January 12, 2026 3:39 am

उत्तराखंड सरकार ने 7 महीने में इन 3 मामलों मे की CBI जांच की सिफारिश…

देहरादून: उत्तराखंड में अंकित भंडारी हत्याकांड मामले को लेकर राजनीतिक सियासत जारी है. इस मामले को लेकर प्रदेश में मचे घमासान को देखते हुए राज्य सरकार ने सीबीआई जांच को मंजूरी दे दी है. हालांकि, यह कोई पहला मामला नहीं है, जब एसआईटी जांच के बाद सीबीआई जांच को मंजूरी दी गई हो, बल्कि पिछले सात महीने के भीतर एसआईटी जांच और फिर संबंधित मामले की जांच के लिए सीबीआई की संस्तुति राज्य सरकार ने दी है. पिछले एक साल के भीतर ही राज्य सरकार तीन अलग-अलग मामलों की सीबीआई जांच की सिफारिश कर चुकी है.

पहले एसआईटी फिर सीबीआई जांच: उत्तराखंड में जब भी कोई बड़ा मामला सामने आता है, उसे दौरान राज्य सरकार तत्काल जांच के लिए एसआईटी गठित कर देती है. ताकि पूरे मामले पर बेहतर ढंग से जांच हो सके. उत्तराखंड राज्य में पिछले सात महीने के भीतर कुछ ऐसे मामले सामने आए. जिसके चलते, राज्य सरकार को जन आक्रोश का सामना करना पड़ा. साल 2025 में उत्तराखंड सरकार की ओर से दो गंभीर मामलों पर सीबीआई जांच की संस्तुति दी गई. जिसमें एलयूसीसी कंपनी की ओर से उत्तराखंड में करीब 100 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी के मामले में राज्य सरकार ने सीबीआई जांच को मंजूरी दी थी. इसके साथ ही यूकेएसएसएससी पेपर लीक मामले में जन आक्रोश को देखते हुए राज्य सरकार ने सीबीआई जांच को मंजूरी दी थी.

अभिनेत्री उर्मिला सनावर के ऑडियो से मचा घमासान: इसी तरह अंकित भंडारी हत्याकांड से संबंधित कुछ ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद प्रदेश में पिछले 15 से 20 दिनों से घमासान मचा हुआ है. मुख्य विपक्षी पार्टी कांग्रेस के साथ ही अन्य विपक्षी दल और सामाजिक संगठन लगातार प्रदेश भर में प्रदर्शन कर रहे हैं. शुरुआती दौर में अभिनेत्री उर्मिला सनावर की ओर से ऑडियो वायरल किए जाने के बाद से ही राजनीतिक पार्टियों और तमाम संगठन के लोग सीबीआई जांच की मांग कर रहे थे. जिसको देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस बात को कहा था कि वो अंकित भंडारी के माता-पिता से मुलाकात कर उनकी मंशा को जानेंगे. इसके बाद उनके माता-पिता की मांग के आधार पर आगे का निर्णय लेंगे.

सीएम धामी ने अंकिता के माता-पिता से की मुलाकात: इसी क्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने 7 जनवरी की शाम को अंकित भंडारी के माता-पिता से मुलाकात की और उनकी मांग पत्रों पर जल्द से जल्द निर्णय लेने की बात कही. इसके बाद 9 जनवरी को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेश में मचे राजनीतिक घमासान और अंकित के माता-पिता की मांगों के आधार पर सीबीआई जांच को मंजूरी दे दी. बावजूद इसके उत्तराखंड राज्य में अंकित भंडारी मामले को लेकर राजनीतिक घमासान जारी है. हालांकि, साल 2026 में यह पहला मामला है जब राज्य सरकार ने अंकित भंडारी हत्याकांड से संबंधित महत्वपूर्ण तथ्यों की जांच के लिए सीबीआई जांच को मंजूरी दे दी है.

