नई दिल्ली: इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हवाई हमलों के बाद मध्य-पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज ने इसे ‘प्री-एम्प्टिव अटैक’ बताया है, जबकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘मेजर कॉम्बैट ऑपरेशंस’ की घोषणा की है। तेहरान, कोम और इस्फहान समेत कई शहरों में विस्फोटों की खबरें सामने आ रही हैं। वहीं ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल पर 30 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें दागने का दावा किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था, ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और रणनीतिक हितों पर भी पड़ सकता है।
कच्चे तेल की कीमतों में उछाल की आशंका
भारत अपनी लगभग 80–85 प्रतिशत तेल जरूरतों के लिए आयात पर निर्भर है, जिसमें खाड़ी क्षेत्र का बड़ा योगदान है। होर्मुज जलडमरूमध्य से रोजाना लाखों बैरल तेल गुजरता है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का अहम मार्ग है। यदि ईरान इस मार्ग को प्रभावित करता है तो तेल आपूर्ति बाधित हो सकती है।
विशेषज्ञों के अनुसार ब्रेंट क्रूड की कीमत पहले ही करीब 67 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच चुकी है और युद्ध बढ़ने पर इसमें और तेजी आ सकती है। इससे पेट्रोल-डीजल, एलपीजी और परिवहन लागत में वृद्धि होने की आशंका है।
ग्रामीण और मध्यम वर्ग पर बढ़ सकता है बोझ
तेल कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर महंगाई पर पड़ सकता है। खासकर ग्रामीण और मध्यम वर्ग के लिए दैनिक खर्च बढ़ सकता है। उद्योग, एयरलाइंस और आम उपभोक्ता भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।
शेयर बाजार और व्यापार पर असर
तनाव बढ़ने से भारतीय शेयर बाजार में भी दबाव देखने को मिल सकता है। BSE Sensex और Nifty 50 में गिरावट की आशंका जताई जा रही है, क्योंकि वैश्विक अनिश्चितता के समय निवेशक सतर्क हो जाते हैं।
साथ ही लाल सागर और होर्मुज के समुद्री मार्गों में बाधा आने पर जहाजों को लंबे रास्ते से गुजरना पड़ सकता है, जिससे शिपिंग लागत बढ़ेगी। इसका असर भारत के निर्यात—जैसे बासमती चावल, दवाइयां और कपड़ा—पर भी पड़ सकता है।
भारत ने जारी की एडवायजरी
भारत और इजरायल के बीच मजबूत रक्षा और तकनीकी संबंध हैं। भारत सरकार ने इजरायल में रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए एडवायजरी जारी कर अत्यधिक सावधानी और सतर्कता बरतने की सलाह दी है।
विशेषज्ञों का कहना है कि खाड़ी देशों में काम कर रहे लाखों भारतीयों की सुरक्षा पर भी नजर रखी जा रही है। यदि हालात बिगड़ते हैं तो भारतीयों को सुरक्षित वापस लाने के लिए विशेष अभियान भी चलाया जा सकता है।