बौखला गए कुत्ते जब हुआ पटाखों का शोर, 50 से अधिक लोगों को काटा …

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मुरादाबाद: दिवाली पर पटाखों की शोर से कुत्ते बौखला गए। खूंखार कुत्तों ने पचास से अधिक लोगों को अपना शिकार बनाया। शुक्रवार को जिला अस्पताल की इमरजेंसी में डॉग बाइट के मरीज पहुंचे। जहां ओपीडी बंद होने से मरीजों को एआरवी नहीं लग पाई। गुरुवार को दिवाली पर जमकर आतिशबाजी हुई। लोगों ने रोशनी फैलाने व तेज आवाज वाले पटाखे छोड़े। दिवाली की आतिशबाजी का असर सड़कों पर झुंड में दौड़ने वाले कुत्तों पर पड़ा। पटाखों के शोर से कुत्तों में बौखलाहट देखने को मिली। इससे कुत्ते खूंखार हो गए। शहर और गांव में लोगों पर कुत्ते हमलावर हो गए। झुंड में कुत्ते लोगों पर झपट पड़े। जिला अस्पताल की इमरजेंसी में तैनात फार्मासिस्ट हेमंत चौधरी ने बताया कि शुक्रवार को पचास से अधिक लोग डॉग बाइट की शिकायत लेकर अस्पताल पहुंचे। ये मरीज शहर के अलावा ग्रामीण इलाकों से आए थे।


ब्रीडिंग सीजन में कुत्तों से बचकर रहें

साल में छह महीने कुत्तों का ब्रीडिंग सीजन होता है। ये अगस्त, सितंबर, अक्तूबर और नवंबर के महीने हैं। इसके बाद फरवरी और मार्च कुत्तों के ब्रीडिंग का सीजन होता है। इन ब्रीडिंग सीजन में कुत्ते झुंड में अधिक दिखते हैं। एग्रेसिव भी अधिक होते हैं। कुत्तों में इरीटेशन की शिकायत बढ़ जाती है। ब्रीडिंग के दौरान छेड़छाड़ से कुत्ते खूंखार हो जाते हैं। आने जाने वालों को काटने दौड़ते हैं। ऐसे में कुत्तों के झुंड से दूरी बनाने की जरूरत है। इस सीजन में कुत्तेे अधिक खूंखार होते हैं।

गर्दन से ऊ पर काटे तो सीरम भी लगवाएं

गर्दन और सिर के जितना नजदीक कुत्ता काटता है वह उतना ही अधिक जानलेवा होता है। यह पीड़ित की सेहत के लिए खतरनाक होता है। ऐसी स्थिति में मरीज को एंटी रैबीज के साथ एंटी सिरम की भी एक डोज लगवानी चाहिए, जो बेहद जरूरी है। डॉक्टरों के मुताबिक एंटी सिरम की डोज मरीज के वजन के हिसाब से तय की जाती है।
रैबीज कुत्ते के लक्षण
– लार का अधिक टपकना
– कुत्ते का अकेले रहना
– अंधेरे वाले जगहों पर रहना
– इरीटेशन अधिक होना
– लगातार दौड़ना
– पानी पीना बंद कर देना
रैबीज के दो फार्म
मुरादाबाद। रैबीज प्रभावित कुत्तों के दो फार्म होते हैं। एक डंप फार्म होता है। इसमें कुत्ता सुस्त रहता है। जबकि दूसरा फ्यूरियस फार्म होता है। इसमें कुत्ता दूर तक दौड़ता है। इस दौरान रास्ते में जो भी मिलता या टकराता है उसे काटता जाता है।

पोस्ट बाइट वैक्सीनेशन का डोज
पोस्ट बाइट वैक्सीनेशन के पांच डोज होेते हैं। पहले जीरो दिन पर लगता है। यानी काटने के चौबीस घंटे भीतर। इसके बाद 03, 07, 14 और 28 दिन पर डोज लगाई जाती है। वहीं नब्बे दिन पर वैकल्पिक डोज लगती है।
घिर जाएं तो कुत्तों का ध्यान बांटे
अगर आप कुत्तों के झुंड से गिर गए हैं तो ऐसी स्थिति में उनका ध्यान बांटने की कोशिश करें। मसलन अगर आपके पास खाने की कोई चीज हो तो उसे दूर फेंक दें। या फिर कोई और सामान हो तो उसे इधर-उधर फेंक कर ध्यान बांटने की कोशिश करें।
कुत्ता काटे तो क्या करें
– पानी और साबुन से घाव को खूब धोएं
– कोई एंटीसेप्टिक या अलकोहल लगाएं
– एंटी रैबीज वैक्सीन लगाएं
– बिना किसी देरी के अस्पताल पहुंचे
क्या न करें
– घाव को ढकें नहीं
– हल्दी, बाम, चूना, मिर्च, जड़ी बूटी न लगाएं
– घाव को जलाएं या दागे नहीं
– झाड़ फूंक के चक्कर में न पड़े