मुर्दाघर के फ्रीजर में 7 घंटे बाद जिंदा मिला मृत व्यक्ति : डॉक्टरों ने तो सोच ली थी लेने की जान, भगवान ने बचा लिए प्राण, पढ़िये पूरी खबर

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मुरादाबाद : भगवान की मर्जी के बिना एक पत्ता भी हिल नहीं सकता है। नगर निगम कर्मचारी श्रीकेश के साथ भी ऐसा ही मामला हुआ। हादसे में घायल होने के बाद डाक्टरों द्वारा मृत घोषित करने के बाद भी उनकी सांस चलती रही। हैरत के साथ स्वजन की आस भी बंधी है। मेरठ मेडिकल कालेज के न्यूरो सर्जरी विभाग में भर्ती श्रीकेश के साथ दीक्षा लगातार रह रही हैं और एक मिनट के लिए भी उन्हें अकेला नहीं छोड़ा है।

हर समय बस भगवान से यही प्रार्थना है कि जब सांसें लौटाई हैं तो आंखें भी खोल दे। देखभाल के लिए श्रीकेश के बहनोई बिसौंदी लाल, साला दीपक, छोटा भाई सत्यानंद गौतम जुटे हैं। अभी तक दो यूनिट खून चढ़ाया जा चुका है। न्यूरोसर्जन डा. मनीष भी स्थिति स्थिर होने का इंतजार कर रहे हैं। इसके बाद आपरेशन किया जाना है। अस्पताल में भी हर कोई घटना को सुनने के बाद हैरान है कि भगवान की मर्जी के बिना कुछ नहीं हो सकता है। सत्यानंद गौतम ने बताया कि मेडिकल कालेज में उपचार मिल रहा है। शरीर में आक्सीजन का स्तर पूरी तरह से ठीक है और आसानी से सांस ले रहा है।

ये था घटनाक्रम

गुरुवार 18 नवंबर की शाम मुरादाबाद नगर निगम कर्मचारी श्रीकेश दूध लेने के लिए मझोला के मंडी समिति में निकले थे। रास्ते मे बाइक की टक्कर लगने से घायल हो गए, सिर में चोट आने पर स्वजन दिल्ली रोड स्थित साईं अस्पताल ले गए। वहां से ब्राइट स्टार अस्पताल, कांठ रोड के एशियन विवेकानंद अस्पताल से भी बारी-बारी मृत बताकर रेफर कर दिया गया था। यहां के डाक्टरों ने जिला अस्पताल भिजवा दिया। स्वजन उन्हें लेकर इमरजेंसी में रात तीन बजे पहुंचे थे। यहां चिकित्सा अधिकारी डा. मनोज यादव ने बिना हाथ लगाए ही उन्हें मृत घोषित कर शवगृह भिजवा दिया था। सुबह साढ़े 10 बजे तक ठंड में शवगृह की स्लैब पर ही पड़े रहे थे। अब उनका इलाज मेरठ मेडिकल कालेज में हो रहा है।