हरक सिंह रावत और उमेश शर्मा काऊ के बीच हुई बहुगुणा की एंट्री, जानिए विजय बहुगुणा का मिशन ?

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देहरादून: कैबिनेट मंत्री डा हरक सिंह रावत और रायपुर क्षेत्र से विधायक उमेश शर्मा काऊ को साधने के लिए पार्टी हाईकमान ने पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को मोर्चे पर लगाया है। बहुगुणा ने मंगलवार को देहरादून पहुंचकर मंत्री हरक सिंह और विधायक काऊ के निवास पर जाकर उनसे लंबी मुलाकात की। सूत्रों के मुताबिक बहुगुणा ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि सभी एकजुट रहेंगे तो ठीक रहेगा। साथ ही आगामी विधानसभा चुनाव के संबंध में चर्चा की।

वर्ष 2016 के सियासी घटनाक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। तब उनकी अगुआई में जिन नौ कांग्रेसी विधायकों ने भाजपा का दामन थामा था, उनमें हरक सिंह रावत व उमेश शर्मा काऊ भी शामिल थे। इस बीच पूर्व मंत्री यशपाल आर्य व उनके पुत्र संजीव आर्य के कांग्रेस में घर वापसी के बाद से हरक सिंह रावत पर सभी की निगाहें टिकी हैं। हालिया दिनों में हरक सिंह के बयानों और पूर्व मुख्यमंत्री व कांग्रेस नेता हरीश रावत के साथ उनके नए रिश्ते को लेकर सियासी गलियारों में तमाम निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। यही नहीं, विधायक काऊ भी अपने क्षेत्र में विकास कार्यों को लेकर नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। कुछ समय पहले ही मंत्री हरक व विधायक काऊ ने दिल्ली में पार्टी के राष्ट्रीय नेताओं से मुलाकात की थी।

इस परिदृश्य में पार्टी खुद को असहज महसूस कर रही है। माना जा रहा है कि इसी कड़ी में पार्टी हाईकमान ने हरक व काऊ को साधने की जिम्मेदारी पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा को सौंपी है। मंगलवार को बहुगुणा ने देहरादून पहुंचकर सबसे पहले प्रदेश भाजपा कार्यालय में प्रदेश महामंत्री संगठन अजेय कुमार से मुलाकात की। फिर वह विधायक उमेश शर्मा काऊ के घर गए और करीब डेढ़ घंटे तक उनसे बातचीत की। शाम को बहुगुणा ने मंत्री हरक सिंह के आवास पर जाकर उनसे लंबी मंत्रणा की।

सूत्रों के मुताबिक बहुगुणा ने मुलाकात के दौरान यह संदेश देने का प्रयास किया कि सभी एकजुट रहें। ये भी चर्चा है कि आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर फार्मूला, मनपसंद सीट समेत अन्य विषयों पर भी मंथन हुआ। अब देखने वाली बात होगी कि बहुगुणा की यह मुलाकात क्या असर दिखाती है।

उधर, विधायक काऊ ने मुलाकात के बारे में पूछने पर बताया कि पूर्व मुख्यमंत्री बहुगुणा उनके गु्रप के नेता है। उन्हीं के नेतृत्व में हम भाजपा में शामिल हुए थे। साढ़े चार साल बाद वह उनके घर आए और कुशलक्षेम पूछी। साथ ही पार्टी संगठन की मजबूती और आगामी विधानसभा चुनाव में जीत के संबंध में चर्चा हुई। मंत्री हरक सिंह रावत से काफी प्रयासों क बाद भी फोन पर संपर्क नहीं हो पाया।