है। वह किसान आंदोलन को भी भुनाने में लगी है। अकाली दल व आम आदमी पार्टी भी इस मुद्दे पर भाजपा व केंद्र सरकार के खिलाफ मुखर है।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश पर खास नजर

उत्तर प्रदेश में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बड़े किसान नेता चौधरी राकेश टिकैत खुद मोर्चा संभाले हुए हैं। ऐसे में इस क्षेत्र में इस आंदोलन का खासा जोर है। खासकर जाटलैंड इससे प्रभावित है। इसका चुनावों में और वोटों पर कितना असर पड़ेगा, इसे लेकर भाजपा भी सशंकित है। हालांकि, उसके नेता इसे किसानों के बजाय राजनीतिक आंदोलन करार दे कर इसकी धार कुंद कर रहे हैं। सूत्रों के अनुसार, भाजपा इसके असर का लगातार आकलन कर रही है और चुनाव तक वह इस क्षेत्र में खुद को मजबूत करने में लगी रहेगी। बीते विधानसभा व लोकसभा चुनाव में भाजपा को यहां भारी सफलता मिली थी।

उत्तराखंड के तराई क्षेत्र में हो सकता है असर

उत्तराखंड में तराई के क्षेत्र में किसान आंदोलन का असर होने की संभावना है। यहां पर बड़ी संख्या में सिख आबादी है, जो पंजाब से जुड़ी है। चूंकि पंजाब के तमाम किसान संगठन आंदोलन में शामिल हैं, ऐसे में उसका असर उत्तराखंड तक जा रहा है। भाजपा के लिए राहत की बात यह है कि इसका असर पहाड़ी क्षेत्र में दिखाई नहीं दे रहा है। सूत्रों के अनुसार, भाजपा नेता मान रहे हैं कि पांचों राज्यों में केवल दो बड़े मुद्दे कोरोना व किसान उसे संभालने हैं और इस पर तेजी से काम चल रहा है। इनकी तासीर समझ कर काम किया जा रहा है। लोगों से संवाद व संपर्क किया जा रहा है, ताकि नाराजगी को दूर कर उनको साथ लाया जा सके।