देहरादून। नेता प्रतिपक्ष Yashpal Arya ने उत्तराखंड में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के आंदोलन को सरकार की विफलता और संवेदनहीन रवैये का प्रमाण बताया है। उन्होंने कहा कि जिन महिलाओं के कंधों पर मातृ-शिशु स्वास्थ्य, पोषण और समाज के सबसे कमजोर वर्गों की जिम्मेदारी है, आज वही अपने हक के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर हैं।
उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ता वर्षों से सीमित संसाधनों में सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतार रही हैं, लेकिन उन्हें समय पर मानदेय तक नहीं मिल रहा। गर्भवती महिलाओं की देखभाल, बच्चों के पोषण, टीकाकरण जागरूकता, कुपोषण उन्मूलन और सैनिटरी नेपकिन वितरण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों के बावजूद सरकार उनकी समस्याओं की अनदेखी कर रही है।
यशपाल आर्य ने आरोप लगाया कि महीनों से मानदेय लंबित है, दो वर्षों से भवन किराया नहीं दिया गया, कोविड काल में घोषित पारितोषिक अधूरा छोड़ दिया गया और शासनादेश के बावजूद धरना अवधि का भुगतान नहीं हुआ। कुक्ड फूड और टीएचआर की राशि भी महीनों से अटकी हुई है, जबकि ढुलान और अन्य व्यवस्थाओं के लिए कोई ठोस प्रावधान नहीं किया गया।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि महिलाओं के सम्मान और सशक्तिकरण की बात करने वाली सरकार उन्हीं महिलाओं का शोषण कर रही है, जो समाज की नींव मजबूत करने में लगी हैं। उन्होंने सरकार से सभी लंबित भुगतानों को तत्काल जारी करने, पोषण योजनाओं के लिए नियमित फंडिंग सुनिश्चित करने और कार्यकर्ताओं पर डाला गया आर्थिक बोझ खत्म करने की मांग की।
उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला तो आंदोलन पूरे प्रदेश में और व्यापक होगा। साथ ही कहा कि विपक्ष इस मुद्दे को विधानसभा से लेकर सड़क तक मजबूती से उठाएगा और आंगनबाड़ी बहनों के संघर्ष में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा रहेगा।