देहरादून। सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास विनोद कुमार सुमन ने सभी रेखीय विभागों को अपने आपदा प्रबंधन प्लान आपदा प्रबंधन विभाग को 28 फरवरी तक भेजने के निर्देश दिए हैं। कहा कि आपदा प्रबंधन योजनाएं केवल औपचारिक दस्तावेज न रहकर विभागीय कार्यप्रणाली का अभिन्न हिस्सा बने, ताकि आपदा के समय त्वरित, समन्वित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके।
सचिव सुमन ने मंगलवार को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में सेंडाई फ्रेमवर्क के तहत कार्यों की समीक्षा बैठक ली। उन्होंने कहा कि आपदा प्रबंधन योजना में सेंडाई फ्रेमवर्क के तहत आपदा जोखिम न्यूनीकरण, तैयारी, प्रतिक्रिया और पुनर्बहाली से जुड़े लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सभी विभाग अपने दायित्वों को स्पष्ट रूप से परिभाषित करें। स्पष्ट रूप से अंकित होना चाहिए कि आपदा से पहले, आपदा के दौरान और आपदा के बाद विभाग की भूमिका क्या होगी। कहा कि प्रत्येक विभाग वार्षिक प्रशिक्षण कैलेंडर तैयार करे, जिसमें यह स्पष्ट रूप से दर्शाया जाए कि किस माह में कौन-सा प्रशिक्षण, अभ्यास या जागरूकता कार्यक्रम आयोजित होगा।
योजना से विभागीय संसाधनों का बेहतर उपयोग
बैठक में विभागों की ओर से आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई के लिए योजना, संकट के समय निर्णय एवं समन्वय की प्रक्रिया आदि की जानकारी दी गई। सचिव सुमन ने बताया कि योजना के माध्यम से विभागीय संसाधनों का बेहतर उपयोग किया जा सकता है। बैठक में स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने स्कूल आपदा प्रबंधन और हॉस्पिटल आपदा प्रबंधन प्लान के संबंध में भी जानकारी दी। बैठक में यूएसडीएमए के वित्त नियंत्रक अभिषेक कुमार आनंद समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद थे।
विभागों को माॅक ड्रिल कराने के निर्देश
सचिव आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास सुमन ने निर्देश दिए कि सभी विभाग नियमित रूप से आपदा के दौरान अपने-अपने विभाग से संबंधित कार्यों को लेकर मॉक अभ्यास आयोजित करें। जिससे आपदा के समय विभागीय मानव संसाधन, उपकरणों, संचार व्यवस्था एवं समन्वय क्षमता का वास्तविक परीक्षण हो सके।