October 12, 2026 6:24 pm

प्रधानमंत्री मोदी के 25 वर्ष के राष्ट्रसेवा कार्यकाल पर उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने पारित किया धन्यवाद प्रस्ताव

हरिद्वार। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सरकार प्रमुख के रूप में राष्ट्रसेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने पर उत्तराखंड मंत्रिमंडल ने धन्यवाद प्रस्ताव पारित किया। सोमवार को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हरिद्वार स्थित मेला नियंत्रण भवन में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में प्रधानमंत्री के सेवाकाल को सेवा, सुशासन, समर्पण और ‘राष्ट्र प्रथम’ की भावना की प्रेरणादायी यात्रा बताया गया। मंत्रिमंडल ने देश और उत्तराखंड में विकास कार्यों, जनकल्याणकारी योजनाओं तथा प्राकृतिक आपदाओं के दौरान मिले सहयोग के लिए प्रधानमंत्री के प्रति आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर प्रदेश की जनता की ओर से उन्हें बधाई और शुभकामनाएं भी दी गईं।

धन्यवाद प्रस्ताव में उल्लेख किया गया कि प्रधानमंत्री ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपनी यात्रा शुरू की थी। सरकार प्रमुख के रूप में 25 वर्षों के दौरान उन्होंने जनसेवा और राष्ट्रहित को प्राथमिकता दी। मंत्रिमंडल ने उनके अनुशासन, अथक परिश्रम और देशसेवा के प्रति समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि उनका नेतृत्व देश के लिए प्रेरणास्रोत है।

जनकल्याणकारी योजनाओं और विकास कार्यों की सराहना

मंत्रिमंडल ने प्रधानमंत्री के नेतृत्व में जनकल्याण, बुनियादी ढांचे, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और रक्षा क्षेत्र में हुए कार्यों का उल्लेख किया। प्रस्ताव में जनधन योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, आयुष्मान भारत, स्वच्छ भारत मिशन, जल जीवन मिशन और प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि जैसी योजनाओं को करोड़ों लोगों के जीवन में बदलाव लाने वाली पहल बताया गया।

प्रस्ताव के अनुसार, देश में लगभग 60 करोड़ जनधन खाते खोले गए और चार करोड़ से अधिक पक्के आवास उपलब्ध कराए गए। वर्ष 2013-14 से 2022-23 के बीच लगभग 25 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले। महिलाओं, किसानों और युवाओं के सशक्तिकरण के साथ डिजिटल इंडिया, प्रत्यक्ष लाभ अंतरण और एकीकृत भुगतान प्रणाली जैसी पहलों से नागरिक सुविधाओं को सुगम बनाने तथा शासन में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिली।

मंत्रिमंडल ने अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने, पूर्व सैनिकों के लिए एक रैंक एक पेंशन लागू करने और प्रमुख रक्षा अध्यक्ष का पद सृजित करने जैसे फैसलों का भी उल्लेख किया। चंद्रयान-3 की सफलता, स्वदेशी तकनीक को प्रोत्साहन और वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका को देश की सामर्थ्य और आत्मविश्वास का प्रतीक बताया गया। प्रस्ताव में सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत के संरक्षण तथा संवर्धन के लिए किए गए कार्यों की भी सराहना की गई।

उत्तराखंड के प्रति प्रधानमंत्री के विशेष लगाव का उल्लेख

मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड के प्रति प्रधानमंत्री के विशेष आत्मीय और आध्यात्मिक लगाव के लिए आभार जताया। प्रस्ताव में कहा गया कि प्रधानमंत्री ने प्रदेश को धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य के साथ सामरिक महत्व तथा विकास की अपार संभावनाओं वाले क्षेत्र के रूप में भी प्राथमिकता दी है। बाबा केदार की धरती से उन्होंने विश्वास व्यक्त किया था कि 21वीं सदी का तीसरा दशक उत्तराखंड का दशक होगा। केंद्र और राज्य सरकार के बेहतर समन्वय से प्रदेश में विकास कार्यों को गति मिली है।

प्रस्ताव में कहा गया कि उत्तराखंड में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान प्रधानमंत्री ने लगातार सहयोग और मार्गदर्शन दिया। नवंबर 2023 में उत्तरकाशी की सिलक्यारा सुरंग में फंसे 41 श्रमिकों को सुरक्षित निकालने के लिए चले 17 दिवसीय बचाव अभियान के दौरान प्रधानमंत्री स्थिति की जानकारी लेते रहे और संबंधित केंद्रीय एजेंसियों को आवश्यक सहायता देने के निर्देश दिए।

इसी तरह वर्ष 2024 में सहस्त्रताल और केदारनाथ यात्रा मार्ग पर आई आपदाओं के दौरान केंद्र सरकार और भारतीय वायुसेना ने बचाव कार्यों में सहयोग किया। अगस्त 2025 में उत्तरकाशी के धराली क्षेत्र में आई आपदा के समय भी प्रधानमंत्री ने तत्काल स्थिति की जानकारी लेकर हरसंभव सहायता का भरोसा दिया। मंत्रिमंडल ने इन प्रयासों को प्रदेश के प्रति उनकी संवेदनशीलता और आत्मीयता का उदाहरण बताया।

