March 24, 2026 3:06 pm

धामी कैबिनेट में विभागों का बंटवारा, नए मंत्रियों को मिली बड़ी जिम्मेदारियां

देहरादून: उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व वाली सरकार में कैबिनेट विस्तार के बाद नए मंत्रियों के बीच विभागों का बंटवारा कर दिया गया है। हाल ही में पांच विधायकों को मंत्री पद की शपथ दिलाए जाने के बाद शासन ने विभागों का आवंटन जारी किया। इस व्यवस्था में कई अहम और संवेदनशील विभाग मुख्यमंत्री ने अपने पास ही रखे हैं।

जारी सूची के अनुसार मुख्यमंत्री सामान्य प्रशासन, गृह, कार्मिक, सतर्कता, नियुक्ति एवं प्रशिक्षण तथा सूचना एवं जनसंपर्क जैसे प्रमुख विभाग स्वयं देखेंगे। इन विभागों को शासन संचालन की रीढ़ माना जाता है, जिनके माध्यम से प्रशासनिक निर्णय और कानून व्यवस्था पर सीधा नियंत्रण रहता है।

विभागों के नए बंटवारे के तहत कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल को स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।

इन मंत्रियों को मिले विभाग

कैबिनेट विस्तार के बाद मंत्रियों को इस प्रकार विभाग सौंपे गए हैं—

  • मंत्री खजान दास को समाज कल्याण, अल्पसंख्यक कल्याण, छात्र कल्याण और भाषा विभाग की जिम्मेदारी दी गई है।
  • मंत्री भरत सिंह चौधरी को ग्राम्य विकास तथा लघु, सूक्ष्म और मध्यम उद्यम विभाग सौंपा गया है।
  • मंत्री मदन कौशिक को पंचायती राज, आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास, आयुष एवं आयुष शिक्षा, पुनर्गठन और जनगणना विभाग दिए गए हैं।
  • मंत्री प्रदीप बत्रा को परिवहन विभाग के साथ सूचना प्रौद्योगिकी, सुशासन एवं विज्ञान प्रौद्योगिकी तथा जैव प्रौद्योगिकी विभाग की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
  • मंत्री राम सिंह कैड़ा को शहरी विकास, पर्यावरण संरक्षण एवं जलवायु परिवर्तन तथा जलागम प्रबंधन विभाग दिया गया है।

हाल ही में मुख्यमंत्री ने कैबिनेट का विस्तार करते हुए खजान दास, मदन कौशिक, भरत सिंह चौधरी, प्रदीप बत्रा और राम सिंह कैड़ा को मंत्री पद की जिम्मेदारी दी थी।

दरअसल, मंत्रिमंडल में लंबे समय से पांच पद रिक्त चल रहे थे। इनमें से तीन पद पहले से खाली थे, जबकि एक पद पूर्व मंत्री चंदन राम दास के निधन के बाद और एक पद प्रेम चंद अग्रवाल के इस्तीफे के बाद रिक्त हुआ था।

राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से विभागों का यह बंटवारा संतुलन साधने की कोशिश माना जा रहा है। क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन के साथ प्रशासनिक दक्षता को ध्यान में रखते हुए विभागों का पुनर्गठन किया गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि मुख्यमंत्री द्वारा प्रमुख प्रशासनिक विभाग अपने पास रखना एक रणनीतिक कदम है, जिससे शासन की मुख्य कमान सीधे उनके नियंत्रण में बनी रहेगी। वहीं अन्य विभाग मंत्रियों को सौंपकर कार्यों का प्रभावी संचालन सुनिश्चित किया गया है।