June 7, 2026 7:58 pm

किसाऊ बांध परियोजना को मिलेगी रफ्तार, अमित शाह करेंगे हाई लेवल समीक्षा बैठक, मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन समेत छह राज्यों के अधिकारी होंगे शामिल

देहरादून: उत्तराखंड की बहुप्रतीक्षित किसाऊ बांध परियोजना को अब जल्द नई गति मिलने की उम्मीद है। केंद्रीय गृह मंत्रालय पिछले करीब छह माह से इस महत्वाकांक्षी परियोजना की सीधे निगरानी कर रहा है। इसी क्रम में सोमवार को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह दिल्ली में परियोजना से जुड़े सभी हितधारक राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक करेंगे। इसके बाद 16 जून को गृह मंत्री मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के साथ भी इस परियोजना पर विस्तृत चर्चा करेंगे।

किसाऊ बांध परियोजना की संशोधित विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार हो चुकी है। इस परियोजना की अवधारणा वर्ष 1940 के दशक में सामने आई थी और 1996 में पहली डीपीआर बनाई गई थी, लेकिन पर्यावरणीय आपत्तियों और अन्य कारणों से यह योजना आगे नहीं बढ़ सकी। वर्ष 2008 में केंद्र सरकार ने इसे राष्ट्रीय परियोजना का दर्जा दिया, जबकि 2021 में संशोधित डीपीआर तैयार करने का निर्णय लिया गया। अब नई डीपीआर तैयार हो चुकी है, जिसके अनुसार परियोजना की अनुमानित लागत लगभग 15 हजार करोड़ रुपये होगी।

गृह मंत्रालय इस परियोजना को जल्द निर्माण चरण में लाने के लिए सक्रिय है। डीपीआर को मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजा जा चुका है, जहां पर्यावरणीय एवं अन्य आवश्यक स्वीकृतियों की प्रक्रिया जारी है।

सोमवार को होने वाली समीक्षा बैठक में उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश के वरिष्ठ अधिकारी हिस्सा लेंगे। उत्तराखंड की ओर से मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन, यूजेवीएनएल के प्रबंध निदेशक अनिल कुमार सिंह सहित कई वरिष्ठ अधिकारी बैठक में मौजूद रहेंगे।

टिहरी बांध के बाद एशिया की दूसरी सबसे बड़ी मानी जाने वाली इस बहुउद्देशीय परियोजना के पूरा होने पर 660 मेगावाट विद्युत उत्पादन होगा। इसमें उत्तराखंड को लगभग 350 मेगावाट बिजली मिलेगी। साथ ही उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली और हिमाचल प्रदेश के किसानों को सिंचाई के लिए अतिरिक्त पानी उपलब्ध होगा तथा यमुना नदी में जल उपलब्धता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

हालांकि परियोजना के सामने सबसे बड़ी चुनौती हिमाचल प्रदेश की सहमति मानी जा रही है। परियोजना से हिमाचल का बड़ा क्षेत्र जलमग्न होगा, जबकि राज्य पहले से ऊर्जा अधिशेष (सरप्लस) स्थिति में है। ऐसे में उसकी सक्रिय भागीदारी अब तक सीमित रही है। लेकिन गृह मंत्रालय द्वारा सीधे निगरानी संभालने के बाद उम्मीद जताई जा रही है कि सभी छह हितधारक राज्यों के बीच जल्द सहमति बन सकेगी और वर्षों से लंबित यह महत्वाकांक्षी परियोजना निर्माण की दिशा में आगे बढ़ेगी।