प्रयागराज: अंकिता भंडारी हत्याकांड से जुड़े कथित वीआईपी मामले में संदिग्ध दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के विरोध में अधिवक्ताओं ने जोरदार प्रदर्शन किया। अधिवक्ता मंच इलाहाबाद के बैनर तले जुटे वकीलों ने इसे न्याय व्यवस्था के साथ धोखा करार देते हुए महामहिम राष्ट्रपति को संबोधित चार सूत्रीय मांगों का ज्ञापन मजिस्ट्रेट के जरिए सौंपा।

प्रदर्शनकारी अधिवक्ताओं का कहना है कि जब इस बहुचर्चित मामले की जांच प्रक्रियाधीन है, ऐसे समय में किसी संदिग्ध व्यक्ति को राज्यपाल जैसे उच्च संवैधानिक पद पर बैठाना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और संवेदनहीन फैसला है। वकीलों ने आरोप लगाया कि संवैधानिक पद पर नियुक्ति से निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है और सार्वजनिक विश्वास को गहरी ठेस पहुंचेगी।

अधिवक्ता मंच ने मांग की है कि राष्ट्रपति इस नियुक्ति पर पुनर्विचार करते हुए इसे तत्काल रद्द करें। साथ ही मामले की पारदर्शी, स्वतंत्र और समयबद्ध जांच सुनिश्चित की जाए ताकि पीड़िता और उसके परिवार को वास्तविक न्याय मिल सके।
वकीलों ने अंकिता भंडारी के माता-पिता की न्याय की गुहार का पुरजोर समर्थन किया और दिल्ली में धरना दे रहे परिजनों को जबरन हटाए जाने की घटना की भी निंदा की। उन्होंने परिजनों की मांगों पर संवेदनशीलता से विचार करने की मांग उठाई।
इस दौरान आयोजित सभा को अधिवक्ता हृदय लाल मौर्य, नितेश कुमार, कुमारी प्रिया, मिस लुबना, ह्रदयेश यादव, हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के संयुक्त सचिव प्रेस कपिल देव यादव, प्रशांत, नंद लाल गुप्त और घनश्याम मौर्य ने संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन मंच के सह संयोजक मो. सईद सिद्दीकी ने किया। इस मौके पर वरिष्ठ अधिवक्ता के.के. राय, मंच के संयोजक राजवेंद्र सिंह, चार्ली प्रकाश, प्रबल प्रताप, यशवंत, प्रमोद कुमार गुप्त, वहाज अहमद सिद्दीकी, परवेज, शादाब और पुष्पराज सहित कई अधिवक्ता मौजूद रहे।