February 3, 2026 6:14 am

विजन डॉक्यूमेंट से विकास की दिशा तय करेगा उत्तराखंड, जिला और पंचायत स्तर पर बनेगा 2047 का रोडमैप

देहरादून: मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने जनपदवार विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए राज्य, जिला और पंचायत स्तर पर विजन डॉक्यूमेंट 2047 तैयार करने के निर्देश दिए. उन्होंने कहा कि इसके लिए शीघ्र वर्कशॉप आयोजित कर विकास की दीर्घकालिक दिशा तय की जाए. जिला योजना समितियों की बैठकें मार्च तक अनिवार्य रूप से कराने और योजनाओं के एस्टीमेट पहले से तैयार रखने पर जोर दिया गया. आमजन की समस्याओं के समाधान हेतु जिला योजना की गाइडलाइंस में आवश्यक सुधार के संकेत भी दिए गए.

मुख्य सचिव ने विकास कार्यों की समीक्षा बैठक ली: मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने सोमवार को सचिवालय स्थित वीर चंद्र सिंह गढ़वाली सभागार में विकास कार्यों की जनपदवार समीक्षा करते हुए राज्य के दीर्घकालिक विकास को लेकर अहम दिशा-निर्देश दिए. उन्होंने राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय विजन डॉक्यूमेंट 2047 की तर्ज पर सभी जिलाधिकारियों को जिला, खंड और पंचायत स्तर पर भी विजन डॉक्यूमेंट तैयार करने के निर्देश दिए. मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि विकास की ठोस और दूरदर्शी योजना तभी संभव है, जब जमीनी स्तर तक भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए रोडमैप तैयार किया जाए.

मुख्य सचिव ने कहा कि पंचायत, खंड और जनपद स्तर के विजन डॉक्यूमेंट शीघ्र तैयार किए जाएं और इसके लिए आवश्यक वर्कशॉप का आयोजन भी जल्द किया जाए. इन वर्कशॉप्स के माध्यम से स्थानीय जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और हितधारकों को विकास की प्राथमिकताओं से जोड़ा जाएगा, ताकि योजनाएं कागजों तक सीमित न रहें बल्कि धरातल पर प्रभावी ढंग से लागू हों.

जिला योजना पर समयबद्ध तैयारी के निर्देश: बैठक में मुख्य सचिव ने जिला योजना को विकास की रीढ़ बताते हुए निर्देश दिए कि जिला योजना समितियों की बैठकें मार्च माह तक अनिवार्य रूप से आयोजित कर ली जाएं. उन्होंने कहा कि इसके लिए अभी से होमवर्क शुरू किया जाए, ताकि योजनाओं को समय से स्वीकृति और क्रियान्वयन मिल सके. जिला योजना में शामिल किए जाने वाले संभावित कार्यों से जुड़ी सभी औपचारिकताओं को पूरा करते हुए उनके एस्टीमेट पहले से तैयार कराए जाएं, जिससे वित्तीय और प्रशासनिक अड़चनें न आएं.

मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि आमजन की समस्याओं के समाधान के लिए यदि जिला योजना की गाइडलाइंस और नियमों में सुधार की आवश्यकता हो, तो उसमें बदलाव किए जाएं. उद्देश्य यह होना चाहिए कि जिला योजना स्थानीय जरूरतों के अनुरूप अधिक लचीली और प्रभावी बने.

खरीद प्रक्रिया में विकेंद्रीकरण पर जोर: मुख्य सचिव ने उद्यान, कृषि और पशुपालन विभाग को जनपद स्तर पर खरीद के लिए अधिक अधिकार देने की बात कही. उन्होंने कहा कि मूल्य निर्धारण की प्रक्रिया को अधिक व्यावहारिक बनाया जाए और एक वर्ष के बजाय दो से तीन वर्षों के लिए मूल्य तय करने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया जा सकता है. इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में स्थिरता आएगी और समय की बचत होगी.

जन-जन की सरकार और आजीविका योजनाओं पर फोकस: मुख्य सचिव ने कहा कि जन-जन की सरकार कार्यक्रम के तहत प्राप्त शिकायतों और सुझावों के निस्तारण के लिए भी योजनाएं तैयार की जाएं और उनकी प्रकृति के अनुसार उन्हें जिला या राज्य योजना में शामिल किया जाए. उन्होंने राज्य सेक्टर, डीएपी, सीसीएस जैसी योजनाओं की मासिक समीक्षा बैठकें अनिवार्य रूप से आयोजित करने के निर्देश दिए.

आजीविका से जुड़ी योजनाओं को लेकर मुख्य सचिव ने गंभीरता से लेने पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि इन योजनाओं की जनपद स्तर पर मासिक समीक्षा की जाए और त्रैमासिक रूप से राज्य स्तर पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक आयोजित की जाएगी, ताकि रोजगार और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो सके.

महिला विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं पर विशेष ध्यान: मुख्य सचिव ने राजकीय महिला विद्यालयों को 8 मार्च 2026 तक टॉयलेट निर्माण के मामले में पूरी तरह सैचुरेट किए जाने के निर्देश दोहराए. साथ ही उन्होंने टॉयलेट्स की नियमित सफाई और रखरखाव के लिए ठोस और स्थायी योजना तैयार करने पर भी बल दिया.