पेपर लीक और LUCC फाइनेंशियल फ्रॉड की CBI जांच: उत्तराखंड में पहले भी पेपर लीक के मामले सामने आ चुके हैं, लेकिन साल 2025 में पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद प्रदेश के युवाओं ने धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया था. साथ ही प्रदेश भर में जन आक्रोश शुरू हो गया. दरअसल, 21 सितम्बर को उत्तराखंड अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की ओर से स्नातक स्तरीय भर्ती परीक्षा के दौरान एक सेंटर से पेपर लीक होने का मामला सामने आया था. जिसकी जांच के लिए राज्य सरकार ने एसआईटी गठित कर दी थी. लेकिन प्रदेश के युवाओं ने इस परीक्षा को रद्द करने और सीबीआई जांच को लेकर धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया. मामले की गंभीरता और जन आक्रोश को देखते हुए सीएम धामी ने 29 सितंबर को परीक्षा को रद्द करने के साथ ही सीबीआई जांच को मंजूरी दे दी थी.

LUCC फाइनेंशियल फ्रॉड को लेकर फैला था आक्रोश: यही नहीं, उत्तराखंड में एलयूसीसी कंपनी की ओर से करीब 100 करोड़ रुपए से अधिक की ठगी का मामला सामने आया था. इस मामले के सामने आने के बाद प्रदेश की जनता में काफी अधिक आक्रोश व्याप्त हो गया. क्योंकि प्रदेश के खासकर पर्वतीय क्षेत्र में एलयूसीसी कंपनी के खिलाफ लगातार मुकदमे दर्ज हो रहे थे. लेकिन इस कंपनी के पर सिर्फ उत्तराखंड ही नहीं बल्कि कई अन्य राज्यों तक फैले हुए थे जिसके चलते प्रदेश की जनता लगातार सीबीआई जांच की मांग कर रही थी इसको लेकर हाईकोर्ट में तमाम याचिकाएं भी दायर की गई. हालांकि, शुरुआती दौर में इस पूरे मामले की जांच एसआईटी कर रही थी. लेकिन 23 जुलाई 2025 को जनता की मांग पर राज्य सरकार ने सीबीआई जांच को मंजूरी दे दी.

गणेश गोदियाल ने क्या कहा: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि विपक्ष अपना काम करता है. विपक्ष का काम है कि वो सरकार पर दबाव बनाए, और जनता के हित में काम करें. वर्तमान समय में जांच अगर सरकार को माननी पड़ रही हैं तो ये विपक्ष का दबाव है. ऐसे में उन्हें खुशी है कि वो अपने कर्तव्य को बखूबी निभा रहे हैं. साथ ही कहा कि एसआईटी ने अपराधियों और सरकार को फेवर किया है ये स्पष्ट है. लिहाजा समय आने पर एसआईटी के उन अधिकारियों पर भी कार्रवाई होगी, जिन्होंने सरकार के इशारे पर दोषियों को बचाने का काम किया है. जो जांच सीबीआई से कराए जाने की जरूरत होगी, उसे कराई जाएगी, क्योंकि सीबीआई भी इसी के लिए बनी है.

बीजेपी बोली-विपक्ष मुद्दा विहीन: बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने कहा कि विपक्ष मुद्दा विहीन हो गया है, विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं बचा है. इसके अलावा चुनावी वर्ष भी है लिहाजा, राज्य में एक ऐसी धारणा बनी हुई है कि राज्य सरकार के जांच पर अविश्वास खड़ा करें. जबकि सच्चाई ये है कि अंकित मामले के अलावा अन्य जिन मामलों में सीबीआई जांच कराई गई है. उसमें राज्य सरकार ने कठोरता के साथ एसआईटी के जरिए जांच करवाई है. जिसके चलते अपराधी सलाखों के अंदर हैं. बावजूद इसके विपक्ष नया कुतर्क देकर माहौल खराब करने का प्रयास करते हैं, जबकि मुख्यमंत्री जनभावनाओं का सम्मान करते हैं. ऐसे में सीबीआई जांच के भी नतीजे वही होंगे जो एसआईटी जांच के रिजल्ट रहे हैं.