July 7, 2026 7:21 pm

उत्तराखंड: फर्जी मेडिकल सर्टिफिकेट पर नहीं होगा ट्रांसफर, शिक्षा विभाग बनाएगा विशेष मेडिकल बोर्ड

देहरादून। उत्तराखंड विद्यालयी शिक्षा विभाग ने शिक्षकों के तबादलों में फर्जी मेडिकल प्रमाणपत्रों के इस्तेमाल पर सख्ती करने का फैसला लिया है। अब मेडिकल आधार पर स्थानांतरण का लाभ लेने वाले शिक्षकों के प्रमाणपत्रों की दोबारा जांच विशेष मेडिकल बोर्ड करेगा। जांच में प्रमाणपत्र सही पाए जाने पर ही तबादले की अनुमति मिलेगी। वहीं, गंभीर बीमारी के कारण नियमित सेवाएं देने में असमर्थ शिक्षकों और कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) लेने की प्रक्रिया अपनानी होगी।

शिक्षा विभाग वार्षिक तबादला प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी में है। हाल ही में हुई उच्चस्तरीय बैठक में निर्णय लिया गया कि स्थानांतरण प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाएगा। इसके तहत शिक्षा निदेशालय में विशेष मेडिकल बोर्ड का गठन किया जाएगा, जो मेडिकल आधार पर तबादले का अनुरोध करने वाले शिक्षकों की दोबारा स्वास्थ्य जांच करेगा।

विभाग ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि कोई शिक्षक माता-पिता, सास-ससुर, पति-पत्नी या बच्चों की बीमारी का हवाला देकर तबादला चाहता है तो संबंधित परिजनों के स्वास्थ्य प्रमाणपत्रों का भी सत्यापन कराया जाएगा। राज्य स्तरीय चिकित्सा बोर्ड से जारी प्रमाणपत्रों की भी जांच होगी। यदि कोई प्रमाणपत्र फर्जी या भ्रामक पाया गया तो संबंधित शिक्षक के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में फर्जी मेडिकल प्रमाणपत्रों के आधार पर मनचाहे स्थानों पर तबादले कराने की शिकायतें मिली थीं। वहीं, कर्मचारियों से जुड़े मामलों के न्यायालय में लंबित रहने के कारण दो वर्षों से तबादले नहीं हो पाए थे। अब न्यायालय से अनुमति मिलने के बाद अनुरोध आधारित स्थानांतरण किए जा सकेंगे। विभाग ऑनलाइन ट्रांसफर व्यवस्था लागू करने की दिशा में भी काम कर रहा है।

मंत्री ने कहा कि ऐसे शिक्षक और कर्मचारी, जिनकी स्वास्थ्य स्थिति इतनी गंभीर है कि वे विद्यालय में नियमित रूप से सेवाएं नहीं दे सकते, उनके लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (वीआरएस) का विकल्प रखा गया है। साथ ही मेडिकल आधार पर तबादले के सभी मामलों की जांच विशेष मेडिकल बोर्ड द्वारा किए जाने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।