रांची : ट्रेन से देना था तस्करी को अंजाम, नौकरी के नाम दूर शहर बेचने का था प्लान- RPF ने दिखाई मुस्तैदी, गुलामी के पिंजरे से बच गई बच्चियों की जान

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रांची / झारखंड : लोहरदगा में मानव तस्करी के एक बड़े खेल का खुलासा हुआ है। समय रहते मानव तस्करी को रोका गया। एक दो नहीं, बल्कि एक दर्जन नाबालिग को दूसरे प्रदेश में ले जाने से पहले आरपीएफ ने रोका लिया। इन नाबालिग को लोहरदगा रेलवे स्टेशन में सुरक्षित रूप से रोका गया है। हालांकि इसकी भनक लगने से महिला दलाल मौके से फरार हो गई। फिलहाल मामले की सूचना चाइल्ड लाइन को दी गई है।

आरपीएफ और चाइल्ड लाइन की टीम पूरे मामले की जांच और आगे की कार्रवाई में जुट गई है। सभी नाबालिग लोहरदगा जिले के सेन्हा थाना क्षेत्र के पारही बिसाहा टोली गांव की रहने वाली बताई जा रही है। बताया जा रहा है कि सेन्हा थाना क्षेत्र के पारही विसाहा टोली गांव की रहने वाली महिला दलाल रोजगार दिलाने के नाम पर एक दर्जन नाबालिग बच्चियों को बरगला कर अपने साथ तमिलनाडु के कोयंबटूर ले जा रही थी। महिला दलाल मंगलवार की दोपहर एक बजे के यात्री रेलगाड़ी से सभी नाबालिग को पहले रांची और उसके बाद वहां से कोयंबटूर ले जाने वाली थी।

इसी बीच लोहरदगा रेलवे स्टेशन में आरपीएफ के ओसी कमलेश सोरेन को इसकी भनक लग गई। आरपीएस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए नाबालिगों से सादे लिबास में पूछताछ शुरू की। नाबालिगों ने बताया कि उन्हें रोजगार दिलाने के लिए एक महिला लेकर कोयंबटूर जा रही है, वह महिला कहीं चली गई है। इसके बाद आरपीएफ को पूरे मामले की जानकारी हो गई। मामले की सूचना चाइल्ड लाइन की टीम को दी गई। चाइल्ड लाइन की टीम मौके पर पहुंचकर पूरे मामले की जांच और आगे की कार्रवाई में जुट गई है। एक साथ एक दर्जन नाबालिग बच्चियों को रोजगार के नाम पर दूसरे प्रदेश में ले जाने की इस घटना से हर कोई हैरान है।