September 27, 2026 6:35 pm

2027 से पहले भाजपा का बड़ा संगठन बदलाव मगर  नई टीम के सामने चुनावी चुनौती…

देहरादून। उत्तराखंड विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले भाजपा ने संगठन के मोर्चे पर नई टीम तैयार कर दी है। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राम माधव को उत्तराखंड का प्रदेश प्रभारी, राष्ट्रीय सचिव अरविंद मेनन और लोकसभा सांसद बांसुरी स्वराज को सह प्रभारी बनाया गया है। वहीं फणींद्रनाथ शर्मा को प्रदेश महामंत्री संगठन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नई टीम में राष्ट्रीय स्तर के अनुभव, संगठनात्मक पकड़ और युवा संसदीय चेहरे का संयोजन दिखाई दे रहा है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि चुनाव से पहले यह नई टीम संगठन और चुनावी तैयारियों को किस तरह आगे बढ़ाएगी।

भाजपा लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी के लक्ष्य के साथ संगठन को चुनावी मोड में लाने में जुटी है। नई टीम में राम माधव के पास राष्ट्रीय राजनीति और चुनावी रणनीति का लंबा अनुभव है, जबकि अरविंद मेनन और फणींद्रनाथ शर्मा संगठन के स्तर पर काम कर चुके हैं। बांसुरी स्वराज के रूप में पार्टी ने युवा संसदीय चेहरे को भी जिम्मेदारी दी है।

राम माधव पर सबसे ज्यादा नजर

नई टीम में सबसे ज्यादा चर्चा राम माधव को लेकर है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे राम माधव वर्ष 2014 में भाजपा में आए और राष्ट्रीय महासचिव की जिम्मेदारी संभाली। राजनीतिक जानकार सुनील दत्त पांडे के अनुसार, वर्ष 2014 से 2020 के बीच राष्ट्रीय महासचिव रहते हुए राम माधव ने पार्टी के विस्तार से जुड़े कई महत्वपूर्ण दायित्व संभाले। असम और पूर्वोत्तर के राज्यों के साथ जम्मू-कश्मीर की राजनीति में भी उनकी भूमिका चर्चा में रही है।

सुनील दत्त पांडे के मुताबिक, अलग-अलग राजनीतिक और भौगोलिक परिस्थितियों वाले राज्यों में संगठन के साथ काम करने का अनुभव उत्तराखंड में उनके लिए महत्वपूर्ण हो सकता है। उत्तराखंड में पहाड़ और मैदान की राजनीतिक परिस्थितियां अलग हैं और ऐसे में बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय रखना तथा स्थानीय मुद्दों को चुनावी रणनीति से जोड़ना नई टीम के सामने प्रमुख चुनौती होगी।

भाजपा नेता और दर्जाधारी मंत्री ओम प्रकाश जमदग्नि ने कहा कि राम माधव का अनुभव पार्टी के काम आएगा। उनके मुताबिक राम माधव उत्तराखंड को बारीकी से जानते हैं और उनकी ऊर्जा से पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह है। उन्होंने आगामी चुनाव में फिर सरकार बनाने की बात कही।

अरविंद मेनन संभालेंगे संगठन का मोर्चा

अरविंद मेनन को सह प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। भाजपा नेता अभिमन्यु कुमार के मुताबिक, मेनन ने सार्वजनिक जीवन की शुरुआत संघ के प्रचारक के रूप में की और बाद में मध्य प्रदेश भाजपा में संगठन महामंत्री की जिम्मेदारी संभाली। वर्ष 2011 से 2016 तक मध्य प्रदेश संगठन में काम करने के बाद उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारियां मिलीं। पश्चिम बंगाल में भी उन्होंने संगठन विस्तार से जुड़े दायित्व संभाले।

मेनन के सामने उत्तराखंड में कार्यकर्ताओं से संपर्क, संगठनात्मक गतिविधियों और बूथ स्तर की तैयारियों को मजबूत करने की जिम्मेदारी अहम मानी जा रही है। चुनाव के दौरान बूथ स्तर पर संगठन की सक्रियता को लेकर उनका अनुभव पार्टी के लिए उपयोगी हो सकता है।

