देहरादून: केंद्रीय बजट 2026 में इस बार छोटे किसानों के अलावा ऐसे प्रोडक्ट और गतिविधियों पर भी फोकस किया गया है, जो सीधे तौर पर उत्तराखंड से जुड़ी हुई दिखाई देती है. इसमें से एक आयुर्वेद भी है. इसके अलावा हेंप और हर्ब्स को भी इसमें जोड़ने से छोटे किसानों को बड़ा लाभ हो सकता है. इस तरह उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्र के किसानों के लिए देखा जाए तो यह बजट कई मायनों में काफी खास है.
केंद्रीय बजट में हर बार किसानों के लिए कुछ न कुछ प्रावधान जरूर किए जाते हैं, लेकिन इस बार खास तौर पर ऐसे उत्पादों और गतिविधियों पर जोर दिया गया है, जो सीधे तौर पर उत्तराखंड के छोटे और सीमांत किसानों के लिए कारगर साबित हो सकते हैं. पर्वतीय राज्य होने के कारण यहां खेती करना अपने आप में एक चुनौती है.
असिंचित भूमि, छोटे-छोटे खेत, कठिन भौगोलिक परिस्थितियां और सीमित संसाधन किसानों की आय को सीमित कर देते हैं. ऐसे में बजट में आयुर्वेद, हर्ब्स, ड्राई फ्रूट्स, आधुनिक बागवानी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल और हेंप जैसे सेक्टरों का जिक्र उत्तराखंड के लिए बेहद अहम माना जा रहा है.
आयुर्वेद और आयुष उत्तराखंड की ताकत: उत्तराखंड पहले से ही आयुर्वेद और आयुष के क्षेत्र में देश में एक प्रमुख केंद्र के रूप में उभर चुका है. राज्य में कई आयुर्वेदिक संस्थान, रिसर्च सेंटर पहले से काम कर रही हैं. केंद्रीय बजट में आयुर्वेद को लेकर फोकस आने से न सिर्फ इस सेक्टर से जुड़े लोगों को फायदा होगा, बल्कि छोटे किसानों के लिए भी यह एक बड़ी खुशखबरी है.
आयुर्वेदिक दवाओं में इस्तेमाल होने वाली जड़ी-बूटियां जैसे अश्वगंधा, गिलोय, तुलसी, कालमेघ, सर्पगंधा, जटामांसी, कुटकी और अतीस जैसी फसलें कम जमीन में भी उगाई जा सकती हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर उत्तराखंड इन फसलों को योजनाबद्ध तरीके से खेती से जोड़ता है तो छोटे किसान भी अच्छी आमदनी कर सकते हैं.
इसी कड़ी में मोदी सरकार की ओर से तीन बड़े आयुर्वेद संस्थान स्थापित करने की घोषणा को भी बड़ी संभावना के रूप में देखा जा रहा है. यदि इनमें से एक संस्थान उत्तराखंड में स्थापित होता है तो यह राज्य के लिए बड़ा लाभ साबित हो सकता है. इससे रिसर्च, ट्रेनिंग और प्रोसेसिंग को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की उपज को सीधे बाजार से जोड़ने का रास्ता खुलेगा. हर्ब्स की खेती कम जमीन में ज्यादा मुनाफा देने वाला साबित हो सकता है.
“अगर केंद्र की योजनाओं को खेती से जोड़ते हुए सही तरीके से लागू किया जाता है तो उत्तराखंड में छोटे किसान कम जमीन पर भी हर्ब्स की खेती कर अच्छी आमदनी कर सकते हैं. पहले से ही कई किसान औषधीय पौधों पर काम कर रहे हैं, लेकिन अब बजट में मिले फोकस के बाद यह क्षेत्र और मजबूत हो सकता है.“- हेमंत कुरीच, एक्सपर्ट
हर्ब्स यानी जड़ी बूटी की वैश्विक मांग लगातार बढ़ रही है. कोरोना के बाद से लोग प्राकृतिक और आयुर्वेदिक उत्पादों की ओर ज्यादा झुकाव दिखा रहे हैं. ऐसे में उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों चमोली, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, बागेश्वर, रुद्रप्रयाग और उत्तरकाशी में हर्बल खेती के जरिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी जा सकती है.
