सरकार पहुंची भगवान के द्वार, क्या सीएम धामी कर देंगे देवस्थानम बोर्ड रद्द ? पढ़िये पूरी खबर

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देहरादून: सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि देवस्थानम बोर्ड के संबंध में केंद्र सरकार से विचार विमर्श रही है। जल्द ही उचित निर्णय किया जाएगा। सीएम ने कहा कि सरकार जनभावनाओं का सम्मान करने वाली सरकार है। तीर्थों के पंडा, पुरोहित और पुजारियों के मान-सम्मान को कोई ठेस नहीं पहुंचाई जाएगी। मंगलवार शाम बदरीनाथ धाम से जुड़े श्री बदरीनाथ डिमरी धार्मिक केंद्रीय पंचायत के प्रतिनिधियों ने सीएम से सचिवालय में मुलाकात की। उन्होंने सीएम को देवस्थानम बोर्ड से संबंधित ज्ञापन भी दिया और धाम का प्रसाद भी दिया।

सीएम ने प्रतिनिधिमंडल को अंग वस्त्र भेंट किए। सीएम ने इस दौरान देवस्थानम बोर्ड को लेकर गठित उच्च स्तरीय समिति के अध्यक्ष मनोहर कांत ध्यानी से भी फोन बात की। ध्यानी को चार धाम के पुरोहित-पुजारियों की भावना से भी अवगत कराया। सीएम ने कहा कि इस संबंध में केंद्र सरकार से भी संवाद किया जा रहा है। सरकार सकारात्मक, धनात्मक और विकासात्मक दृष्टिकोण से चारधाम, पंडा पुरोहित, पुजारी समाज के सम्मान व धार्मिक आस्था की गरिमा के सम्मान के लिए तत्पर हैं।

तीर्थ पुरोहितों को मनाने और पीएम नरेंद्र मोदी के दौरे की तैयारियों का जायजा लेने को सीएम पुष्कर सिंह धामी बुधवार को केदारनाथ धाम जाएंगे। उनके साथ कैबिनेट मंत्री हरक सिंह रावत और स्वामी यतीश्वरानंद भी रहेंगे। पीएम नरेंद्र मोदी  के दौरे को देखते हुए सरकार अतिरिक्त सतर्कता बरत रही है। केदारनाथ धाम में जिस तरह सोमवार को पूर्व सीएम त्रिवेन्द्र  का जबरदस्त विरोध हुआ, उसे लेकर सरकार सतर्क हो गई है।

न सिर्फ त्रिवेंद्र रावत, बल्कि केदारनाथ धाम में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक और कैबिनेट मंत्री धन सिंह रावत का भी विरोध हुआ था। तीर्थ पुरोहितों ने तीन नवंबर को केदारनाथ धाम कूच का भी ऐलान किया है। इन तमाम परिस्थितियों को देखते हुए डैमेज कंट्रोल की तैयारी शुरू हो गई है। कमान स्वयं सीएम पुष्कर सिंह धामी ने अपने हाथ में संभाली है।

वे बुधवार को केदारनाथ धाम रवाना हो रहे हैं। वे वहां मोर्चा खोले बैठे तीर्थ पुरोहितों से बात करेंगे। उनके रोष को शांत कराएंगे। इसके साथ ही पीएम नरेंद्र मोदी के दौरे की तैयारियों को भी परखेंगे। तीर्थ पुरोहितों के विरोध के बीच सीएम के इस दौरे को बेहद अहम माना जा रहा है। इसे सरकार की ओर से तीर्थ पुरोहितों की मान मनोव्वल के एक बड़े प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।