September 18, 2026 7:20 pm

दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनेगा उत्तराखंड, एमएसपी पर खरीद का प्रस्ताव केंद्र को भेजेगी सरकार

देहरादून। उत्तराखंड में दलहन उत्पादन बढ़ाने और किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार ने कदम तेज कर दिए हैं। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता से जुड़ी केंद्र सरकार की परियोजना की समीक्षा करते हुए प्रदेश में उत्पादित दलहन की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद के लिए प्रस्ताव तैयार कर केंद्र सरकार को भेजने के निर्देश दिए हैं।

सचिवालय में आयोजित बैठक में मुख्य सचिव ने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य और सुनिश्चित बाजार उपलब्ध कराने के लिए प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाए। उन्होंने नैफेड और एनसीडीसी के माध्यम से दलहन की एमएसपी पर खरीद की व्यवस्था के लिए केंद्र से अनुमोदन लेने के निर्देश दिए।

किसान उत्पादक संगठनों को मिलेगा प्रोत्साहन

मुख्य सचिव ने किसान उत्पादक संगठनों को बढ़ावा देने के लिए विशेष प्रकोष्ठ गठित करने और इसका प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संगठित किसान समूहों के माध्यम से उत्पादन, प्रसंस्करण, विपणन और मूल्य संवर्धन को बढ़ावा दिया जा सकता है।

उन्होंने दलहन की उत्पादकता और गुणवत्ता को बढ़ाकर 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक ले जाने के लिए प्रभावी प्रयास करने को कहा। इसके लिए उन्नत बीज, बेहतर कृषि तकनीक, फसल प्रदर्शन और किसानों को तकनीकी मार्गदर्शन उपलब्ध कराने पर जोर दिया।

2030-31 तक चलेगी परियोजना

अधिकारियों ने बताया कि केंद्र सरकार की दलहन उत्पादन संबंधी परियोजना वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक संचालित होगी। इसके तहत प्रदेश में उड़द, अरहर और मसूर को प्रमुख फसलों के रूप में चयनित किया गया है। परियोजना के माध्यम से बीज उत्पादन, फसल प्रदर्शन, गुणवत्तापूर्ण बीज और उन्नत कृषि तकनीकों को बढ़ावा दिया जाएगा।

प्रदेश में दलहन प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना की दिशा में भी कार्य किया जाएगा। इससे स्थानीय स्तर पर मूल्य संवर्धन और किसानों की आय बढ़ाने के अवसर उपलब्ध हो सकेंगे।

मुख्य सचिव ने कहा कि दलहन उत्पादन और गुणवत्ता बढ़ने से प्रदेश में प्रोटीन की उपलब्धता भी बढ़ेगी। उन्होंने अधिकारियों को केंद्र सरकार की परियोजना का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

बैठक में अपर सचिव मेहरबान सिंह बिष्ट, महानिदेशक कृषि एवं उद्यान आनंद श्रीवास्तव, विवेकानंद पर्वतीय कृषि अनुसंधान संस्थान के निदेशक लक्ष्मीकांत, पंतनगर विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. एसके कश्यप सहित संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।