January 28, 2026 3:25 pm

उत्तराखंड में 13.74 लाख में बिका VIP नंबर 0001, देहरादून के वकील ने खरीदा

देहरादून: वीआईपी नंबर लेना दून वासियों के लिए स्टेटस सिंबल बन चुका है. वीआईपी नंबर की चाह में दूनवासी लाखों रुपए खर्च करने से भी पीछे नहीं हट रहे. यही वजह है कि परिवहन विभाग के अनोखे नंबरों के लिए ऑनलाइन बोली में 0001 नंबर के लिए इस बार अधिवक्ता आलोक पुंडीर के UK 07 HJ 0001 सीरीज 13 लाख 74 हजार रुपए की बोली लगाकर हासिल किया.

इससे पहले देहरादून में ऑल टाइम सबसे ऊंची बोली यूके 07 एचसी सीरीज के लिए 0001 नंबर की 13 लाख 77 हजार रुपए की लग चुकी थी. इस लिहाज से फैंसी नंबर 0001 की यह बोली इतिहास में दूसरे स्थान पर दर्ज हो गई है. देहरादून निवासी अधिवक्ता आलोक पुंडीर ने 13 लाख 74 हजार रुपए में फैंसी नंबर UK 07 HJ 0001 अपनी नई मर्सिडीज़ GLS कार के लिए प्राप्त किया. फैंसी नंबरों के प्रति बढ़ते क्रेज और ऊंची बोली ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि देहरादून में विशेष नंबरों को लेकर लोगों मे खासा आकर्षण बना हुआ है.

जानिए किस नंबर के लिए कितनी बोली लगी:

  • UK 07 HJ 0003 सीरीज की नीलामी 4 लाख 87 हजार रुपए.
  • UK 07 HJ 0007 सीरीज की नीलामी 3 लाख 66 हजार रुपए.
  • UK 07 HJ 0005 सीरीज की नीलामी एक लाख 32 हजार रुपए.
  • UK 07 HJ 0009 सीरीज की नीलामी एक लाख 60 हजार रुपए.
  • UK 07 HJ 0006 सीरीज की नीलामी एक लाख 78 हजार रुपए.
  • UK 07 HJ 7000 सीरीज की नीलामी एक लाख 51 हजार रुपए.
  • UK 07 HJ 7777 सीरीज की नीलामी एक लाख 80 हजार रुपए में हुई है.

जानिए कैसे मिलता है 0001: अगर आप 0001 नंबर लेना चाहते हैं तो इसकी न्यूनतम कीमत एक लाख रुपए है, यानी आपको यह धनराशि पहले जमा करानी होगी. उसके बाद आप आनलाइन बोली में शामिल हो सकते हैं. 0001 और 0786 नंबर ऐसे हैं, जिनकी न्यूनतम कीमत एक लाख रुपए है, जबकि बाकी नंबरों की न्यूनतम कीमत 25 हजार और 10 हजार रुपए है.

दून में गाड़ी पर 0786 नंबर लेने का क्रेज अब खत्म होता जा रहा है. इसकी न्यूनतम कीमत भी एक लाख रुपये है, लेकिन 0001 की तरह इसका क्रेज नहीं दिख रहा. स्थिति यह है कि इस बार बोली में इस नंबर पर किसी ने भी दांव नहीं लगाया गया है.

देहरादून आरटीओ संदीप सैनी ने बताया है कि UK 07 HJ सीरीज कुल 23 नंबरों की ऑनलाइन बोली लगाई गई. UK 07 HJ 0001 नंबर की ऑनलाइन बोली 13 लाख 74 हजार में शहर के अधिवक्ता ने लगाई थी, जिसके बाद उनकी गाड़ी के लिए वीआईपी नंबर मिल गया है.