देहरादून: कौशल विकास के तहत अब तक किए गए कामों की प्रगति और स्किल प्राप्त युवाओं को फॉरवर्ड लिंकेज से जोड़ने को लेकर सीएम धामी ने बुधवार को उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की. बैठक के दौरान चर्चा की गई कि राज्य में आईटीआई एवं तकनीकी संस्थानों और प्रशिक्षित युवाओं की संख्या बढ़ने के बाद भी उद्योगों में उनकी प्लेसमेंट और संतोषजनक वेतन क्यों नहीं मिल पा रहा है. जिस पर सीएम ने इसे प्रबंधन, समन्वय और प्लेटफार्म स्तर पर कमी का संकेत बताते हुए तत्काल सुधार के निर्देश दिए.
बैठक के दौरान सीएम ने कहा कि एक ओर नाई, प्लंबर, इलेक्ट्रीशियन, मिस्त्री, कारपेंटर जैसे दैनिक कामों के लिए कुशल श्रमिक आसानी से उपलब्ध नहीं हो पाते हैं. वहीं, दूसरी ओर अनेक युवा जो आईटीआई से तकनीकी शिक्षा प्राप्त कर चुके हैं वे रोजगार की आकांक्षा में रहते हैं. उन्होंने तकनीकी, शिक्षा, कौशल और अन्य संबंधित विभागों के बेहतर समन्वय से इस विरोधाभास को दूर करने की जरूरत है.
सीएम ने निर्देश दिए कि केवल स्मार्ट इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं बल्कि स्मार्ट मानव संसाधन तैयार करना प्राथमिकता होगी. उद्योगों और भविष्य की तकनीकी मांग के अनुसार रोजगार उत्पन्न करने वाले पाठ्यक्रम, प्रशिक्षित ट्रेनर-शिक्षक और आईटीआई जैसे तकनीकी संस्थानों को अपग्रेड करें. स्थानीय स्तर पर दैनिक कामों के लिए बेसिक स्किल वर्कर, मीडियम तकनीक की वर्कफोर्स और उच्च कुशल तकनीकी वर्कफोर्स तैयार करने का समेकित मॉडल विकसित किया जाए, जिससे विकसित भारत @2047 के संकल्प को साकार करने में बल मिले.
सीएम ने निर्देश दिए गए कि प्रशिक्षण के लिए चयन होते ही युवाओं को रोजगार प्रदाता संस्थानों से टैग किया जाए. जिससे ट्रेनिंग के दौरान ही जॉब सिक्योरिटी सुनिश्चित हो. तकनीकी पाठ्यक्रमों को समय के अनुसार रिवाइज करने एवं 6 माह, मध्य अवधि और दीर्घकालिक तीनों स्तरों पर आउटकम आये. विदेशों में स्वरोजगार/रोजगार के अवसरों के लिए चयनित किए जाने वाले युवाओं को भारत सरकार की तमाम देशों के अनुसार प्रबंधन के संबंध में गाइडलाइंस साझा की जाये. सरकारी भर्ती प्रक्रियाओं में पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करने और न्यायालय में लंबित प्रकरणों के प्रभावी निस्तारण के निर्देश दिए, ताकि भर्ती परिणाम बेवजह लंबित न रहे.
बैठक के दौरान कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने उद्योगों को प्रशिक्षण में भागीदार बनाने का सुझाव दिया. जिससे मांग आधारित कौशल विकसित हों. उन्होंने बताया कि यदि उद्योग भी प्रशिक्षण और तकनीकी पाठ्यक्रम के निर्धारण में शामिल होंगे, तो वे उद्योगों की मांग के अनुरूप युवाओं को ट्रेंड कर पाएंगे. इससे युवाओं को नौकरी पाने के अधिक मौके मिलेंगे.