July 18, 2026 1:03 pm

देहरादून में राहुल गांधी का बदला अंदाज, शिक्षा और युवाओं के मुद्दों पर केंद्रित रहा पूरा संवाद, न बीजेपी पर हमला, न मोदी-धामी का जिक्र

देहरादून। राजधानी देहरादून के बन्नू स्कूल मैदान में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में कांग्रेस नेता एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का अलग राजनीतिक अंदाज देखने को मिला। अपने संबोधन में उन्होंने शिक्षा व्यवस्था, पेपर लीक, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और युवाओं के भविष्य को प्रमुख मुद्दा बनाया। पूरे कार्यक्रम के दौरान उन्होंने किसी राजनीतिक दल या शीर्ष नेताओं पर व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं की।

मूसलाधार बारिश के बावजूद बड़ी संख्या में छात्र, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवा और अभिभावक कार्यक्रम में पहुंचे। मंच पर पहुंचने के बाद राहुल गांधी ने पहले छात्रों की समस्याएं सुनीं और प्रतियोगी परीक्षाओं, भर्ती प्रक्रिया तथा रोजगार से जुड़े अनुभव साझा करने के लिए कई छात्रों को मंच पर आमंत्रित किया। कार्यक्रम का स्वरूप राजनीतिक सभा की बजाय संवाद कार्यक्रम जैसा दिखाई दिया।

राहुल गांधी ने कहा कि पेपर लीक जैसी घटनाएं केवल परीक्षाओं को प्रभावित नहीं करतीं, बल्कि लाखों युवाओं के विश्वास को भी तोड़ देती हैं। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता, निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया और सभी युवाओं को समान अवसर उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विभिन्न उदाहरणों के माध्यम से शिक्षा व्यवस्था में सुधार की जरूरत भी बताई।

कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने उस छात्रा के परिजनों से भी मुलाकात की, जिसने नीट परीक्षा के बाद आत्महत्या कर ली थी। उन्होंने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव और छात्रों के मानसिक तनाव के मुद्दे को भी उठाया।

राजनीतिक दृष्टि से भी यह कार्यक्रम अलग रहा। राहुल गांधी ने अपने संबोधन में न भारतीय जनता पार्टी, न प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, न केंद्रीय शिक्षा मंत्री और न ही उत्तराखंड के मुख्यमंत्री का नाम लेकर कोई टिप्पणी की। पूरा फोकस शिक्षा, युवाओं और भर्ती प्रणाली से जुड़े मुद्दों पर ही केंद्रित रहा।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कांग्रेस की नई रणनीति का संकेत हो सकता है, जिसमें युवाओं, शिक्षा, रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को केंद्र में रखकर संवाद बढ़ाने की कोशिश की जा रही है। उत्तराखंड में पिछले कुछ वर्षों के भर्ती और पेपर लीक विवादों के बीच यह मुद्दा राज्य की राजनीति में भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।