बांसुरी स्वराज के जरिए युवा चेहरा

नई टीम में बांसुरी स्वराज भी प्रमुख नाम हैं। नई दिल्ली लोकसभा सीट से सांसद बांसुरी स्वराज पेशे से अधिवक्ता हैं और उच्चतम न्यायालय में वकालत का अनुभव रखती हैं। सक्रिय राजनीति में आने से पहले उन्होंने कानून के क्षेत्र में काम किया और बाद में दिल्ली भाजपा के विधि प्रकोष्ठ से जुड़ीं। वर्ष 2024 में वह लोकसभा चुनाव जीतकर संसद पहुंचीं।

बांसुरी स्वराज का उत्तराखंड से पारिवारिक संबंध भी रहा है। वरिष्ठ पत्रकार किरण कुमार के मुताबिक, उनकी मां और भाजपा की वरिष्ठ नेता रहीं सुषमा स्वराज उत्तराखंड से राज्यसभा सांसद रह चुकी थीं। ऐसे में बांसुरी स्वराज की नियुक्ति को प्रदेश में केवल संगठनात्मक जिम्मेदारी के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। संसद, कानून और सार्वजनिक संवाद का उनका अनुभव भी नई भूमिका में उपयोगी हो सकता है।

फणींद्रनाथ शर्मा के सामने संगठन मजबूत करने की जिम्मेदारी

प्रदेश प्रभारी और सह प्रभारियों के साथ फणींद्रनाथ शर्मा को प्रदेश महामंत्री संगठन की जिम्मेदारी दी गई है। भाजपा के संगठनात्मक ढांचे में यह पद महत्वपूर्ण माना जाता है। कार्यकर्ताओं के साथ समन्वय से लेकर संगठन की गतिविधियों को मंडल और बूथ स्तर तक पहुंचाने में संगठन महामंत्री की भूमिका रहती है।

शर्मा पहले भी अलग-अलग राज्यों में संगठन से जुड़े दायित्व संभाल चुके हैं। ऐसे में प्रदेश प्रभारी, सह प्रभारी और संगठन महामंत्री के बीच बेहतर तालमेल चुनाव से पहले भाजपा की तैयारियों का अहम हिस्सा रहेगा।

पुरानी टीम से कितनी अलग है नई व्यवस्था?

राजनीतिक जानकार सुनील दत्त पांडे के अनुसार, नई टीम में अलग-अलग तरह का अनुभव दिखाई देता है। राम माधव के पास राष्ट्रीय स्तर पर संगठन और चुनावी रणनीति का अनुभव है। अरविंद मेनन और फणींद्रनाथ शर्मा संगठनात्मक जिम्मेदारियों में काम कर चुके हैं, जबकि बांसुरी स्वराज संसद और कानून के क्षेत्र से राजनीति में आई हैं।

उनके मुताबिक, अब महत्वपूर्ण यह होगा कि इस अनुभव का इस्तेमाल उत्तराखंड के स्थानीय राजनीतिक समीकरणों और मुद्दों के साथ किस तरह किया जाता है। सरकार और संगठन के बीच समन्वय भी चुनावी तैयारियों में अहम भूमिका निभाएगा।

चुनाव से पहले कई चुनौतियां

नई टीम के सामने सबसे पहली चुनौती संगठन को पूरी तरह चुनावी मोड में लाने की होगी। इसके साथ ही अलग-अलग क्षेत्रों की स्थानीय समस्याओं, कार्यकर्ताओं की अपेक्षाओं और चुनावी तैयारियों को एक साथ आगे बढ़ाना होगा। राष्ट्रीय स्तर की रणनीति और उत्तराखंड के स्थानीय मुद्दों के बीच तालमेल बनाना भी टीम के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।

अब चुनाव प्रभारी के ऐलान का इंतजार

प्रदेश प्रभारी और सह प्रभारियों की नियुक्ति के बाद अब भाजपा के चुनाव प्रभारी की नियुक्ति पर नजर है। चुनाव प्रभारी की जिम्मेदारी प्रदेश प्रभारी और संगठनात्मक पदों से अलग होती है और चुनाव नजदीक आने पर पार्टी इस भूमिका के लिए अलग नेता नियुक्त कर सकती है।

फिलहाल उत्तराखंड भाजपा की नई टीम में राम माधव सबसे प्रमुख नाम हैं, लेकिन चुनावी रणनीति को संगठन के जमीनी ढांचे तक पहुंचाने में अरविंद मेनन, फणींद्रनाथ शर्मा और बांसुरी स्वराज की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी। अब देखना होगा कि नई टीम पहाड़ से मैदान तक संगठन और चुनावी तैयारियों के बीच किस तरह तालमेल स्थापित करती है।