August 30, 2026 6:42 pm

ग्लेशियर झीलों की निगरानी में अत्याधुनिक तकनीक का होगा इस्तेमाल: मदन कौशिक

देहरादून। उत्तराखंड में ग्लेशियर झीलों से संभावित खतरे को देखते हुए उनकी निगरानी के लिए अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास मंत्री मदन कौशिक ने रविवार को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र पहुंचकर ग्लेशियर झीलों की स्थिति और संभावित जोखिम की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को रियल टाइम निगरानी, पूर्व चेतावनी और त्वरित कार्रवाई की व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए।

मंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को देखते हुए ग्लेशियर और ग्लेशियर झीलों में होने वाले बदलावों की वैज्ञानिक निगरानी जरूरी है। इसके लिए उपग्रह चित्रों, दूरसंवेदी तकनीक, ड्रोन और सेंसर आधारित निगरानी सहित आधुनिक तकनीकों की संभावनाओं का अध्ययन कर जरूरत के अनुसार इन्हें अपनाया जाएगा। झीलों के जलस्तर, आकार और जलभराव की स्थिति पर लगातार नजर रखने के साथ संवेदनशील क्षेत्रों में पूर्व चेतावनी प्रणाली स्थापित करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

बारिश से बनी परिस्थितियों की समीक्षा करते हुए मदन कौशिक ने सभी विभागों को चौबीसों घंटे सतर्क रहने के निर्देश दिए। उन्होंने बंद सड़कों को प्राथमिकता के आधार पर खोलने और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में पहले से जेसीबी, पोकलैंड मशीन और अन्य मशीनरी तैनात रखने को कहा। जलभराव वाले क्षेत्रों में जल निकासी, बिजली-पानी और संचार सेवाओं की तत्काल बहाली सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

मंत्री ने नदियों के जलस्तर पर चौबीसों घंटे निगरानी रखने और नदी किनारे रहने वाले लोगों को समय रहते सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने को कहा। बांध और बैराज से पानी छोड़े जाने की स्थिति में निचले क्षेत्रों के लोगों को पहले से सूचित करने के साथ जरूरत पड़ने पर सीमावर्ती राज्यों को भी अलर्ट करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि खराब मौसम या मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति में यात्रा संचालन को रोका जाए और यात्रियों को सुरक्षित स्थानों पर आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। दूरस्थ क्षेत्रों में वैकल्पिक संचार व्यवस्था तैयार रखने तथा गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, दिव्यांगजनों और गंभीर रोगियों की विशेष निगरानी के भी निर्देश दिए गए।

इसके अलावा डेंगू की रोकथाम के लिए नगर निकायों और ग्राम पंचायतों को युद्धस्तर पर अभियान चलाने को कहा गया। जलभराव वाले स्थानों पर जल निकासी, फॉगिंग और एंटी लार्वा छिड़काव के साथ अस्पतालों में जांच किट, दवाइयां, रक्त, बिस्तर और पर्याप्त चिकित्सा कर्मियों की व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।