2.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं पर काम

धन्यवाद प्रस्ताव में कहा गया कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में उत्तराखंड में 2.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक की अवस्थापना परियोजनाओं पर काम हो रहा है। इनमें सड़क, रेल, रोपवे, ऊर्जा, स्वास्थ्य, उद्योग और पर्यटन से जुड़ी महत्वपूर्ण परियोजनाएं शामिल हैं।

प्रस्ताव के अनुसार, 14 अप्रैल 2026 को दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारे का लोकार्पण किया गया। लगभग 213 किलोमीटर लंबे इस गलियारे से दिल्ली और देहरादून के बीच यात्रा का समय छह घंटे से अधिक से घटकर लगभग ढाई घंटे रह गया है। इससे पर्यटन, व्यापार, उद्योग और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

लगभग 12,595 करोड़ रुपये की चारधाम महामार्ग विकास परियोजना से चारधाम यात्रा की संपर्क सुविधा बेहतर हो रही है। वहीं, 125 किलोमीटर लंबी ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना पर्वतीय क्षेत्रों तक रेल पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी गई है। लगभग 4,081 करोड़ रुपये की सोनप्रयाग-केदारनाथ रोपवे परियोजना और 2,730 करोड़ रुपये की गोविंदघाट-हेमकुंड साहिब रोपवे परियोजना को मिली स्वीकृति से भविष्य में श्रद्धालुओं की यात्रा सुगम होने की उम्मीद है। केदारनाथ पुनर्निर्माण और बदरीनाथ धाम के मास्टर प्लान के कार्यों को भी विकास और विरासत के संतुलन का उदाहरण बताया गया।

ऊर्जा, उद्योग और स्वास्थ्य सुविधाओं को मिल रही गति

मंत्रिमंडल ने जमरानी बांध, लखवाड़ और किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में केंद्र के सहयोग का उल्लेख किया। टिहरी में 1,000 मेगावाट क्षमता के पंप्ड स्टोरेज संयंत्र को ऊर्जा क्षेत्र की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया। ऊधमसिंह नगर के खुरपिया में विकसित किए जा रहे एकीकृत विनिर्माण समूह से निवेश और रोजगार की संभावनाएं बढ़ने की उम्मीद जताई गई। किच्छा में एम्स ऋषिकेश का उपकेंद्र विकसित होने से कुमाऊं और तराई क्षेत्र के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकेंगी।

सीमांत क्षेत्रों और शीतकालीन पर्यटन को प्रोत्साहन

प्रस्ताव में प्रधानमंत्री की आदि कैलाश यात्रा और शीतकालीन पर्यटन को दिए गए प्रोत्साहन का भी उल्लेख किया गया। कहा गया कि आदि कैलाश और ॐ पर्वत क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन बढ़ने से स्थानीय होमस्टे, परिवहन, हस्तशिल्प और स्वरोजगार को बढ़ावा मिला है। सीमांत गांवों को देश के अंतिम गांव के बजाय प्रथम गांव के रूप में पहचान देने की पहल का उल्लेख करते हुए बताया गया कि वाइब्रेंट विलेजेज कार्यक्रम के तहत प्रदेश के 51 सीमांत गांवों को प्राथमिकता में शामिल किया गया है।

प्रस्ताव के अनुसार, 6 मार्च 2025 को प्रधानमंत्री मुखवा पहुंचे थे और हर्षिल से उन्होंने देशवासियों से शीतकाल में उत्तराखंड आने का आह्वान किया था। इसके बाद शीतकालीन यात्रा में आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या लगभग 80 हजार से बढ़कर डेढ़ लाख तक पहुंच गई। मंत्रिमंडल ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए लखपति दीदी की परिकल्पना को भी महत्वपूर्ण बताया।

प्रधानमंत्री को भेजा जाएगा आभार पत्र

मंत्रिमंडल ने उत्तराखंड के विकास, जनकल्याणकारी योजनाओं, अवस्थापना परियोजनाओं और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान मिले निरंतर सहयोग के लिए प्रधानमंत्री के प्रति विशेष आभार व्यक्त किया। इस योगदान और प्रदेश के प्रति उनके विशेष स्नेह के लिए प्रधानमंत्री को आभार पत्र भी भेजा जाएगा।

धन्यवाद प्रस्ताव में वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में विकसित उत्तराखंड की महत्वपूर्ण भूमिका का संकल्प दोहराया गया। मंत्रिमंडल ने कहा कि विकास और विरासत, अर्थव्यवस्था और पर्यावरण तथा आधुनिकता और संस्कृति के बीच संतुलन बनाते हुए प्रदेश को विकसित राज्य बनाने के प्रयास जारी रहेंगे।