ड्राई फ्रूट्स और बागवानी में नई संभावनाएं: बजट में बादाम, अखरोट, काजू और अन्य मेवों जैसे ड्राई फ्रूट्स का भी जिक्र किया गया है. उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में अखरोट का उत्पादन पहले से होता है, हालांकि अभी इसकी गुणवत्ता एवं प्रोसेसिंग पर ज्यादा ध्यान नहीं दिया गया है. यदि ड्राई फ्रूट्स को केंद्र की प्राथमिकता में शामिल किया गया है तो इससे उत्तराखंड के छोटे किसान इस क्षेत्र में बेहतर तकनीक और प्रशिक्षण के साथ आगे बढ़ सकते हैं.
बागवानी के क्षेत्र में सेब के अलावा कीवी, ड्रैगन फ्रूट और अन्य फलों की खेती पर भी ध्यान दिया जा रहा है. आधुनिक तकनीक, बेहतर पौध, सिंचाई और मार्केटिंग व्यवस्था के जरिए बागवानी में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है. इससे पहाड़ी क्षेत्रों में नकदी फसलों का दायरा बढ़ेगा और किसानों की आय में इजाफा होगा.
खेती में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की एंट्री: किसानों के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल्स के विस्तार का जिक्र भी इस बजट में किया गया है. यह पहल खास तौर पर युवाओं को खेती-किसानी से जोड़ने के लिए अहम मानी जा रही है. एआई (AI) के जरिए मौसम की जानकारी, फसल की सेहत, कीट नियंत्रण और बाजार भाव जैसी जानकारियां आसानी से मिल सकती हैं. इससे छोटे किसान भी वैज्ञानिक तरीके से खेती कर अपनी उपज और आमदनी दोनों बढ़ा सकते हैं.
हेंप उत्तराखंड के लिए बड़ा अवसर: इस बजट में पहली बार हेंप फैब्रिक का जिक्र आना उत्तराखंड के लिए एक बड़े मौके के रूप में देखा जा रहा है. उत्तराखंड सरकार 2017 से ही हेंप को लेकर नीति बनाने का काम कर रही है. हेंप मूल रूप से भांग की खेती से जुड़ा है, लेकिन इसके रेशे से तैयार होने वाला फैब्रिक बहुत उच्च गुणवत्ता का होता है. यह कपास से ज्यादा सॉफ्ट, टिकाऊ और पर्यावरण के अनुकूल माना जाता है.
“बजट में हेंप यानी भांग को जगह मिलना उत्तराखंड के लिए शुभ संकेत है. हेंप फैब्रिक की मांग देश ही नहीं बल्कि, पूरी दुनिया में है और यह बहुत महंगा बिकता है. अगर उत्तराखंड में इसकी खेती और प्रोसेसिंग यूनिट्स विकसित होती हैं तो छोटे किसानों को एक हाई-वैल्यू क्रॉप का विकल्प मिलेगा, जिससे उनकी आमदनी में बड़ा उछाल आ सकता है.“- हेमंत कुरीच, एक्सपर्ट
छोटे किसानों के लिए क्यों खास है यह बजट? उत्तराखंड के ज्यादातर किसान छोटे और सीमांत हैं. उनके पास सीमित जमीन है और संसाधन भी कम हैं. बजट में जिन सेक्टरों आयुर्वेद, हर्ब्स, ड्राई फ्रूट्स, बागवानी, AI और हेंप पर फोकस किया गया है, वे सभी ऐसे हैं, जिनमें कम जमीन में भी अच्छी कमाई की जा सकती है. यही मॉडल पहाड़ी खेती के लिए सबसे ज्यादा उपयुक्त माना जाता है.
केंद्रीय बजट में इस बार जिन उत्पादों और गतिविधियों को प्राथमिकता दी गई है, वे उत्तराखंड के छोटे किसानों के लिए नई उम्मीद बनकर सामने आए हैं. आयुर्वेद, हर्ब्स, ड्राई फ्रूट्स, आधुनिक बागवानी, AI टूल्स और हेंप जैसे सेक्टर राज्य की भौगोलिक और सामाजिक परिस्थितियों के अनुरूप हैं. अगर इन घोषणाओं को सही नीति और जमीन पर ठोस क्रियान्वयन के साथ लागू किया गया तो उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में खेती एक बार फिर सम्मानजनक आय और रोजगार का मजबूत आधार बन सकती है.
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